Ekdanta Sankashti Chaturthi पर आपके शहर में चांद निकलने का समय जान लें

Ekdanta Sankashti Chaturthi पर आपके शहर में चांद निकलने का समय जान लें


Ekdanta Sankashti Chaturthi 2026: आज ज्येष्ठ माह की एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत है.गणेश पुराण में इस चतुर्थी को लेकर कहा गया है कि – “संकटेषु च सर्वेषु स्मरन् यः गणनायकम्। तस्य नश्यन्ति विघ्नानि सूर्येणेव तमो यथा॥” अर्थात – जो व्यक्ति सभी संकटों के समय गणनायक गणेश जी का स्मरण करता है, उसके सभी विघ्न उसी प्रकार नष्ट हो जाते हैं जैसे सूर्य के उदय होने पर अंधकार समाप्त हो जाता है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत करने वालों को चंद्रमा के निकलने का इंतजार रहता है. पंचांग अनुसार जान लें ज्येष्ठ माह की एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर आपके शहर में चंद्रमा कब निकलेगा.

शहर अनुसार एकदंत संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय समय

  • दिल्ली (New Delhi)- 10:35 PM
  • जयपुर (Jaipur)-10:36 PM
  • अहमदाबाद (Ahmedabad)- 10.38 PM
  • पटना (Bihar)- 09.53 PM
  • मुंबई (Mumbai)- 10:26 PM
  • बेंगलुरु (Bengaluru)- 10:16 PM
  • भोपाल (Bhopal)-10:19 PM
  • रायपुर (Raipur)- 09:56 PM
  • हैदराबाद (Hyderabad)-09:59 PM
  • चेन्नई (Chennai)-09:41 PM
  • कोलकाता (Kolkata)- 09:31 PM

एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर पूजा कैसे करें

इस दिन गणेशजी की पूज के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है. सूर्यास्त के बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनें. अब विधिपूर्वक गणेश जी का पूजन के लिए एक कलश में जल भरकर रखें. धूप-दीप अर्पित करें. नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ के लड्डु, गन्ना, अमरूद सहित अन्य मौसमी फल, गुड़, तिल तथा घी अर्पित करें। इसके पश्चात गणेशजी की कथा सुनें. फिर चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद ही व्रत पारण करें. इस चतुर्थी पर गणपति पूजन से जीवन के सारे कष्टों का निवारण हो जाता है. घर में सुख-संपन्नता बनी रहती है.

गणेश जी के विशेष मंत्र

  • सर्वसिद्धि और विघ्न नाश मंत्र – “ॐ गं गणपतये नमः”
  • जीवन के कष्ट और परेशानियों को दूर करने के लिए जपा जाता है – “गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारणं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥”

चांद को ऐसे दें अर्घ्य

  • संकष्टी चतुर्थी पर चांद की पूजा के लिए  थाली में जल से भरा लोटा, रोली, अक्षत, दीपक, फूल और मिठाई रखें
  • चंद्रमा के दर्शन करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धा भाव से अर्घ्य दें.
  • लोटे में जल लेकर चंद्रमा को धीरे-धीरे अर्घ्य दें. जल देते समय उसे चंद्रमा की ओर गिरने दें.
  • “दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥” इस मंत्र का जाप करें.
  • इसके बाद ही व्रत खोलें और प्रसाद ग्रहण करें.

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