कितना भारी सामान उठा सकता है ड्रोन, इंसान के लिए कितना बड़ा साइज जरूरी?

कितना भारी सामान उठा सकता है ड्रोन, इंसान के लिए कितना बड़ा साइज जरूरी?


दरअसल यूक्रेन की 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड का एक जवान फ्रंटलाइन पर बुरी तरह घायल हो गया था. चारों तरफ बिछी बारूदी सुरंगों और रूसी हमलों की वजह से जमीन के रास्ते वहां मदद पहुंचाना नामुमकिन था. ऐसे में यूक्रेनी कंपनी गुर्जुफ डिफेंस के बने एक हेक्साकॉप्टर ड्रोन को वहां भेजा गया. सैनिक ने खुद को हार्नेस से ड्रोन के नीचे बांधा और ऑपरेटर ने उसे हवा में लटकाकर सुरक्षित बचा लिया.

इस घटना के बाद हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ड्रोन कितना वजन उठा सकता है? बात अगर आम कैमरे या डिलीवरी वाले छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन की करें तो इनकी क्षमता महज 2 से 5 किलो तक ही होती है. वहीं खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले एग्रीकल्चरल ड्रोन 10 से 40 किलो तक का वजन आसानी से लेकर उड़ सकते हैं.

इस घटना के बाद हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ड्रोन कितना वजन उठा सकता है? बात अगर आम कैमरे या डिलीवरी वाले छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन की करें तो इनकी क्षमता महज 2 से 5 किलो तक ही होती है. वहीं खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले एग्रीकल्चरल ड्रोन 10 से 40 किलो तक का वजन आसानी से लेकर उड़ सकते हैं.

लेकिन जब बात किसी इंसान या भारी हथियारों को उठाने की आती है. तो इसके लिए हैवी-लिफ्ट यानी भारी वजन उठाने वाले इंडस्ट्रियल और मिलिट्री ड्रोन्स की जरूरत होती हैं. यह आम ड्रोन्स की तरह छोटे नहीं होते बल्कि इनमें 6 से 8 बेहद ताकतवर मोटर्स और बड़े पंखे लगे होते हैं. जिन्हें हेक्साकॉप्टर या ऑक्टोकॉप्टर कहा जाता है. यह ड्रोन 100 किलो से लेकर 250 किलो तक वजन उठा सकते हैं.

लेकिन जब बात किसी इंसान या भारी हथियारों को उठाने की आती है. तो इसके लिए हैवी-लिफ्ट यानी भारी वजन उठाने वाले इंडस्ट्रियल और मिलिट्री ड्रोन्स की जरूरत होती हैं. यह आम ड्रोन्स की तरह छोटे नहीं होते बल्कि इनमें 6 से 8 बेहद ताकतवर मोटर्स और बड़े पंखे लगे होते हैं. जिन्हें हेक्साकॉप्टर या ऑक्टोकॉप्टर कहा जाता है. यह ड्रोन 100 किलो से लेकर 250 किलो तक वजन उठा सकते हैं.

किसी इंसान को हवा में सुरक्षित उड़ाने के लिए ड्रोन की पेलोड क्षमता कम से कम 100 से 150 किलो होनी ही चाहिए. एक सामान्य इंसान का वजन 70 से 80 किलो होता है और अगर वह सैनिक है. तो उसके बुलेटप्रूफ गियर और सामान का वजन मिलाकर यह 100 किलो के पार चला जाता है. ऐसे में ड्रोन की मोटर में इतनी ताकत होनी चाहिए कि वह डगमगाए बिना उड़ सके.

किसी इंसान को हवा में सुरक्षित उड़ाने के लिए ड्रोन की पेलोड क्षमता कम से कम 100 से 150 किलो होनी ही चाहिए. एक सामान्य इंसान का वजन 70 से 80 किलो होता है और अगर वह सैनिक है. तो उसके बुलेटप्रूफ गियर और सामान का वजन मिलाकर यह 100 किलो के पार चला जाता है. ऐसे में ड्रोन की मोटर में इतनी ताकत होनी चाहिए कि वह डगमगाए बिना उड़ सके.

अब सवाल है कि इंसान को उठाने वाले इस ड्रोन का साइज कितना बड़ा होना जरूरी है? इस काम के लिए हैवी-लिफ्ट ड्रोन का साइज किसी छोटी कार या बड़े डाइनिंग टेबल जितना बड़ा होता है. जब इसके चारों या छहों पंखे खुलते हैं,. तो इसका दायरा 8 से 12 फीट यानी करीब 3 से 4 मीटर तक फैल जाता है. जिससे हवा को नीचे धकेलने के लिए पर्याप्त दबाव बन सके.

अब सवाल है कि इंसान को उठाने वाले इस ड्रोन का साइज कितना बड़ा होना जरूरी है? इस काम के लिए हैवी-लिफ्ट ड्रोन का साइज किसी छोटी कार या बड़े डाइनिंग टेबल जितना बड़ा होता है. जब इसके चारों या छहों पंखे खुलते हैं,. तो इसका दायरा 8 से 12 फीट यानी करीब 3 से 4 मीटर तक फैल जाता है. जिससे हवा को नीचे धकेलने के लिए पर्याप्त दबाव बन सके.

इतने बड़े साइज के साथ-साथ इसका फ्रेम भी आम प्लास्टिक के बजाय बेहद मजबूत कार्बन फाइबर या फिर एविएशन ग्रेड एल्युमिनियम से बनाया जाता है. यूक्रेन के रेस्क्यू मिशन में भी ड्रोन में कोई बंद केबिन नहीं था. बल्कि मजबूत फ्रेम के नीचे ही हार्नेस बांधा गया था. इसके साथ ही इसमें खास स्टेबलाइजेशन तकनीक लगाई गई थी. जिससे हवा में लटकते इंसान के हिलने-डुलने पर भी ड्रोन पलटे नहीं.

इतने बड़े साइज के साथ-साथ इसका फ्रेम भी आम प्लास्टिक के बजाय बेहद मजबूत कार्बन फाइबर या फिर एविएशन ग्रेड एल्युमिनियम से बनाया जाता है. यूक्रेन के रेस्क्यू मिशन में भी ड्रोन में कोई बंद केबिन नहीं था. बल्कि मजबूत फ्रेम के नीचे ही हार्नेस बांधा गया था. इसके साथ ही इसमें खास स्टेबलाइजेशन तकनीक लगाई गई थी. जिससे हवा में लटकते इंसान के हिलने-डुलने पर भी ड्रोन पलटे नहीं.

अगर दुनिया में मौजूद सबसे ज्यादा क्षमता वाले मानवरहित ड्रोन्स की बात करें तो आज की तारीख में इनकी मैक्सिमम कैपेसिटी 300 से 500 किलोग्राम के पार पहुंच चुकी है. डिफेंस और कार्गो सेक्टर की कई कंपनियां ऐसे बड़े हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक ड्रोन तैयार कर चुकी हैं जो पहाड़ी इलाकों में सेना के लिए गोला-बारूद, राशन और भारी मशीनरी पहुंचाने का काम करते हैं.

अगर दुनिया में मौजूद सबसे ज्यादा क्षमता वाले मानवरहित ड्रोन्स की बात करें तो आज की तारीख में इनकी मैक्सिमम कैपेसिटी 300 से 500 किलोग्राम के पार पहुंच चुकी है. डिफेंस और कार्गो सेक्टर की कई कंपनियां ऐसे बड़े हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक ड्रोन तैयार कर चुकी हैं जो पहाड़ी इलाकों में सेना के लिए गोला-बारूद, राशन और भारी मशीनरी पहुंचाने का काम करते हैं.

यूक्रेन का यह रेस्क्यू ऑपरेशन बताता है कि आने वाला समय पैसेंजर ड्रोन्स और एयर टैक्सी का ही है. दुनिया भर में ऐसी फ्लाइंग टैक्सी पर काम चल रहा है जो दो से चार इंसानों यानी 400 किलो तक का वजन उठाकर शहर के ट्रैफिक के ऊपर से उड़ सकेंगी. जो तकनीक आज जंग के मैदान में जान बचा रही है कल वही आम लोगों के सफर का हिस्सा बनेगी.

यूक्रेन का यह रेस्क्यू ऑपरेशन बताता है कि आने वाला समय पैसेंजर ड्रोन्स और एयर टैक्सी का ही है. दुनिया भर में ऐसी फ्लाइंग टैक्सी पर काम चल रहा है जो दो से चार इंसानों यानी 400 किलो तक का वजन उठाकर शहर के ट्रैफिक के ऊपर से उड़ सकेंगी. जो तकनीक आज जंग के मैदान में जान बचा रही है कल वही आम लोगों के सफर का हिस्सा बनेगी.

Published at : 21 Oct 2026 05:13 PM (IST)

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