IISR वरदा अदरक की उन्नत किस्म: बिहार उद्यान निदेशालय के मुताबिक IISR वरदा अदरक की एक उन्नत किस्म है, जिसे बेहतर उत्पादन, अच्छी क्वालिटी और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिहाज से बताया गया है. इस किस्म की अदरक की फसल करीब 150 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है.

अच्छी पैदावार वाली किस्म: इसकी औसत उपज करीब 22.6 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है. सही खेती तकनीक और बेहतर देखभाल के साथ किसान इससे अच्छी मात्रा में अदरक का उत्पादन ले सकते हैं.

एक हेक्टेयर में 1,800 से 2,000 किलो बीज: IISR वरदा की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर करीब 1,800 से 2,000 किलो बीज की जरूरत बताई गई है. सही मात्रा में बीज का इस्तेमाल अच्छी फसल के लिए जरूरी है.

बेहतर क्वालिटी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता: IISR वरदा को हाई क्वालिटी और रोग-प्रतिरोधक किस्म के तौर पर बताया गया है. इसकी खासियतों में अच्छी क्वालिटी के साथ रोगों से बचाव की क्षमता शामिल है, जिससे किसान बेहतर फसल लेने की उम्मीद कर सकते हैं.

जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में करें खेती: अदरक की फसल के लिए ऐसी दोमट मिट्टी बेहतर रहती है, जहां पानी आसानी से निकल सके. खेत में पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए अच्छी जल निकासी जरूरी है.

बेहतर क्वालिटी और बाजार मूल्य का फायदा: IISR वरदा में उच्च क्वालिटी और रोग-प्रतिरोधक किस्म बताया गया है. इसकी अच्छी क्वालिटी के कारण किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है.
Published at : 06 Oct 2026 05:59 PM (IST)
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