- अग्निवीरों के परिवारों को भी विशेष सम्मान से किया गया सम्मानित।
जम्मू और कश्मीर के बडगाम जिले में स्थित जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (JAKLI) रेजिमेंटल सेंटर से शनिवार (30 मई, 2026) को कुल 538 अग्निवीर पास-आउट होकर भारतीय सेना में शामिल हो गए हैं. अपनी 28 हफ्तों की कठिन ट्रेनिंग को पूरा करने वाले अग्निवीरों में 500 से ज्यादा सैनिक जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने की शपथ ली है और भारतीय सेना में देश सेवा के लिए सैनिक के तौर पर शामिल हो गए हैं.
अग्निवीरों की देशभक्ति की भावना से गूंज उठा पासिंग आउट परेड
जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (JAKLI) रेजिमेंटल सेंटर का परेड ग्राउंड इन नए सैनिकों की निष्ठा और देशभक्ति की भावना से उस समय गूंज उठा, जब 538 अग्निवीरों के सातवें बैच ने भारतीय सेना की पुरानी परंपराओं को निभाते हुए अपनी पासिंग-आउट मार्च की.
इस शानदार पासिंग-आउट परेड समारोह की भव्यता में चार चांद लगाने के लिए कई खास मेहमान मौजूद थे, जिनमें 16 कोर के GOC लेफ्टिनेंट जनरल पीके मिश्रा और सेना के कई अन्य बड़े अधिकारी शामिल थे. इनकी मौजूदगी ने इस मौके को और भी खास बना दिया.
सैनिकों के परिवारों के बीच खुशी की लहर
जब अधिकारियों ने इस खास मौके पर इन सैनिकों को सम्मानित किया, तो उनके माता-पिता अपने बेटों को सम्मानित होते देख गर्व से भर उठे. यह एक बहुत ही भावुक पल था, जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चों ने आज देश के लिए सबसे बड़ा बलिदान देने का वादा किया है. पासिंग-आउट परेड में शामिल सैनिकों के परिवार भी इस मौके पर बहुत खुश नजर आए. इस परेड में किसी के भाई, किसी के बेटे और किसी के पति, सभी शामिल थे. हर किसी को गर्व का गहरा एहसास हुआ, यह सोचकर कि उनके सपने आज आखिरकार सच हो गए हैं.
यह परेड सिर्फ एक रस्मी दिखावा नहीं थी, बल्कि यह मुश्किलों का सामना करते हुए भी भारत के मजबूत इरादों का एक जोरदार सबूत देने वाला ऐलान है. हाल में हुए आतंकवादी हमलों के बाद, इस परेड को देश की ताकत और एकता के एक मजबूत प्रतीक के तौर पर देखा गया.
अग्निवीरों के माता-पिता को भी किया गया सम्मानित
गर्व से भरे माता-पिता को उनके अपने अनकहे बलिदानों और अपने बेटों को देश की सेवा के लिए समर्पित करने के लिए खास सम्मान के मेडल दिए गए. जब आखिरी सलामी की गूंज ठंडी हवा में गूंजी और तिरंगा नीले आसमान के नीचे शान से लहराया, तो संदेश साफ था कि जम्मू और कश्मीर के नौजवान सिर्फ भविष्य की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि वे कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं, राइफलें ऊंची किए हुए और उनके दिलों में देश के लिए जोरदार धड़कनें धड़क रही हैं.
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