NEET-UG लीक केस: कोचिंग साम्राज्य से CBI छापों तक, क्यों जांच के घेरे में हैं शिवराज मोटेगांवकर

NEET-UG लीक केस: कोचिंग साम्राज्य से CBI छापों तक, क्यों जांच के घेरे में हैं शिवराज मोटेगांवकर


NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला अब देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में से एक बनता जा रहा है. इस पूरे मामले में महाराष्ट्र के कोचिंग जगत का एक बड़ा नाम शिवराज मोटेगांवकर उर्फ “एम सर” जांच एजेंसियों की रडार पर है. 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया. पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच तेज कर दी है. बीते कुछ दिनों में CBI की टीमों ने कई ठिकानों पर छापेमारी की और कई लोगों से पूछताछ की है.

जिन लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है, उनमें लातूर स्थित RCC (रेणुकाई करियर सेंटर) के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर भी शामिल हैं. RCC महाराष्ट्र के सबसे बड़े NEET-JEE कोचिंग नेटवर्क्स में से एक माना जाता है. शिवराज मोटेगांवकर ने वर्षों तक खुद को एक सफल केमिस्ट्री शिक्षक और शिक्षा उद्यमी के रूप में स्थापित किया. 

महाराष्ट्र के कई जिलों में फैला है RCC नेटवर्क  
मोटेगांवकर का RCC नेटवर्क महाराष्ट्र के कई जिलों तक फैला हुआ है और दावा किया जाता है कि हर साल करीब 40 हजार छात्र यहां NEET और JEE की तैयारी करते हैं. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस कोचिंग नेटवर्क का पेपर लीक से जुड़े लोगों से कोई संबंध था. सूत्रों के अनुसार, CBI की टीम लातूर और पुणे में मोटेगांवकर से कई बार पूछताछ कर चुकी है. 

जांच के दौरान लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी का नाम भी सामने आया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक कुलकर्णी कथित तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की पेपर-सेटिंग प्रक्रिया से जुड़े थे और उन पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है. बता दें कि कुलकर्णी को गिरफ्तार किया जा चुका है ऐसे में एजेंसियों को शक है कि उन्होंने केमिस्ट्री से जुड़े सवाल लीक करने में भूमिका निभाई.

बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मांढरे की गिरफ्तारी
इस मामले में एक और बड़ी गिरफ्तारी पुणे की बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मांढरे की हुई है. जांचकर्ताओं का दावा है कि वह भी NTA के सब्जेक्ट एक्सपर्ट पैनल का हिस्सा थीं और उन्होंने बॉटनी तथा जूलॉजी के कुछ प्रश्न लीक किए. अब CBI यह जांच कर रही है कि इन लोगों के कोचिंग संस्थानों या बिचौलियों से क्या संबंध थे.

इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब लातूर के एक अभिभावक ने शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के मुताबिक RCC द्वारा आयोजित एक मॉक टेस्ट में पूछे गए 42 सवाल वास्तविक NEET-UG परीक्षा के सवालों से काफी मिलते-जुलते थे. इतनी बड़ी संख्या में सवालों का मेल सामने आने के बाद यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या यह महज संयोग था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था. अब जांच एजेंसियां इसी एंगल से जांच कर रही हैं.

मोटेगांवकर के वीडियो की जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां एक सोशल मीडिया वीडियो की भी जांच कर रही हैं, जिसमें कथित तौर पर शिवराज मोटेगांवकर परीक्षा के बाद छात्रों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो में वह छात्रों से यह पूछते सुनाई दे रहे हैं कि RCC की टेस्ट सीरीज के कितने सवाल असली NEET पेपर से मैच हुए. CBI इस वीडियो की जांच कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि उसका संदर्भ क्या था और क्या उससे कोई अतिरिक्त सुराग मिलता है.

जांच एजेंसियां अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या प्रश्नपत्र एक संगठित नेटवर्क के जरिए बेचे जा रहे थे. प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि लीक पेपर कथित तौर पर 20 लाख से 30 लाख रुपये तक में बेचे गए.

नांदेड़ में एक कारोबारी के घर पर तलाशी
जांच अब लातूर से आगे बढ़ चुकी है. पड़ोसी जिले नांदेड़ में भी एक कारोबारी के घर पर तलाशी ली गई है. एजेंसियों को शक है कि बिचौलियों के जरिए पेपर तक पहुंच खरीदी गई हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक, CBI की बड़ी टीम फिलहाल लातूर में डेरा डाले हुए है और मामले के कई पहलुओं की एक साथ जांच कर रही है.

RCC से जुड़े परिसरों पर छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने लैपटॉप, आईपैड और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है. अब एजेंसियां यह जोड़ने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों के बीच कोई सीधा तालमेल था.

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है. जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि मामला सिर्फ संदिग्ध समानताओं तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था.

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