‘पाकिस्तान पर एहसान किया’, ईरान संग सीजफायर को लेकर ये क्या बोल गए ट्रंप? शहबाज-मुनीर को झटका

‘पाकिस्तान पर एहसान किया’, ईरान संग सीजफायर को लेकर ये क्या बोल गए ट्रंप? शहबाज-मुनीर को झटका


अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने से पाकिस्तान की भूमिका एक क्षेत्रीय मध्यस्थ से बढ़कर अब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक महत्वपूर्ण सीक्रेट मीडिएटर की हो गई है तो वहीं दूसरी ओर इस्लामाबाद के मध्यस्थता प्रयासों की बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है.

पाकिस्तान पर एहसान किया- ट्रंप

चीन की अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा से लौटते समय शुक्रवार (15 मई) को एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ मौजूदा युद्धविराम कर पाकिस्तान पर एहसान किया है. इस बयान से इस्लामाबाद शांति वार्ता को एक अलग कॉन्टेक्स्ट में देखा जा रहा है, जिसे पहले एक नाजुक, बहुपक्षीय प्रयास के रूप में देखा जा रहा था. ट्रंप ने इसे पाकिस्तानी नेतृत्व के प्रति रियायत के रूप में पेश कर इस्लामाबाद की राजनयिक पूंजी को मान्यता दे दी है. साथ ही संकेत दिया है कि वॉशिंगटन क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर लगातार सहयोग की अपेक्षा रखता है.

ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब वो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता को लेकर परिणामों के बारे में मीडिया को जानकारी दे रहे थे. पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया को लेकर पूछे जाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उप प्रधानमंत्री इशाक डार की तारीफ की.

सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका

वरिष्ठ राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित विदेश मंत्रालय ने महीने की शुरुआत में ईरान के 5 सूत्रीय प्रस्ताव पर तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे वॉशिंगटन को भेज दिया था. ट्रंप की सार्वजनिक स्वीकृति से यह पुष्टि होती है कि पाकिस्तान के इसी माध्यम से गतिरोध टूटा और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों की रक्षा के लिए युद्धविराम समझौता संभव हो पाया.

पाकिस्तान के लिए ये युद्धविराम केवल एक कूटनीतिक जीत नहीं बल्कि एक आर्थिक आवश्यकता भी है. पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने देश की ईंधन आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को गंभीर रूप से बाधित करने का खतरा पैदा कर दिया था. पर्यवेक्षकों का कहना है कि सीजफायर कराने में सफल रहने के कारण इस्लामाबाद ने अपने ऊर्जा मार्गों को सुरक्षित कर लिया है और साथ ही खुद को अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष समाधान के लिए एक तटस्थ मंच के रूप में स्थापित कर लिया है.

इस्लामाबाद को ट्रंप का इशारा
इसके अलावा ट्रंप के बयान से अप्रत्यक्ष रूप से दक्षिण एशिया पर दबाव बढ़ गया है. इस एहसान को सार्वजनिक कर अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि इस्लामाबाद को अपनी अन्य अस्थिर सीमाओं के प्रबंधन में खुद एक्टिव रहना चाहिए, विशेष रूप से अफगानिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर ट्रंप ने ये इशारा दिया है. हाल ही में पाकिस्तान की बन्नू पुलिस चौकी पर हमला हुआ है.

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