Aaj Ka Panchang 30 September 2026: आज 30 सितंबर, बुधवार को पंचांग देखकर सिर्फ यह जानना काफी नहीं है कि चतुर्थी कब तक है. आज असली सवाल है कि चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध एक ही दिन क्यों हैं और किस तिथि वाले पितरों का श्राद्ध किस समय करना चाहिए.
नई दिल्ली के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगी. इसके बाद पंचमी शुरू हो जाएगी. सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर भरणी नक्षत्र खत्म होगा और कृत्तिका नक्षत्र शुरू होते ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी लग जाएगा. दोपहर 1 बजकर 13 मिनट पर चंद्रमा मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करेगा. खास बात यह है कि आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है.
30 सितंबर का पंचांग एक नजर में
- सूर्योदय- सुबह 6:13 बजे
- भरणी नक्षत्र- सुबह 7:36 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 7:36 बजे से 1 अक्टूबर सुबह 6:14 बजे तक
- चंद्रमा- मेष राशि में दोपहर 1:13 बजे तक
- चतुर्थी तिथि- दोपहर 2:55 बजे तक
- पंचमी तिथि- दोपहर 2:55 बजे से
- विजय मुहूर्त- दोपहर 2:10 से 2:58 बजे तक
- राहुकाल- दोपहर 12:11 से 1:40 बजे तक
- सूर्यास्त- शाम 6:08 बजे
- चंद्रोदय- रात 8:30 बजे
Panchang के अनुसार 30 सितंबर 2026 को चतुर्थी श्राद्ध, पंचमी श्राद्ध और मासिक कार्तिगाई है.
पितर की मृत्यु चतुर्थी को हुई थी तो श्राद्ध कब करें?
30 सितंबर को चतुर्थी दोपहर 2:55 बजे तक है. श्राद्ध कर्म में केवल सूर्योदय की तिथि नहीं देखी जाती, बल्कि कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल का विशेष महत्व होता है.
नई दिल्ली में कुतुप काल करीब 11:47 बजे से 12:35 बजे, रौहिण काल 12:35 से 1:22 बजे और अपराह्न काल इसके बाद लगभग 3:45 बजे तक रहेगा.
चतुर्थी तिथि 2:55 बजे तक मौजूद है. इसलिए जिन पितरों की मृत्यु चतुर्थी तिथि में हुई थी, उनका श्राद्ध 30 सितंबर को ही होगा. संभव हो तो श्राद्ध को पंचमी लगने से पहले पूरा करना बेहतर रहेगा.
मृत्यु पंचमी तिथि में हुई थी तो 30 सितंबर या 1 अक्टूबर?
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम है. पंचमी 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे शुरू होगी और 1 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:35 बजे समाप्त हो जाएगी. लेकिन 1 अक्टूबर को मुख्य अपराह्न काल शुरू होने से पहले ही पंचमी खत्म हो जाएगी.
इसी कारण पंचमी श्राद्ध भी 30 सितंबर को रखा गया है. पंचमी तिथि वाले पितरों के लिए 2:55 बजे के बाद अपराह्न काल में श्राद्ध किया जा सकता है. पंचांगों में भी 30 सितंबर को ही चतुर्थी और पंचमी दोनों श्राद्ध बताए गए हैं.
यानी आसान भाषा में समझें कि चतुर्थी वाले पितरों का श्राद्ध 2:55 बजे से पहले और पंचमी वाले पितरों का श्राद्ध 2:55 बजे के बाद किया जाएगा.
आज सर्वार्थ सिद्धि योग है, फिर भी हर समय शुभ क्यों नहीं?
आज सुबह 7:36 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग लग जाएगा और यह अगले दिन सुबह 6:14 बजे तक रहेगा. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस पूरी अवधि में बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ काम शुरू किया जा सकता है.
आज यमगण्ड सुबह 7:43 से 9:12 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:42 से दोपहर 12:11 बजे तक और राहुकाल दोपहर 12:11 से 1:40 बजे तक रहेगा. दुर्मुहूर्त सुबह 11:47 से दोपहर 12:35 बजे तक है.
इसलिए यदि किसी नए काम की शुरुआत करनी है तो केवल आज सर्वार्थ सिद्धि योग है, सुनकर समय तय न करें. उस समय राहुकाल या दूसरा अशुभ काल तो नहीं पड़ रहा, यह भी देखना जरूरी है.
बुधवार को आज अभिजीत मुहूर्त क्यों नहीं है?
यह 30 सितंबर के पंचांग की सबसे जरूरी बातों में से एक है. आमतौर पर रोज दोपहर के आसपास अभिजीत मुहूर्त खोजा जाता है. लेकिन बुधवार को अभिजीत काल को शुभ कार्य के लिए मान्य नहीं माना जाता.
इसलिए आज दोपहर 12 बजे के आसपास का समय देखकर उसे सामान्य दिनों की तरह अभिजीत मुहूर्त न मानें.
इसके बजाय आज विजय मुहूर्त दोपहर 2:10 से 2:58 बजे तक रहेगा. हालांकि किसी खास संस्कार, विवाह, गृह प्रवेश या संपत्ति खरीद जैसे कामों के लिए केवल दैनिक पंचांग पर्याप्त नहीं होता.
आज चंद्रमा कब राशि बदलेगा?
चंद्रमा सुबह मेष राशि में रहेगा और दोपहर 1:13 बजे वृषभ राशि में प्रवेश करेगा. इसी समय कृत्तिका नक्षत्र का पहला चरण भी पूरा होगा. सूर्य कन्या राशि में रहेगा.
इसका मतलब यह है कि सुबह और दोपहर बाद चंद्रमा की राशिगत स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी. यही कारण है कि केवल आज चंद्रमा मेष में है लिख देना पूरे दिन के लिए सही जानकारी नहीं होगी.
आज का पूरा पंचांग
आज बुधवार है. पूर्णिमांत गणना के अनुसार आश्विन मास और अमांत गणना के अनुसार भाद्रपद मास चल रहा है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 2:55 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी शुरू होगी.
भरणी नक्षत्र सुबह 7:36 बजे तक और उसके बाद कृत्तिका नक्षत्र रहेगा. वज्र योग रात 12:20 बजे तक रहेगा और इसके बाद सिद्धि योग शुरू होगा. बालव करण दोपहर 2:55 बजे तक और इसके बाद कौलव करण रहेगा.
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:37 से 5:25 बजे, विजय मुहूर्त दोपहर 2:10 से 2:58 बजे, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:08 से 6:33 बजे और निशिता मुहूर्त रात 11:47 से 12:35 बजे तक रहेगा.
राहुकाल दोपहर 12:11 से 1:40 बजे, यमगण्ड सुबह 7:43 से 9:12 बजे, गुलिक काल सुबह 10:42 से 12:11 बजे और वर्ज्य काल शाम 6:49 से 8:19 बजे तक रहेगा.
30 सितंबर को याद रखने वाली 3 बातें
आज चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध दोनों हैं, इसलिए अपने पितर की मृत्यु तिथि के अनुसार समय चुनें. सुबह 7:36 बजे के बाद सर्वार्थ सिद्धि योग जरूर है, लेकिन उसके बीच आने वाले राहुकाल और दूसरे अशुभ समय को नजरअंदाज न करें. और बुधवार होने के कारण आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है.
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