- सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सभी FIR रद्द किए।
- CJP ने छात्रों के लिए कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया।
- कोर्ट ने छात्रों का भविष्य ध्यान में रखकर यह फैसला सुनाया।
- 2,873 आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर नई FIR दर्ज होगी।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से स्टूडेंट प्रोसेस्ट में शामिल छात्रों पर किए गए सभी एफआईआर को रद्द करने और इस मामले का खत्म करने के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पर अपना पहला रिएक्शन दिया है. अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें वह भारत का संविधान दिखाते हुए नजर आ रहे हैं. इसके साथ ही, उन्होंने अपने पोस्ट के कैप्शन में जय हिंद लिखकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की एक इमोजी भी शेयर की है.
CJP ने आधिकारिक X हैंडल से क्या किया पोस्ट?
वहीं, देश की सर्वोच्च अदालत की तरफ से मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को इस आदेश के आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी प्रतिक्रिया दी. सीजेपी ने इसे छात्रों की बड़ी जीत करार दिया है.
Jai Hind 🇮🇳 pic.twitter.com/5lHvWX585h
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 1, 2026
Big Victory for the Students!
The Supreme Court has dismissed the unjust legal cases against students.
Our demands have been heard, and no student will face such action anymore.
Inquilab Zindabad! https://t.co/sLGSA9oa2O
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 1, 2026
पोस्ट में सीजेपी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ चल रहे सभी अन्यायपूर्ण मुकदमों को खारिज कर दिया है. हमारी मांगें सुनी गई हैं और अब किसी भी छात्र को आगे ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा. इंकलाब जिंदाबाद!’
सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले में फैसला देते हुए नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर करीब एक महीने तक प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने कहा कि वह यह फैसला उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर ले रही है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और अच्छी नीयत के साथ छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया था.
कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 20 से 25 जुलाई, 2026 के बीच छात्र प्रदर्शन से जुड़े जितने भी एफआईआर दर्ज किए गए हैं, उन्हें रद्द करने के साथ इस मामले को अब बंद करने का आदेश दिया जाता है. देश के जिन भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए गए हैं, उन पर अब आगे जांच नहीं बढ़ाई जाएगी और न हीं कोई कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, आपराधिक प्रवृति के 2,873 लोगों के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की जाएगी.
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