Hemkund Sahib Yatra 2026: हेमकुंड साहिब धाम सिखो की पवित्र धार्मिक यात्रा है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है. ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब से पहला जत्था रवाना हुआ. दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने हरी झंडी दिखाकर पहले जत्थे को रवाना किया.
सिख श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी पवित्र श्री हेमकुंड साहिब यात्रा का पहला जत्था मंगलवार को ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब से विधिवत रवाना किया गया. पंज प्यारों की अगुवाई में रवाना हुए इस जत्थे को दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधु (Taranjit Singh Sandhu) ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा के लिए रवाना किया.
A few more glimpses from the auspicious flag-off ceremony at the Gurdwara Sahib in Rishikesh today. The profound faith and vibrant energy of the Sangat as they set out on this sacred journey is indeed inspiring. pic.twitter.com/1ox9SVBvkZ
— LG Delhi (@LtGovDelhi) May 20, 2026
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे परिसर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला. उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह को भी कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन प्रदेश में घोषित राजकीय शोक के चलते वह समारोह में उपस्थित नहीं हो सके. गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट के अनुसार श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे. यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिससे कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
23 मई 2026 को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
हेमकुंड साहिब यात्रा सिख धर्म की सबसे पवित्र और कठिन तीर्थयात्रा है. यह यात्रा उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब तक की जाती है. सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है, जिसके चलते कपाट बंद कर दिए जाते हैं. मौसम अनुकूल होने पर हर साल गर्मियों में यात्रा दोबारा शुरू की जाती है.
आमतौर पर यह यात्रा हर साल मई से अक्टूबर तक चलती है. सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है, जिसके चलते कपाट बंद कर दिए जाते हैं. मौसम अनुकूल होने पर हर साल गर्मियों में यात्रा दोबारा शुरू की जाती है. इस वर्ष 23 मई से यात्रा की शुरुआत हो रही है और इसी दिन श्री हमेकुंड साहिब के कपाट भी खोले जाएंगे.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की तपोभूमि है. ‘दसम ग्रंथ’ में भी इस पवित्र स्थान का उल्लेख मिलता है. यही कारण है कि हर साल हजारों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं. हेमकुंड साहिब पहुंचकर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव करते हैं.
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