जंगल-झाड़ियों और बंजर टीलों पर उगने वाला सीताफल अब महज एक जंगली फल ही नहीं रहा. बल्कि आज के दौर में शहरों में आइसक्रीम, शेक्स, मिठाई और बड़े फूड ब्रांड्स में सीताफल की जबरदस्त डिमांड रहती है. जिस वजह से आजकल किसान इसे उगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इसकी खेती में सबसे बढ़िया बात यह है कि इस फल को उगाने के लिए न तो आपको बहुत ज्यादा पानी चाहिए और न ही कोई बहुत ज्यादा उपजाऊ जमीन. कंकड़-पत्थर वाली सूखी जमीन और बंजर इलाकों में भी इसका पौधा बेहद मजबूती से खड़ा रहता है.
जहां ज्यादातर बागवानी फसलों को आवारा पशु, नीलगाय और बंदर बर्बाद कर देते हैं. वहीं सीताफल के पत्तों के कड़वेपन की वजह से कोई भी जानवर इसे छूता तक नहीं है. पुराने देसी तरीकों को छोड़कर अगर इसकी मार्डन और ग्राफ्टेड किस्मों से बाग लगाया जाए. तो यह काफी कम लागत में कई सालों तक आपको बढ़िया कमाई दे सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आप एक एकड़ में सीताफल के पौधे लगाते हैं तो उनसे कितना मुनाफा कमा सकते हैं.
ऐसे करें खेती की शुरूआत
सीताफल की खेती में अगर आप अच्छी पैदावार चाहते हैं तो सबसे पहले इसके लिए आपको सही और हाइब्रिड किस्मों लगानी होंगी. पुराने बीज वाले पौधों में फल आने में पांच से छह साल लग जाते हैं और फल का साइज भी छोटा रहता है. लेकिन एनएमके-1(गोल्डन), बालानगर, अर्का सहन और वाशिंगटन जैसी ग्राफ्टेड किस्में बाजार में छाई हुई हैं. जिनके फल बड़े, गूदेदार और बेहद मीठे होते हैं. बाग लगाने के लिए जून से लेकर अगस्त का मानसूनी मौसम सबसे सही होता है.
खेत में 5×5 मीटर या 4×4 मीटर की दूरी पर 2×2 फीट के गड्ढे खोदें. इन गड्ढों को 15-20 दिनों तक तेज धूप में खुला छोड़ दें जिससे मिट्टी के कीड़े और फंगस खत्म हो जाएं. इसके बाद गड्ढों में 15 से 20 किलो सड़ी गोबर की खाद, आधा किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट और थोड़ी सी नीम की खली मिट्टी में मिलाकर भर दें और फिर कलमी पौधे की रोपाई करें.
ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं
सीताफल एक बेहद सख्त जान पौधा है. जिसे बहुत ज्यादा देखरेख या खाद-पानी की जरूरत नहीं होती. शुरुआत के दो साल तक पौधों को हल्की सिंचाई की दरकार रहती है. जिसके लिए ड्रिप सिस्टम सबसे बेस्ट माना जाता है. जब पेड़ बड़े हो जाते हैं तो वह सूखे को भी आसानी से झेल लेते हैं. बस ध्यान रखें कि बरसात के मौसम में बगीचे में जलभराव न होने दें. बेहतर फलों के लिए साल में एक बार मानसून से ठीक पहले हल्की कटाई-छंटाई जरूर करें.
जिससे नई और मजबूत शाखाएं निकलें. जब तक सीताफल के पौधे बड़े होकर पूरा बगीचा नहीं घेर लेते यानी शुरुआती 2 से 3 साल तब तक किसान दो कतारों के बीच की खाली जमीन पर मूंग, उड़द, चना, मटर या हरी मिर्च जैसी दलहनी और नकदी फसलें लगाकर पहले दिन से ही अपनी रेगुलर खेती का खर्च आसानी से निकाल सकते हैं.
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एक एकड़ से कितना होगा फायदा?
सीताफल की खेती से होने वाली कमाई की बात की जाए तो एक एकड़ जमीन में 4×4 मीटर की दूरी पर लगभग 250 से 300 कलमी पौधे आराम से लग जाते हैं. पौधों की खरीद, गड्ढे की तैयारी, खाद और शुरुआती ड्रिप सिस्टम मिलाकर पहले साल करीब 50 से 60 हजार रुपये का वन-टाइम खर्च आता है. कलमी पौधे रोपाई के तीसरे साल से ही बढ़िया फल देना शुरू कर देते हैं. पांचवें साल तक पहुंचते-पहुंचते एक पूरी तरह तैयार पेड़ से हर सीजन में औसतन 40 से 50 किलो तक क्वालिटी फल मिल जाते हैं.

इस हिसाब से एक एकड़ से करीब 100 से 120 क्विंटल फल का कुल उत्पादन होता है. बाजार में बड़े और मीठे सीताफल का थोक भाव 50 से 80 रुपये प्रति किलो बहुत आराम से मिल जाता है. अगर 50 रुपये का न्यूनतम रेट भी मानें, तो एक एकड़ से हर साल 5 से 6 लाख रुपये की सीधी कमाई होती है. जिसमें सालाना खर्च महज 30-40 हजार रुपये ही आता है.
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