Eid Ul Adha Namaz Timing: ईद-उल-अजहा की नमाज गुरुवार 28 मई को सुबह 5:30 से 10:30 बजे तक शहर की सभी ईदगाह व मस्जिदों मे अदा की जाएगी. नमाज को लेकर ईदगाह व मस्जिदों में तैयारी जारी है. ईदगाह व मस्जिदों में अदा की जाने वाली ईद-उल-अजहा नमाज का समय जारी हो गया है. वहीं कुर्बानी 28, 29 व 30 मई को होगी.
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि कुर्बानी में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें. अल्लाह ने कुरआन शरीफ में कुर्बानी का हुक्म दिया है. मालिके निसाब पर कुर्बानी वाजिब है. उन्होंने लोगों से शांति व्यवस्था बनाये रखने व साफ-सफाई का खास ख्याल रखने की अपील की. साथ ही कहा कि कुर्बानी की फोटो व वीडियो न बनाया जाए और न ही सोशल मीडिया पर शेयर किया जाए.
दिखावा अल्लाह को पसंद नहीं है. कुर्बानी से निकलने वाले अवशेषों को इधर-उधर न फेंकें बल्कि गड्ढों में दफन करें. कुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीबों व फकीरों में जरूर बांटें, जिनके यहां कुर्बानी न हुई हो उनके घर सबसे पहले गोश्त भेजें. चमड़ा ले जाने वाले लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें. मुहब्बत व भाईचारे को आम करें.
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि कुर्बानी को लेकर मजाकिया मैसेज वगैरह बिल्कुल भी न बनाएं और न ही शेयर करें। दीन में यह सब बेहूदा काम जायज नहीं है. ईदगाह में ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व आपके सहाबा की सुन्नत है, इसलिए कोशिश रहे कि ईद-उल-अजहा की नमाज ईदगाह में ही अदा करें. ईदगाह ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा की नमाज के लिए खास है. साफ-सफाई का ख्याल रखें. प्रशासन का सहयोग करें. सोशल मीडिया पर न ही कुर्बानी की फोटो डालें और न ही वीडियो.
ईदगाह व मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की नमाज का समय (सुबह)
1. मस्जिद सुप्पन खां खूनीपुर निकट कुरैशिया स्कूल – 5:30 बजे
2. मुसम्मात नसीबन बीबी (कादरिया) मस्जिद मुफ्तीपुर नखास चौक कोतवाली रोड – 5:35 बजे
3. सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर – 5:45 बजे
4. मरकजी नूरी जामा मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन, रजा मस्जिद जाफरा बाजार, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर – 6:00 बजे
5. नूरानी मस्जिद हुमायूंपुर तरंग क्रासिंग – 6:15 बजे
6. नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर, मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर, हुसैनी जामा मस्जिद बड़गो, बिलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर, बिलाल जामा मस्जिद दरिया चक भट्टा रसूलपुर, मस्जिद अहले बैत पुराना गोरखपुर गोरखनाथ, मस्जिद जोहरा मौलवी चक बड़गो, मस्जिद मियां साहब जुबली फार्म सैनिक विहार नंदानगर, नूर जामा मस्जिद चिलमापुर, बरकाती मस्जिद नौरंगाबाद, कादरिया मस्जिद पचपेड़वा – 6:30 बजे
7. शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह रसूलपुर, अल मदीना सुन्नी जामा मस्जिद लतीफ नगर कॉलोनी, मस्जिद फैजाने इश्के रसूल शहीद अब्दुल्लाह नगर सिधारीपुर, मकबरे वाली मस्जिद बनकटी चक – 6:45 बजे
8. ईदगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल, मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक, ईदगाह इमामबाड़ा इस्टेट मियां बाजार, सुब्हानिया जामा मस्जिद तकिया कवलदह, फिरदौस जामा मस्जिद जमुनहिया बाग गोरखनाथ, हुसैनिया ईदगाह निकट पीएसी कैम्प बिछिया, मस्जिद जामे नूर बहादुर शाह जफर कॉलोनी बहरामपुर, अकबरी जामा मस्जिद अहमदनगर, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, नूरी जामा मस्जिद डिबहिया इंजीनियरिंग कॉलेज, दरोगा साहब मस्जिद उर्दू बाजार अफगान हाता, मस्जिद जलील शाह खूनीपुर जब्हखाना – 7:00 बजे
9. ईदगाह फतेहपुर मेडिकल कॉलेज के सामने, जामा मस्जिद रसूलपुर, जामा मस्जिद उर्दू बाजार, ईदगाह रानीडीहा, झरना टोला मस्जिद, मस्जिद शेख झाऊ साहबगंज, हज्जिन बीबी की जामा मस्जिद धर्मशाला बाजार – 7:30 बजे
10. औलिया जामा घोसीपुरवा, नूरी जामा मस्जिद रानीडीहा, मस्जिद उंचवा, ईदगाह पुलिस लाइन, ईदगाह सेहरा बाले का मैदान बहरामपुर, ईदगाह बेनीगंज – 8:00 बजे
11. सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार – 8:15 बजे
12. शाही मस्जिद बसंतपुर सराय – 10:00 बजे
13. सुन्नी जामा मस्जिद सौदागार मोहल्ला बसंतपुर – 10:30 बजे
ओपन बुक कॉम्पिटिशन के विजेता बने रूशान, सकीना व सना
मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद में हुए ‘बुजुर्गों के अकीदे’ किताब पर ओपन बुक कॉम्पिटिशन के विजेताओं की घोषणा की गई, जिसमें पहला स्थान सकीना बेगम, सना फातिमा, मुहम्मद रूशान, दूसरा स्थान मुहम्मद आसिफ अंसारी, शीरीन बानो, तजमीन इरशाद, मुहम्मद तहजीब, मुहम्मद हस्सान व तीसरा स्थान मुहम्मद जावेद, सानिया, शिफा खातून, अयान दानिश, जुबैदा खातून ने हासिल किया. सभी को दर्स-ए-कुरआन के दौरान सर्टिफिकेट व इनाम देकर सम्मानित किया गया.
सूरह कुरैश का दर्स देते हुए हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि सूरह कुरैश कुरआन-ए-पाक की 106वीं सूरह है. जो मक्का में नाजिल हुई। इसमें कुल चार आयतें हैं. यह उन प्रमुख सूरतों में से है जो इंसान को अल्लाह के नेमतों, हिफाजत और रोजी-रोटी की याद दिलाकर सुकून और बरकत प्रदान करती है. यह सूरह हमें कुरैश कबीले को मिली सुरक्षित यात्रा और व्यापार की याद दिलाती है. इसे पढ़ने से इंसान के अंदर अल्लाह द्वारा दी गई खुशहाली, रिज्क और अमन के प्रति शुक्रगुजारी का अहसास जागता है. रोजाना इस सूरह की तिलावत करने से मन को शांति मिलती है.
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा सूरह कुरैश मक्का के शक्तिशाली कुरैश कबीले को अल्लाह की उन नेमतों की याद दिलाती है, जिसके कारण वे बिना किसी डर के व्यापारिक यात्राएं करते थे. मक्का रेगिस्तान में होने के बावजूद काबा की वजह से अल्लाह ने पूरे अरब में क़ुरैश को बहुत इज्जत और सुरक्षा दी थी. इस सूरह में अल्लाह उनसे कहता है कि जब तुम्हें इतनी सुख-सुविधा, भोजन और सुरक्षा मिली है, तो तुम्हें केवल इसी काबा के रब की इबादत करनी चाहिए.
इस सूरह को नियमित पढ़ने से दिल का डर दूर होता है और सुरक्षा मिलती है. भूख और तंगी से बचने के लिए इस सूरह की तिलावत बहुत मुफीद है. सफर पर निकलने से पहले इसे पढ़ने से यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहती है. अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई. इस दौरान शीरीन आसिफ, आसिफ महमूद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद सहित तमाम प्रतिभागी मौजूद रहे.






