‘आपके छुटभैया नेता के गैरजिम्मेदाराना बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे’, उद्धव सेना को चेतावनी

‘आपके छुटभैया नेता के गैरजिम्मेदाराना बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे’, उद्धव सेना को चेतावनी


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  • कोर्ट ने राजनीतिक बयानों पर जताई तीखी नाराज़गी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई, 2026) को सुनवाई के दौरान शिवसेना (UBT) को आड़े हाथों लिया है. चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ को लेकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ चल रहे विवाद पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजनीतिक बयानबाजी पर तीखी नाराजगी जताई. देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने शिवसेना (UBT) को अपने छुटभैया नेताओं के बयानों पर लगाम लगाने की चेतावनी दी.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने उद्धव ठाकरे गुट के लिए पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत से कहा, ‘एक तरफ आप लोग कोर्ट में तारीख मांगते हैं. दूसरी तरफ बाहर यह आरोप लगाए जाते हैं कि सुप्रीम कोर्ट मामले का फैसला नहीं कर रहा है. मैं इस तरह के आचरण को स्वीकार करने वाला व्यक्ति नहीं हूं. शब्दों का इस्तेमाल सावधानी से करें.’

सीजेआई ने पार्टी के वकील की लगाई क्लास

साफ तौर पर नाराज नजर आ रहे चीफ जस्टिस ने कामत से पूछा, ‘क्या आपने हमें कभी खाली बैठे देखा है? हम शाम 4 बजे तक काम करते हैं. इस मामले में कुछ घंटे बहस की जरूरत है. इसके लिए समय निकाला जाएगा. उस दौरान दूसरे मामलों को नहीं सुना जाएगा, लेकिन ध्यान रखिए कि हम किसी बाहरी दबाव या भ्रम फैलाने वाली चर्चा को बर्दाश्त नहीं करेंगे.’

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कोर्ट के सख्त तेवरों को देखते हुए कामत ने कहा कि वह इस तरह के बयानों का समर्थन नहीं करते हैं. कोर्ट जब भी अगली तारीख तय करेगा वह बहस के लिए तैयार हैं. एकनाथ शिंदे कि शिवसेना के लिए पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनकी पार्टी की तरफ से कोई गैर-जिम्मेदाराना बयान कभी नहीं दिया गया. सभी पक्षों को अपनी मर्यादा का पालन करना चाहिए.

30 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई

थोड़ी देर चली चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय कर दी. ध्यान रहे कि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में हुई बगावत के बाद उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र की सत्ता गंवानी पड़ी थी. 17 फरवरी, 2023 को चुनाव आयोग ने शिवसेना पर एकनाथ शिंदे के दावे को सही पाया था. आयोग ने शिवसेना का मूल चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ शिंदे गुट को आवंटित कर दिया था. उद्धव खेमा इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.

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