क्या पाकिस्तान के स्कूलों में भी लागू है ड्रेस कोड, वहां कैसे कपड़े पहनने पर पाबंदी?

क्या पाकिस्तान के स्कूलों में भी लागू है ड्रेस कोड, वहां कैसे कपड़े पहनने पर पाबंदी?


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  • नया आदेश सभी सरकारी, निजी स्कूलों पर लागू होगा।

कर्नाटक में हिजाब को लेकर हुए फैसले के बाद देशभर में स्कूल ड्रेस कोड पर चर्चा तेज हो गई है. सवाल उठ रहा है कि क्या दूसरे देशों में भी स्कूलों में पहनावे को लेकर इतने सख्त नियम हैं? खासकर पाकिस्तान में के स्कूलों में बच्चों को क्या पहनना जरूरी है और किन कपड़ों पर रोक है.

रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान के ज्यादातर सरकारी स्कूलों में सलवार कमीज को यूनिफॉर्म बनाया गया है. लड़कियों के लिए सलवार कमीज के साथ दुपट्टा जरूरी माना जाता है, जबकि लड़कों के लिए फॉर्मल शर्ट और पैंट अनिवार्य हैं. कई स्कूलों में रंग भी तय होते हैं, जैसे ग्रे, सफेद या नीला.

साल 2025 में पंजाब प्रांत में एक आदेश जारी हुआ. जिसमें स्कूलों में जींस, टी-शर्ट और टाइट कपड़ों पर रोक लगा दी गई थी. साफ कहा गया था कि स्कूल पढ़ाई की जगह है, फैशन दिखाने की नहीं.

इस आदेश के बाद सरकारी और कई निजी स्कूलों में पारंपरिक और ढीले कपड़े ही पहनना जरूरी कर दिया गया. वहीं, पाकिस्तान में दुपट्टा या हेडस्कार्फ आम बात है. मुस्लिम बहुल देश होने के कारण कई स्कूलों में लड़कियां इसे यूनिफॉर्म का हिस्सा मानकर पहनती हैं.

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इधर भारत में कर्नाटक सरकार ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए 2022 का वह आदेश वापस ले लिया, जिसमें कक्षा में हिजाब पर रोक की बात थी. नए आदेश में कहा गया है कि यूनिफॉर्म जरूरी रहेगी, लेकिन उसके साथ सीमित धार्मिक और पारंपरिक प्रतीक जैसे हिजाब, जनेऊ, रुद्राक्ष पहने जा सकते हैं.

क्या पहन सकेंगे छात्र

कर्नाटक में ड्रेस कोड को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. राज्य की कांग्रेस सरकार ने 2022 में बीजेपी सरकार द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कक्षा में हिजाब पर रोक की अनुमति दी गई थी. नए फैसले के तहत अब स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राएं यूनिफॉर्म के साथ हिजाब, जनेऊ, पगड़ी, शिव माला और रुद्राक्ष जैसे आस्था से जुड़े प्रतीक पहन सकेंगे.

किन पर रहेगा लागू

सरकार द्वारा जारी नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह नियम राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगा. हालांकि यूनिफॉर्म पहले की तरह जरूरी रहेगी, लेकिन उसके साथ सीमित सामुदायिक या आस्था-आधारित प्रतीकों की अनुमति दी जाएगी.

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