दिल्ली जिमखाना विवाद में हाईकोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, सरकार बोली- हम क्लब को जमीन…

दिल्ली जिमखाना विवाद में हाईकोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, सरकार बोली- हम क्लब को जमीन…


दिल्ली जिमखाना क्लब खाली कराने के सरकार के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने केंद्र को 8 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

लुटियंस दिल्ली के बीचोंबीच स्थित जिमखाना क्लब की याचिका पर मंगलवार (26 मई, 2026) को दिल्ली हाईकोर्ट में  सुनवाई हुई. इस दौरान केंद्र ने कहा कि इसके बदले में सरकार जमीन का दूसरा टुकड़ा भी दे सकती है. सरकार ने 22 मई को क्लब को नोटिस भेजा था कि उसे 5 जून तक उसको यह जमीन खाली करनी होगी, जिसके खिलाफ क्लब हाईकोर्ट पहुंचा है.

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने क्लब की ओर से दलील रखते हुए कहा इस मामले में 5-6 प्रमुख मुद्दे हैं. इस पर अदालत ने कहा पहले हम चुनौती दिए गए सरकारी आदेश को पढ़ लेते हैं.

केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर क्लब 5 तारीख को अपनी मर्जी से खाली नहीं भी करता है, तो भी कब्जा नहीं लिया जाएगा, जब तक कि बेदखली के लिए कानून के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि जो क्लब मेंबर्स हैं अगर जमीन ले भी ली जाती है, तो भी आपकी मेंबरशिप बनी रहेगी.

एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता को दूसरी जमीन भी ऑफर की जाएगी. उन्होंने कहा कि  क्लॉज 4 में एक सिस्टम दिया गया है जिसके तहत हम लीज तय कर सकते हैं. इसमें उठाए जाने वाले अलग-अलग कदमों के बारे में बताया गया है.

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अधिग्रहण के तहत प्रावधान इस निमय में दिए गए  हैं. उनमें से एक है मुआवजा देना, मुआवजा पैसे के तौर पर हो सकता है या सरकार जमीन का दूसरा टुकड़ा दे सकती है. उन्होंने कहा कि  हम कानून के तहत तय प्रोसेस के हिसाब से काम करेंगे. हम बस जाकर इसे खाली नहीं कराएंगे.

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कोर्ट ने एसजी तुषार मेहता से पूछा कि क्या उनका स्टेटमेंट रिकॉर्ड कर सकते हैं. क्लब की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी दलील दी कि यह एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी है. कोर्ट ने उसनसे पूछा कि क्लब की शिकायत क्या है? क्या आपके मेंबर का कोई विवाद नहीं है? एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि सरकार ने आदेश दिया है कि 5 जून अपनी मर्जी से जिमखाना क्लब को हैंडओवर किया जाए, जबकि यह मामला पहले से NCLT के सामने है.

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