Mirch Ki Kheti: मिर्च की खेती करने वाले किसानों को फसल की अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ खाद और पानी का ही ध्यान नहीं रखना होता, बल्कि पौधों को बीमारियों से बचाना भी जरूरी है. कई बार खेत में पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं, पत्तियां मुड़ जाती हैं या नर्सरी में छोटे पौधे गलकर गिरने लगते हैं.
शुरुआत में किसान इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आगे चलकर यही परेशानी पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. मिर्च की फसल में लीफ कर्ल वायरस, डंपिंग ऑफ और उकठा रोग का खतरा रहता है. समय रहते इनकी पहचान और सही देखभाल से नुकसान को कम किया जा सकता है.
पत्तियां मुड़ने लगें तो लीफ कर्ल वायरस का खतरा
मिर्च की फसल में लीफ कर्ल वायरस एक आम समस्या है. यह बीमारी मुख्य रूप से सफेद मक्खी जैसे कीटों के जरिए फैलती है. इसके असर से पौधों की पत्तियां ऊपर की ओर मुड़कर कटोरे जैसी दिखने लगती हैं. पत्तियां छोटी रह जाती हैं और पौधों की बढ़वार रुकने लगती है. ज्यादा प्रकोप होने पर पौधे बौने रह जाते हैं और उनमें फूल व फल भी कम लगते हैं.
बचाव के लिए खेत में ऐसे पौधे दिखाई दें, तो उन्हें सावधानी से उखाड़कर खेत से बाहर कर दें. साथ ही सफेद मक्खी पर नजर रखें. इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है.
नर्सरी में पौधे गिरने लगें तो समझें डंपिंग ऑफ का खतरा
मिर्च की नर्सरी में डंपिंग ऑफ रोग से छोटे पौधों को काफी नुकसान हो सकता है. यह समस्या मिट्टी में मौजूद फफूंद और ज्यादा नमी के कारण होती है. इसमें अंकुर निकलने के बाद पौधे के तने का निचला हिस्सा गलने लगता है और पौधा जमीन पर गिर जाता है. इससे नर्सरी में स्वस्थ पौधों की संख्या कम हो जाती है.
इससे बचने के लिए नर्सरी की क्यारियां जमीन से करीब 15 सेंटीमीटर ऊंची बनाएं, ताकि पानी जमा न हो. बीजों का सही तरीके से उपचार करें और मिट्टी में ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा में करें. बीमारी के लक्षण दिखने पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मैंकोजेब जैसे फफूंदनाशकों का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें.
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पौधे अचानक सूखने लगें तो हो सकता है उकठा रोग
उकठा रोग में मिर्च के पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं और धीरे-धीरे सूख जाते हैं. पौधे को उखाड़कर देखने पर जड़ों में काले धब्बे या सड़न दिखाई दे सकती है. इससे बचने के लिए एक ही खेत में बार-बार मिर्च की खेती न करें. फसल चक्र अपनाएं और मिर्च के बाद धनिया या दलहनी फसलें लगा सकते हैं.
इसके अलावा कार्बेंडाजिम 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से जड़ों के पास उपचार करने की सलाह दी जाती है. इसका इस्तेमाल करने से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
फसल की नियमित निगरानी करना जरूरी
मिर्च की फसल को इन बीमारियों से बचाने के लिए खेत में पानी जमा न होने दें. हमेशा स्वस्थ बीज और अच्छी पौध का चुनाव करें. रोपाई के बाद भी पौधों की नियमित जांच करते रहें. अगर पत्तियों में बदलाव, पौधों का गिरना या अचानक मुरझाना दिखाई दे, तो तुरंत कारण पहचानकर सही उपाय अपनाएं. इससे फसल को बड़े नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है.
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