Biofuel: ईरान में जंग की वजह से तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच इंडोनेशिया ने बायोफ्यूल B50 को लॉन्च करने का ऐलान कर दिया है. यह 50% पाम ऑयल-बेस्ड बायोडीजल और 50% पारंपरिक डीजल का मिश्रण है. इस फ्यूल का अभी परीक्षण चल रहा है और जुलाई तक इसके इस्तेमाल में आने की उम्मीद है.
भारत पर इसका असर
भारत अपनी पाम ऑयल की जरूरतों का 50 परसेंट से अधिक हिस्सा इंडानेशिया से ही आयात करता है. ऐसे में अगर इंडोनेशिया में इसकी खपत ज्यादा बढ़ गई तो भारत के लिए सप्लाई में कमी आ सकती है. सप्लाई में कमी आएगी, तो देश में एडिबल ऑयल या खाना पकाने में इस्तेमाल में आने वाला और महंगा हो जाएगा.
पाम ऑयल का इस्तेमाल बिस्किट बनाने से लेकर नमकीन, साबुन, शैम्पू जैसी रोजमर्रा की चीजें बनाने के लिए किया जाता है. ऐसे में पाम ऑयल के आयात पर खर्च बढ़ेगा, तो जाहिर तौर पर इन सारे प्रोडक्ट्स की भी कीमतें बढ़ेंगी. इससे महंगाई बढ़ सकती है.
इंडोनेशिया का क्या है प्लान?
2025 तक, इंडोनेशिया का कच्चे तेल का शुद्ध आयात लगभग 7.8 बिलियन डॉलर रहा. प्रस्तावित B50 बायोडीजल कार्यक्रम का उद्देश्य इन आयातों को आंशिक रूप से पाम तेल-आधारित ईंधन से बदलना है. यह नीतिगत पहल बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक तेल की कीमतों में हालिया उछाल के बीच आई है, जो हाल के दिनों में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं.
यह नीति इंडोनेशिया के व्यापक सतत विमानन ईंधन (SAF) रोडमैप के अनुरूप भी है. 2027 से, सरकार ने संकेत दिया है कि सोएकर्णो-हट्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और आई गुस्ती नगुराह राय अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से संचालित होने वाली उड़ानें लगभग 1% SAF मिश्रित विमानन ईंधन का उपयोग शुरू कर सकती हैं, जो संभवतः पाम तेल से प्राप्त होगा। हालांकि, शुरुआती मिश्रण अनुपात मामूली है, यह इंडोनेशिया के इस इरादे का संकेत देता है कि वह अपनी बायोफ्यूल रणनीति का विस्तार रोड ट्रांसपोर्टेशन से आगे बढ़ाकर एविएशन सेक्टर तक करना चाहता है.
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