Vat Savitri Amavasya 2026: धर्मनगरी हरिद्वार में बड़ (वट) अमावस्या के पावन अवसर पर आस्था का जबरदस्त जनसैलाब उमड़ पड़ा. देश के कोने-कोने से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने मुख्य घाट ‘हरकी पैड़ी’ पर मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई. श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की.
इस वर्ष अमावस्या के साथ शनिवार और शनि देव जयंती का एक अत्यंत दुर्लभ व विशेष संयोग बनने के कारण पर्व का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है. एक तरफ जहां घाटों पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ रही, वहीं दूसरी तरफ सुहागन महिलाओं ने वटवृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा.
शनि जयंती और अमावस्या का दुर्लभ संयोग: महंत रवींद्र पुरी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा:
“वट सावित्री अमावस्या सनातन धर्म में एक ऐतिहासिक महत्व रखती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सावित्री ने इसी व्रत के प्रभाव और अपने सतीत्व के बल पर मृत्यु के देवता यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे. इस बार शनिवार के दिन अमावस्या और शनि जयंती का एक साथ होना बेहद कल्याणकारी है.”
महंत रवींद्र पुरी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस पावन दिवस पर प्रातःकाल गंगा स्नान करें, भगवान शिव का जलाभिषेक करें, वटवृक्ष का पूजन करें और संध्याकाल में न्याय के देवता शनि देव की आराधना कर सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं.
सुहागनों ने किया वटवृक्ष का पूजन, मांगी पति की दीर्घायु
हरिद्वार के विभिन्न घाटों और मंदिरों के समीप स्थित बरगद के वृक्षों के नीचे सुबह से ही पारंपरिक परिधानों में सजी सुहागन महिलाओं का तांता लगा रहा. महिलाओं ने वटवृक्ष पर जल, अक्षत, रोली अर्पित कर सूत के धागे से परिक्रमा की.
हरिद्वार पहुंचीं महिला श्रद्धालु ज्योति ने बताया:
“बड़ अमावस्या के दिन बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास माना जाता है. हम सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए पूरी श्रद्धा के साथ यह कठिन व्रत रखती हैं.”
सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट, ज़ोन में बंटा मेला क्षेत्र
पर्व पर उमड़ने वाली भारी भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए हरिद्वार पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया. सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न ज़ोन और सेक्टरों में विभाजित किया गया था.
हरकी पैड़ी सहित अन्य प्रमुख घाटों पर सुबह से ही ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय शनि देव’ के जयकारों की गूंज सुनाई दी. प्रशासन द्वारा किए गए पुख्ता इंतजामों के कारण देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं को सुगम स्नान और सुरक्षित यातायात की सुविधा मिली.
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