- 4543 पदों के लिए 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण में पहुंचे.
- 400 अंकों की परीक्षा में चौंकाने वाली कटऑफ रही.
- अभ्यर्थी पारदर्शिता के लिए व्यक्तिगत स्कोरकार्ड की मांग कर रहे.
- नॉर्मलाइजेशन और प्रश्न अंक वितरण पर स्पष्टता की मांग उठी.
4543 पदों के लिए आयोजित इस बड़ी परीक्षा में कुल 12,333 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए सफल घोषित किया गया है. यानी पदों की संख्या से लगभग 2.7 गुना अधिक उम्मीदवार अब दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक परीक्षाओं की तैयारी में जुटेंगे.
400 अंकों की परीक्षा और चौंकाने वाली कटऑफ
यह परीक्षा कुल 400 अंकों की थी. बोर्ड द्वारा जारी कटऑफ ने कई अभ्यर्थियों को चौंका दिया. अनारक्षित वर्ग की कटऑफ सबसे ज्यादा रही, जबकि एसटी वर्ग की कटऑफ सबसे कम दर्ज की गई. पुरुष और महिला अभ्यर्थियों के लिए अलग-अलग कटऑफ तय की गई है.
आंकड़ों के अनुसार अनारक्षित वर्ग में पुरुषों की कटऑफ 369.87854 और महिलाओं की 360.50336 रही. ओबीसी वर्ग में पुरुषों की 364.56024 और महिलाओं की 353.76545 रही. ईडब्ल्यूएस वर्ग में पुरुषों की 364.41142 और महिलाओं की 353.22001 दर्ज की गई. एससी वर्ग में पुरुषों की 350.91474 और महिलाओं की 337.94120 रही, जबकि एसटी वर्ग में पुरुषों की 334.65475 और महिलाओं की 306.91905 कटऑफ रही.
सोशल मीडिया पर उठी पारदर्शिता की मांग
नतीजे जारी होते ही कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए. किसी ने अपने अनुमानित अंकों के बावजूद चयन न होने की बात कही, तो किसी ने कम अंकों पर चयन की चर्चा की. ऐसे में उम्मीदवारों ने व्यक्तिगत स्कोरकार्ड जारी करने की मांग उठाई है, ताकि नॉर्मलाइजेशन के बाद वास्तविक अंक स्पष्ट हो सकें.
यह भी पढ़ें – Sleep Break In School: इस देश के स्कूलों में बच्चों को मिलता है सोने के लिए ब्रेक, जानें क्यों करते हैं ऐसा?
नॉर्मलाइजेशन बना चर्चा का विषय
अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा होने के कारण लागू की गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अब बहस का केंद्र बन गई है. अभ्यर्थी चाहते हैं कि शिफ्ट-वार आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह समझा जा सके कि किस शिफ्ट में अंकों का संतुलन किस तरह किया गया. इसके अलावा अंतिम उत्तर कुंजी में जिन 20 प्रश्नों पर आपत्तियां सही पाई गईं, उन पर अंक कैसे जोड़े गए, इसे लेकर भी स्पष्ट जानकारी की मांग हो रही है.
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
रिजल्ट के बाद उम्मीदवारों की ओर से कुछ प्रमुख मांगें सामने आई हैं: सभी अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत स्कोरकार्ड जारी किए जाएं, चयनित 12,333 अभ्यर्थियों की विस्तृत मेरिट सूची जारी हो, मेरिट सूची में रॉ मार्क्स और नॉर्मलाइजेशन के बाद के अंक दोनों शामिल हों, शिफ्ट-वार नॉर्मलाइजेशन डेटा सार्वजनिक किया जाए और डिलीट किए गए प्रश्नों पर अंक वितरण का स्पष्ट विवरण दिया जाए. अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे पूरी प्रक्रिया और साफ होगी.
ये भी पढ़ें: आईआईटी और एनआईटी की फीस में कितना होता है अंतर, जानिए किसमें मिलेगा अच्छा प्लेसमेंट?
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI






