‘अगर कोई स्टेट इंचार्ज चुनाव नहीं जीत पाता है तो…’, कांग्रेस के पार्टी कल्चर को लेकर एक्सपर्ट

‘अगर कोई स्टेट इंचार्ज चुनाव नहीं जीत पाता है तो…’, कांग्रेस के पार्टी कल्चर को लेकर एक्सपर्ट


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  • जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज, राष्ट्रीय व राज्य नेतृत्व के बीच बफर का काम करते हैं।

भारत के चार राज्यों- असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हाल ही में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं. इन पांच विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ केरलम में हुए चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है. इसके अलावा, असम में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को भाजपा ने करारी हार का स्वाद चखाया है. जबकि तमिलनाडु में कांग्रेस ने चुनाव में जीत हासिल करने वाली टीवीके को समर्थन दिया है. कांग्रेस यूं तो देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, लेकिन वर्तमान समय में कांग्रेस पिछले 12 सालों से केंद्रीय सत्ता से दूर है और देश के कई राज्यों में भी उसकी सरकारें पलट चुकी हैं. इस बीच राजनीतिक विश्लेषक ने कांग्रेस के भीतर पार्टी कल्चर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है.

भारत में दो राष्ट्रीय पार्टियां, जिसमें स्टेट इंचार्ज का कल्चरः अरोड़ा

इनसाइड आउट विथ मेघा प्रसाद में बातचीत करते हुए राजनीतिक विश्लेषक और डिजिटल बॉक्स के फाउंडर नरेश अरोड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर किसी भी स्टेट इंचार्ज को एक इलेक्शन के बाद दोबारा मात्र 6 महीनों में दूसरी स्टेट की जिम्मेदारी मिलते हुए देखने को मिलती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर ऐसा होता है कि अगर आप किसी स्टेट के इंचार्ज हैं और आप वो स्टेट नहीं जीता पाए या आपकी इंचार्ज होने के बाद पार्टी वो स्टेट नहीं जीत पाई, तो उन्हें दूसरा बड़ा स्टेट दे दिया जाता है.

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उन्होंने कहा कि देश में दो राष्ट्रीय पार्टियां हैं, जिनके यहां स्टेट इंचार्ज का कल्चर है. अगर ऐसा होता है कि बीजेपी का कोई स्टेट इंचार्ज चुनाव में पार्टी को जीत नहीं दिला पाए तो उसके साथ क्या होगा? क्या उनको उससे भी बड़ी स्टेट दे दी जाएगी? लेकिन कांग्रेस में यही होता है. यही हो रहा है. आप लिस्ट देखिए कांग्रेस के इंचार्जेस की.

कांग्रेस में जनरल सेक्रेटरी का पद काफी महत्वपूर्णः अरोड़ा

राजनीतिक विश्लेषक नरेश अरोड़ा ने कहा, ‘कांग्रेस के अंदर जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज का पद बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण पद है और ऐसा इसलिए है क्योंकि स्टेट लीडरशिप के अपने हित हैं. वहीं, दिल्ली राष्ट्रीय नेतृत्व है तो उसके अपने हित हैं. ऐसे में स्टेट लीडर सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व से बात नहीं कर सकता है, न ही राष्ट्रीय नेतृत्व स्टेट लीडर से सीधे बातचीत करता है, तो दोनों के बीच में जनरल सेक्रेटरी बफर का काम करते हैं, जो दोनों तरफ की बातें सुनेगा और कोशिश करेगा कि अच्छी बात आपस में पहुंचा दें. खराब बात को रख लें.’

उन्होंने कहा, ‘अब उसमें अगर आप सक्षम नहीं है कि आप कामयाब नहीं हो पाए, तो कांग्रेस के अंदर स्टेट इंचार्ज का इतनी पावर होती है कि PCC प्रेसिडेंट को भी कई बार किनारे कर देता है. राहुल गांधी क्या करते हैं और कांग्रेस पार्टी में क्या होता है कि वो इंचार्ज को किसी नई स्टेट दे दी जाती है. क्यों तुम क्या कर लोगे, क्या सोच है, इस पर कभी कोई सवाल नहीं होता है.’

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