बिना एक पैसा खर्च किए तैयार करें यह देसी खाद, दोगुनी रफ्तार से बढ़ेगी आपकी फसल

बिना एक पैसा खर्च किए तैयार करें यह देसी खाद, दोगुनी रफ्तार से बढ़ेगी आपकी फसल


Home Made Fertilizers: आज के दौर में जब खेती की लागत आसमान छू रही है और महंगे केमिकल फर्टिलाइजर्स मिट्टी की सेहत बिगाड़ रहे हैं. तब एक देसी और मुफ्त का नुस्खा एकदम बढ़िया साबित हो रहा है. इस किसान ने नीम की निंबोलियों से एक ऐसा जादुई जैविक घोल तैयार किया है. जो खाद और कीटनाशक दोनों का काम अकेले ही कर देता है.

यह तकनीक पूरी तरह से जीरो बजट पर आधारित है. क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री आपके आसपास के पेड़ों से ही मिल जाती है. इस तरीके को अपनाकर किसान न केवल अपनी मेहनत की कमाई बचा रहे हैं. बल्कि ऐसी फसल उगा रहे हैं जो पूरी तरह केमिकल-फ्री और मार्केट में हाई डिमांड वाली है. आप भी जान लें तरीका.

नीम की निंबोलियों से जैविक घोल बनाएं

इस देसी खाद को बनाने का तरीका बहुत ही सरल और असरदार है. सबसे पहले पकी हुई नीम की निंबोलियों को इकट्ठा किया जाता है और उन्हें अच्छी तरह धूप में सुखा लिया जाता है. इसके बाद एक खास प्रक्रिया के जरिए इनका अर्क निकालकर जैविक घोल तैयार होता है.

नीम में प्राकृतिक रूप से ऐसे एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. जो फसलों को किसी भी बाहरी हमले से बचाने में सक्षम हैं. यह घोल जब मिट्टी में जाता है. तो जड़ों को मजबूती देता है और जब पत्तों पर छिड़का जाता है. तो खतरनाक कीट इसके पास भी नहीं फटकते.

यह भी पढ़ें: अरहर की खेती में अपनाएं ये तरीका, कम मेहनत में मिलेगा कई गुना ज्यादा मुनाफा!

केमिकल फ्री खेती 

लगातार रासायनिक दवाओं और यूरिया-डीएपी के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी जमीन अपनी प्राकृतिक ताकत खोती जा रही है. लेकिन इस तरीके से हम मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बिना किसी खर्च के वापस पा सकते हैं. नीम से बना यह जैविक खाद मिट्टी में मौजूद मित्र कीटों और केंचुओं को नुकसान नहीं पहुंचाती.

बल्कि उन्हें फलने-फूलने का माहौल देती है. इससे जमीन भुरभुरी और उपजाऊ बनी रहती है, जिससे भविष्य में भी बंपर पैदावार की गारंटी मिलती है. खेती की लागत को कम करने और मुनाफे को बढ़ाने के लिए यह देसी तरीका आज के मॉडर्न किसानों के लिए सबसे सुरक्षित ऑप्शन बनकर आया है.

उत्पादन में भारी इजाफा 

इस देसी दवा का असर खेतों में साफ नजर आने लगा है. जिससे आसपास के क्षेत्रों में इसकी चर्चा तेज हो गई है. इस घोल के उपयोग के बाद उनकी फसलों की चमक और वजन दोनों में सुधार हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक से पैदा हुई सब्जियां और अनाज सेहत के लिए भी बेहतरीन हैं. जिससे मार्केट में इनके प्रीमियम दाम मिलते हैं. 

यह भी पढ़ें: जरबेरा की खेती के लिए सब्सिडी देती है सरकार, किसान ऐसे कमा सकते हैं मुनाफा



Source link