Dhumavati Jayanti 2026: मां धूमावती को क्यों चढ़ाया जाता है नमकीन भोग? जानें पौराणिक कथा, शुभ

Dhumavati Jayanti 2026: मां धूमावती को क्यों चढ़ाया जाता है नमकीन भोग? जानें पौराणिक कथा, शुभ


Dhumavati Jayanti 2026: सनातन धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व बताया गया है. इन दस महाविद्याओं में मां धूमावती को सातवीं महाविद्या माना जाता है. उनका स्वरूप अन्य देवियों से काफी अलग है. जहां अधिकांश देवियां सौंदर्य, समृद्धि और मंगल का प्रतीक मानी जाती हैं, वहीं मां धूमावती वैराग्य, तप, त्याग और जीवन के कठोर सत्यों को दर्शाती हैं. धूमावती जयंती के दिन मां की विशेष पूजा-अर्चना करने से साधक को भय, शत्रु, नेगेटिव शक्तियों और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

वर्ष 2026 में धूमावती जयंती 22 जून, सोमवार को मनाई जाएगी. यह दिन तंत्र साधना, देवी की पूजा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है.

 धूमावती जयंती 2026 शुभ मुहूर्त: 

पंचांग के अनुसार, धूमावती जयंती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है.

  •  अष्टमी तिथि प्रारंभ: 21 जून 2026 को दोपहर 03:20 बजे से
  •  अष्टमी तिथि समाप्त: 22 जून 2026 को दोपहर 03:39 बजे तक
  •  उदयातिथि के अनुसार धूमावती जयंती: 22 जून 2026, सोमवार

इसी दिन मां धूमावती का मुख्य पूजन, व्रत और साधना की जाएगी.

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 मां धूमावती की उत्पत्ति कैसे हुई ? 

देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती को बहुत ज्यादा भूख लगी थी. उन्होंने भगवान शिव से भोजन की मांग की, लेकिन जब काफी समय तक भोजन नहीं मिला तो माता ने क्रोध में आकर भगवान शिव को ही निगल लिया. इसके बाद उनके शरीर से धुएं का विशाल गुबार निकलने लगा. उसी धुएं से मां धूमावती प्रकट हुई.

एक अन्य मान्यता है जिसके अनुसार,  धूमावती देवी उस शक्ति का प्रतीक हैं जो सृष्टि के विनाश के बाद भी विद्यमान रहती है. वे शून्यता, वैराग्य और परम सत्य का स्वरूप मानी जाती हैं. इसलिए उनकी साधना भौतिक सुखों से अधिक आध्यात्मिक ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के लिए की जाती है.

धूमावती जयंती पूजा विधि: 

  • सुबह नहाकर साफ कपड़े पहने.
  • पूजा स्थान पर दीपक और धूप जलाकर मां धूमावती का ध्यान करें.
  • मां को भुने चने, नमकीन मिश्रण (सेव, दालमोठ), कचौरी और काले तिल अर्पित करें.
  • इसके बाद धूमावती मंत्र का 108 बार जाप करें.
  • धूमावती मंत्र- “ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।। धूं धूं धूमावती ठः ठः।।”

क्यों नहीं करतीं सुहागिन महिलाएं पूजा?

धार्मिक कथाओं के अनुसार मां धूमावती को विधवा स्वरूप वाली महाविद्या माना जाता है. उनका स्वरूप वैराग्य, त्याग, एकांत और संसार की नश्वरता का प्रतीक है. वहीं विवाहित महिलाओं के लिए सुहाग, दांपत्य सुख, सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि को महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी कारण कुछ तांत्रिक और पारंपरिक मतों में सुहागिन महिलाओं को मां धूमावती की प्रत्यक्ष पूजा से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

 झांसी के पास स्थित प्रसिद्ध धूमावती मंदिर

उत्तर प्रदेश के झांसी के निकट मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. यहां मां बगलामुखी के साथ मां धूमावती की भी विशेष साधना की जाती है. धूमावती मंदिर में दूर-दूर से साधक और श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. विशेष रूप से धूमावती जयंती और गुप्त नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. माना जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना शीघ्र फल देती है.

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