Goat Farming Tips: गर्मियों के मौसम में जब पारा आसमान छूने लगता है और गर्म हवाएं यानी लू चलने लगती है, तो इसका सबसे बुरा असर हमारे बेजुबान पशुओं पर पड़ता है. खासकर बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि बकरियों को गर्मी बहुत जल्दी लगती है और वे हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाती हैं. जरा सी लापरवाही की वजह से बकरियों की तबीयत अचानक बिगड़ सकती है और कई बार उनकी जान तक चली जाती है.
ऐसे में अगर आप बकरी पालन के बिजनेस से जुड़े हैं, तो आपको इस भीषण गर्मी में उनके खान-पान से लेकर रहने के इंतजाम पर खास ध्यान देना होगा. चलिए पशुपालन एक्सपर्ट्स की कुछ बेहद जरूरी सलाह और आसान टिप्स के बारे में जानते हैं. जिन्हें अपनाकर आप अपनी बकरियों को इस जानलेवा गर्मी और धूप के कहर से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं.
हीट स्ट्रोक से बकरियों को बचाएं
भीषण गर्मी से बकरियों को बचाने के लिए सबसे पहला काम उनके बाड़े को ठंडा रखना है. बकरियों के रहने की जगह पर सीधे धूप नहीं आनी चाहिए, इसलिए बाड़े की छत पर पुआल, घास या हरी नेट डालकर उसे ढक दें. बाड़े के अंदर ताजी हवा के आने-जाने का पूरा इंतजाम होना चाहिए जिससे वहां उमस या सफोकेशन न बढ़े.
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पानी का रखें ध्यान
बकरियों को दोपहर के वक्त यानी सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक भूलकर भी चराने के लिए बाहर न ले जाएं, क्योंकि इस दौरान धूप सबसे तेज होती है. अगर आप उन्हें बाहर बांधते हैं, तो ध्यान रखें कि वहां कोई घनी छाया वाला पेड़ हो. इन आसान तरीकों को अपनाकर आप अपनी बकरियों को लू की चपेट में आने से काफी हद तक बचा सकते हैं.
बकरियों का सही डाइट प्लान
गर्मियों के दिनों में बकरियों के शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) बिल्कुल नहीं होनी चाहिए इसलिए उनके सामने हर समय साफ और ठंडा पानी मौजूद रहना चाहिए. दिन में कम से कम 3 से 4 बार उनका पानी जरूर बदलें. पानी में थोड़ा सा नमक या इलेक्ट्रोल पाउडर मिलाकर देने से उनके शरीर में मिनरल्स का बैलेंस बना रहता है.
इन बातों का रखें ध्यान
इस मौसम में बकरियों को दोपहर के भारी चारे के बजाय सुबह और शाम के वक्त हरा और रसीला चारा खिलाएं जिससे उन्हें अंदरूनी ठंडक मिले. अगर कोई बकरी सुस्त दिखाई दे उसके मुंह से लार बहे या वह तेजी से हांफने लगे, तो तुरंत उसे किसी ठंडी जगह पर ले जाएं. उसके सिर पर ठंडा पानी डालें और बिना देर किए तुरंत पशु डॉक्टर से संपर्क करें.
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