Kisan Samriddhi Yojana:मौसम के बदलने, बेमौसम बारिश, सूखे या ओलावृष्टि से किसानों की महीनों की मेहनत और फसल को भारी नुकसान पहुंचता है. ऐसी स्थिति में किसानों को फाइनेंशियली सपोर्ट करने के लिए सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक बहुत बड़ा और मजबूत सहारा साबित होती है. अब सरकार ने इस स्कीम में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल काफी हद तक बढ़ा दिया है. जिससे फसल के नुकसान का एकदम सही कैलकुलेशन हो सके और देश के किसानों को क्लेम का पैसा बिना किसी लंबी या झंझट वाली प्रोसेस के समय पर मिल जाए.
अब पुराने ढर्रे और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं है. नई तकनीक के आने से अब पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ क्लेम का सेटलमेंट किया जा रहा है. अगर आपकी भी फसल को किसी प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान हुआ है, तो आपको घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. चलिए आपको बताते हैं कैसे इस नए डिजिटल सिस्टम के तहत आप अपनी खराब हुई फसल का बीमा क्लेम आसानी से कैसे पा सकते हैं.
फसल नुकसान की सूचना कब दें?
फसल को नुकसान होने पर सबसे पहला और बेहद जरूरी कदम होता है सही समय पर इसकी संबंधित विभाग को जानकारी देना. नियम के मुताबिक किसी भी प्राकृतिक आपदा या मौसम की अचानक मार से फसल खराब होने के ठीक 72 घंटे यानी 3 दिन के भीतर बीमा कंपनी या फिर कृषि विभाग को इसकी लिखित सूचना देना जरूरी होता है.
ऐसे पहुंचाए सूचना
किसान सूचना के लिए फसल बीमा ऐप का बहुत आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा आप सरकार के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके, अपने नजदीकी कृषि अधिकारी, बैंक शाखा या जन सेवा केंद्र में जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. सही और तय समय पर दी गई सूचना ही आपके क्लेम के पूरे प्रोसेस को तेजी से आगे बढ़ाती है और आपको मुआवजा मिलने का रास्ता साफ होता है.
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नई टेक्नोलॉजी से कैसे हो रही है नुकसान की जांच?
अब खेतों में पटवारी या सर्वेयर के आने का इतंजार करने का झंझट काफी हद तक खत्म हो चुका है. सरकार ने फसल नुकसान के एकदम सटीक कैलकुलेशन के लिए यस-टेक और विंड्स जैसी एडवांस तकनीकों को शामिल किया है. इसके तहत अब सैटेलाइट इमेजिंग, रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी और ड्रोन्स के जरिए सीधे प्रभावित खेतों की मॉनिटरिंग और सर्वे किया जाता है.
इस नई और स्मार्ट टेक्नोलॉजी से यह पता लगाना बेहद आसान हो गया है कि किस पर्टिकुलर इलाके में और असल में कितने परसेंट फसल खराब हुई है. इससे सर्वे रिपोर्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाती है और किसानों को उनके हक का सही मुआवजा मिल पाता है.
क्लेम के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी?
बीमा क्लेम का पैसा बिना किसी टेक्निकल इश्यू या देरी के सीधे आपके बैंक अकाउंट में पहुंचे इसके लिए कुछ जरूरी डाक्यूमेंट्स आपके पास हमेशा तैयार होने चाहिए. अप्लाई करते समय आपके पास फसल बीमा पॉलिसी का मुख्य नंबर या ऑनलाइन एप्लिकेशन नंबर होना बेहद जरूरी है.
इसके अलावा किसान का आधार कार्ड, जमीन से जुड़े खसरा-खतौनी के पेपर्स, बैंक पासबुक की साफ कॉपी जिसमें आपका बैंक अकाउंट नंबर और सही IFSC कोड साफ-साफ दिख रहा हो और बुआई का सर्टिफिकेट जरूरी होता है. इसके साथ ही अपनी बर्बाद और खराब हो चुकी फसल की कुछ साफ फोटोज भी ऐप या फॉर्म के साथ अपलोड करनी होती हैं. जिससे वेरिफिकेशन का काम तुरंत पूरा हो सके.

कितना मिलेगा मुआवजा और कैसे आएगा पैसा?
नुकसान की जांच पूरी होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी क्लेम की कुल रकम तय करती है. इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत क्लेम का सारा पैसा सीधे और सुरक्षित तरीके से किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजा जाता है. अगर आपकी फसल पूरी तरह या बड़े पैमाने पर बर्बाद हुई है.
तो सम इंश्योर्ड के हिसाब से पूरा मुआवजा सीधे आपके अकाउंट में जमा कर दिया जाता है. डिजिटल ट्रैकिंग और सैटेलाइट सर्वे की वजह से अब क्लेम मिलने में महीनों का लंबा वेट नहीं करना पड़ता. बल्कि कुछ ही हफ्तों के अंदर पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है. जिससे किसानों को तुरंत फाइनेंशियली सपोर्ट मिल जाता है.
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