विधानसभा चुनाव के बाद सदन में विपक्ष की बढ़ेंगी मुश्किलें! राज्यसभा सीटों पर बड़ा उलटफेर कैसे?

विधानसभा चुनाव के बाद सदन में विपक्ष की बढ़ेंगी मुश्किलें! राज्यसभा सीटों पर बड़ा उलटफेर कैसे?


हाल ही में चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव तो किया ही है, अब इन नतीजों का असर संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में भी देखने को मिलेगा. खासकर विपक्षी बेंचों पर इसका गहरा असर पड़ेगा, जहां कई बड़े चेहरे और पार्टियों की ताकत घटती-बढ़ती नजर आएगी.

दरअसल, राज्यसभा के सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों (विधायकों) के जरिए चुने जाते हैं. इस वजह से जब भी किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है, तो भविष्य में खाली होने वाली राज्यसभा सीटों पर उसी दल के उम्मीदवार की जीत की संभावना बढ़ जाती है जिसे विधानसभा में बहुमत होता है. इस बार तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल के नतीजों ने क्षेत्रीय दलों के राज्यसभा में भविष्य को लेकर कई समीकरण बदल दिए हैं.

तमिलनाडु: TVK की नई एंट्री, DMK को बड़ा झटका

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने अपनी पहली ही चुनावी पारी में जबरदस्त प्रदर्शन किया. 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. सत्तारूढ़ DMK महज 59 और AIADMK 47 सीटों पर सिमट गई.

अब इस चुनावी जीत का सीधा फायदा TVK को राज्यसभा में भी मिलने वाला है. सूत्रों के मुताबिक, जून 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों में TVK के उम्मीदवार का ऊपरी सदन में पहुंचना लगभग तय है. इसकी एक बड़ी वजह AIADMK के राज्यसभा सांसद सी. वी. षणमुगम का इस्तीफा हो सकता है. षणमुगम हाल ही में मैलम विधानसभा सीट से चुनाव जीते हैं. अगर वे अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देते हैं, तो यह सीट खाली हो जाएगी और जून में होने वाले चुनावों में TVK अपनी विधानसभा में मौजूद ताकत के दम पर इस सीट को आसानी से जीत सकती है.

यह TVK की राज्यसभा में एंट्री का एक अनुमान से पहले मिला मौका होगा. भविष्य में DMK को इसका सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा. जून 2028 में तमिलनाडु से राज्यसभा की 6 सीटें खाली होने वाली हैं, जिनमें से 3 वर्तमान में DMK के पास हैं, 2 AIADMK के पास और 1 कांग्रेस के पास. लेकिन विधानसभा के ताजा समीकरणों के बाद, DMK महज 1 सीट ही जीत पाने की स्थिति में रह जाएगी. इस तरह राज्यसभा में DMK की ताकत में भारी गिरावट आएगी.

केरल: वाम दलों के लिए अस्तित्व बचाने की चुनौती

तमिलनाडु के नतीजों ने जहां TVK के लिए राज्यसभा के दरवाजे खोले हैं, वहीं केरल के नतीजों ने वामपंथी दलों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) ने राज्य में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को हराकर सत्ता में वापसी की है. राज्यसभा में इसका सबसे बड़ा झटका वाम दलों को लगेगा. अप्रैल 2027 में केरल से 3 राज्यसभा सदस्य रिटायर हो रहे हैं:

  • इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के अब्दुल वहाब
  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के जॉन ब्रिटास
  • CPI-M के ही वी. शिवदासन.

एक राज्यसभा सदस्य को चुनने के लिए विधानसभा में जितनी संख्या की जरूरत होती है, वाम मोर्चे के पास मौजूद 35 विधायकों का आंकड़ा उससे एक कम है. इसका मतलब है कि LDF अपनी ताकत के बल पर कोई भी सीट नहीं जीत पाएगी.

अप्रैल 2028 में जब तीन और सीटों के लिए चुनाव होंगे, तब भी वाम दलों के लिए हालात नहीं बदलेंगे. उस चुनाव में CPI के पी.पी. सुनीर रिटायर होंगे, जो 2030 तक वाम दलों के आखिरी राज्यसभा सदस्य होंगे. इस तरह 2030 के बाद राज्यसभा में वाम दलों की मौजूदगी लगभग खत्म हो जाएगी.

दूसरी ओर, इसका सबसे बड़ा फायदा कांग्रेस को मिलेगा. 2027 और 2028 में खाली होने वाली वाम दलों की इन सभी सीटों पर कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन अपने उम्मीदवार जिताने में सक्षम होगा. इससे राज्यसभा में कांग्रेस की ताकत बढ़ेगी.

पश्चिम बंगाल: TMC को देरी से लगेगा झटका

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बाहर कर दिया. लेकिन राज्यसभा में TMC की मौजूदगी पर इसका असर फौरन नहीं, बल्कि थोड़ी देरी से दिखेगा.

इसकी वजह राज्यसभा के चुनावों का चक्र है. पश्चिम बंगाल से अगली राज्यसभा सीटें अगस्त 2029 में खाली होंगी, जब 6 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 5 सीटें फिलहाल TMC के पास हैं, जिनमें राज्यसभा में TMC के नेता डेरेक ओ’ब्रायन भी शामिल हैं. 1 सीट भाजपा के पास है. राज्य विधानसभा में बीजेपी के मौजूदा बहुमत के चलते, TMC इन 5 में से सिर्फ 1 सीट ही जीत पाएगी.

TMC की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होंगी. अप्रैल 2030 में पार्टी के 4 और राज्यसभा सदस्य रिटायर होंगे, जिससे उसकी ताकत घटकर महज 6 रह जाएगी. यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक राज्य में अगले विधानसभा चुनाव नहीं हो जाते. हालांकि, एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि ये गणित तभी तक सही है जब तक पार्टी के सांसद पाला नहीं बदलते. मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

असम में 3 राज्यसभा सीटों का चुनाव मार्च 2026 में हो चुका है, इसलिए विधानसभा चुनाव से बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. वहीं, पुडुचेरी में सिर्फ 1 राज्यसभा सीट है, जहां से 2030 में चुनाव होगा.

विपक्षी एकता पर असर और कांग्रेस को फायदा

राज्यसभा में विपक्ष की यह घटती ताकत इंडिया गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका साबित होगी. मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यसभा में विपक्षी दलों के कुल 79 सांसद थे, जिनमें कांग्रेस के 27, TMC के 12, DMK के 10 और RJD के 5 सदस्य शामिल थे. इन चुनावी नतीजों के बाद यह संख्या और कम हो जाएगी.

हालांकि, विपक्ष की इस मुश्किल में कांग्रेस के लिए राहत की खबर भी है. 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों के दो चरणों (जून और नवंबर) के बाद कांग्रेस की कुल सीटों की संख्या 30 से बढ़कर 33 हो जाएगी. यह बढ़त मुख्य रूप से वाम दलों की कीमत पर होगी, खासकर केरल में अप्रैल 2027 और 2028 में होने वाले चुनावों में.

सदन में बीजेपी की बढ़ती ताकत और इसका असर

बीजेपी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्यसभा में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है. अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी के 7 बागी सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद सदन में बीजेपी की सदस्य संख्या 113 और राजग की कुल ताकत 148 हो गई है. चूंकि राज्यसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 245 है, इसलिए बहुमत का आंकड़ा 126 है, जिसे NDA आसानी से पार कर चुका है. हालांकि, संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत (164 सीटें) अभी भी उसकी पहुंच से दूर है.

इन बदलावों का सबसे अहम पहलू यह है कि इससे संसद में विपक्ष की आवाज और कमजोर होगी. जहां एक ओर क्षेत्रीय दलों की राज्यसभा में मौजूदगी घटेगी, वहीं कांग्रेस इकलौती ऐसी विपक्षी पार्टी होगी जिसकी सीटों में मामूली इजाफा होगा. लेकिन कुल मिलाकर, विपक्षी खेमे की संख्या में गिरावट आना तय है. एक मजबूत विपक्ष के बिना, लोकतांत्रिक संतुलन पर क्या असर पड़ेगा, यह एक अहम सवाल है.



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