Summer Crop Protection Tips: गर्मियों का मौसम आते ही किसानों के सामने अपनी फसलों को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है. इस मौसम में तेज धूप, चिलचिलाती लू और बढ़ता तापमान न केवल फसलों की नमी सोख लेता है. बल्कि खेतों में आग लगने का खतरा भी काफी बढ़ा देता है. जरा सी लापरवाही या एक छोटी सी चिंगारी पूरी साल की कड़ी मेहनत को पल भर में राख कर सकती है. आज के इस आधुनिक दौर में जब मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है.
पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ स्मार्ट और नए जमाने के उपायों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. अपनी फसलों को इस भीषण गर्मी के प्रकोप और आग की दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखने के लिए किसानों को कुछ बेहद जरूरी कदम उठाने होंगे जिससे वे अपनी मेहनत और पैदावार दोनों को सुरक्षित रख सकें. जान लें तरीके.
सूखे अवशेषों का सही प्रबंधन
खेतों को आग के बड़े खतरे से बचाने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करना. अक्सर देखा जाता है कि किसान भाई फसल कटाई के बाद बचे हुए सूखे ठूंठ को खेत में ही जला देते हैं. जो बेहद खतरनाक साबित होता है. समझदारी भरा तरीका यह है कि इस कबाड़ को जलाने के बजाय मल्चिंग तकनीक से जमीन में मिला दिया जाए या जैविक खाद बनाई जाए.
इसके अलावा अपने खेतों के आसपास की सूखी घास और झाड़ियों की सफाई लगातार करते रहें जिससे बाहर की कोई चिंगारी खेत तक न पहुंचे. कंबाइन हार्वेस्टर जैसी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करते समय भी पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कई बार मशीनों के गर्म साइलेंसर से निकलने वाली चिंगारी भी सूखे खेतों में आग लगा देती है.
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सिंचाई तकनीक और पोषक तत्वों का इस्तेमाल
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से फसलों को बचाने के लिए सिंचाई के समय और तरीकों में बदलाव करना बेहद जरूरी है. दोपहर की तेज धूप में पानी देने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पानी तुरंत भाप बनकर उड़ जाता है. इसकी जगह सुबह जल्दी या शाम के वक्त हल्की सिंचाई करना सबसे सही रहता है. जिससे खेत में नमी बनी रहती है और मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है.
आज के दौर में किसानों को ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे स्मार्ट तरीकों को अपनाना चाहिए. जो कम पानी में भी पौधों की जड़ों तक नमी पहुंचाते हैं. इसके साथ ही फसलों पर पोटैशियम या आधुनिक लिक्विड सीवीड का छिड़काव करने से पौधों में गर्मी झेलने की ताकत बढ़ती है और फसलें हरी-भरी रहती हैं.
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