Happy Shani Dev Jayanti Sanskrit Wishes 2026: हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है. इस वर्ष शनिवार 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जा रही है. मान्यता है कि, ज्येष्ठ अमावस्या पर ही शनि महाराज का जन्म हुआ था. इसलिए हर साल इसी तिथि पर शनि देव का जन्मोत्सव मनाया जाता है. शनिवार का दिन शनि देव का सबसे प्रिय वार है. ऐसे में शनिवार के दिन शनि जयंती होने के इस का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है.
शनि जयंती पर श्रद्धालु शनि मंदिर जाकर शनि देव की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन के दुख, कष्ट और शनि दोष से मुक्ति की कामना करते हैं. साढ़ेसाती और ढैया से पीड़ित लोग शनि जयंती पर विशेष उपाय भी करते हैं.
शनि जयंती के अवसर पर लोग अपने प्रियजनों, दोस्तों और परिवार के सदस्यों को शुभकामनाएं भी भेजते हैं. अगर आप इस बार कुछ अलग और आध्यात्मिक अंदाज में शुभकामनाएं देना चाहते हैं, तो संस्कृत में शुभकामनाएं संदेश भेजना बेहतरीन विकल्प हो सकता है.
शास्त्रों में संस्कृत को देववाणी कहा जाता है. धार्मिक पर्व-त्योहारों पर संस्कृत भाषा में श्लोक, मंत्र और शुभकामनाएं भेजने से आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. साथ ही ये संदेश परंपरा और संस्कृति से जुड़ाव भी बढ़ाते हैं.
यहां देखें शनि जयंती के खास संस्कृत शुभकामना संदेश, श्लोक और मंत्र (Shani Janmotsav wishes, Sanskrit shlok mantra quotes images Shubhkamnaye)
शनि जयंती संस्कृत शुभकामना (Shani Janmotsav ki Hardik Shubhkamnaye)
न्यायदेवस्य सूर्यपुत्रस्य श्रीशनिदेवस्य जयन्त्युत्सवे सर्वेभ्यः मङ्गलकामनाः।
शनि जयन्त्यां शुभकामनाः।
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
सर्वेभ्यः शनि जयन्त्याः पावन अवसरे हार्दिक्यः अभिनन्दनाः

शनिदेवः भवतां जीवने सुख-शान्ति-समृद्धिं यच्छतु।
शनि जयन्त्यां 2026 हार्दिक्यः शुभकामनाः।

ॐ शं शनैश्चराय नमः।
शनि जयन्त्यां हार्दिक्यः शुभकामनाः।

नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।
शनि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदः।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
- शनि कृपया भवेत् सौख्यं, दुःखं दूरं पलायते।
- सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः।
- शुभं भवतु ते नित्यं शनिदेवप्रसादतः।
- शनैश्चरः प्रसन्नोऽस्तु, सर्वदुःखं विनाशयेत्।
शनि देव मंत्र (Shani Dev Mantra in Sanskrit)
ओम शं शनैश्चराय नमः
ओम शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
ओम नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
ॐ भगभवाय विद्मये मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात् ॥
ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥
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