Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को है. सुहागिनों के लिए वट सावित्रि व्रत किसी वरदान के कम नहीं माना जाता, क्योंकि ये वो दिन है जिसमें यमराज ने सावित्री को उसके पति के प्राण लौटा दिए थे. कहते हैं जो विवाहिता इस दिन वट वृक्ष की विधि विधान से पूजा करती हैं उनके पति की रक्षा स्वंय यमराज करते हैं और लंबी आयु का वरदान मिलता है. वट सावित्री व्रत के दिन कुछ खास बातों का ध्यान जरुर रखें नहीं तो व्रत अधूरा रह जाएगा.
वट सावित्री व्रत में 4 काम जरुर करें
- श्रृंगार में उधारी न करें- वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिनों को दुल्हन की तरह श्रृंगार कर पूजा करनी चाहिए, क्योंकि ये अखंड सौभाग्य प्राप्ति का व्रत है. लाल, पीली, या हरे रंग की साड़ी पहनें. ध्यान रहे इस दिन किसी से उधार लिया श्रृंगार सामान न पहने न ही लगाएं. जैसे सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ी आदि.
- परिक्रमा का महत्व – वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की परिक्रमा जरुर करें. आमतौर पर महिलाएं 7 बार परिक्रमा करती है. जो सात जन्मों के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. कुछ महिलाएं 21 या 108 बार भी परिक्रमा करती हैं. ये महज एक रीति वट वृक्ष की परिक्रमा जीवन में स्थिरता और वैवाहिक संबंधों में मजबूती का प्रतीक मानी जाती है.
- कच्चा सूत क्यों लपेटते हैं- वट सावित्री व्रत में पूजा के दौरान परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत जरुर लपेटा जाता है. दरअसल कच्चा सूत प्राकृतिक और सादा होता है. पूजा-पाठ में ऐसी वस्तुओं को अधिक शुभ माना जाता है जो प्राकृतिक और शुद्ध हों. धार्मिक कर्मकांडों में मौली, जनेऊ और कई पूजा विधियों में भी सूती धागे का उपयोग इसी कारण किया जाता है. कच्चा सूत जितनी परिक्रमा करें उतनी बार लपेटा जाता है.
- कथा के बिना अधूरा व्रत – वट सावित्री व्रत की पूजा कथा का जरुर श्रवण करें.इसके बिना व्रत निष्फल रहता है. वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनें.
स्कंद पुराण में वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत भविष्योत्तर पुराण में वट सावित्री व्रत के महत्व का वर्णन करते हुए कहा गया है कि जो स्त्री श्रद्धा और विधिपूर्वक यह व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है
वटस्य पूजनं कृत्वा सावित्र्याः कथामिमाम्. शृणुयाद् भक्तिभावेन सा भवेत् सौभाग्यवती॥”
अर्थात जो स्त्री वट वृक्ष की पूजा करके सावित्री कथा को भक्तिभाव से सुनती या पढ़ती है, वह सौभाग्यवती बनी रहती है.
“सावित्रीव्रतमेतत्तु सर्वपापप्रणाशनम्. आयुर्भाग्यप्रदं नॄणां पुत्रपौत्रविवर्धनम्॥”
अर्थात – सावित्री व्रत सभी पापों का नाश करने वाला, आयु, सौभाग्य तथा संतान सुख प्रदान करने वाला माना गया है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, पति-पत्नी के संबंध मजबूत होते हैं और परिवार में समृद्धि आती है. इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा सूत बांधती हैं और माता सावित्री तथा सत्यवान की पूजा करती हैं.
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