केले का रेशा ही है असली सोना, फसल के बाद पेड़ से ऐसे कमाई कर सकते हैं किसान

केले का रेशा ही है असली सोना, फसल के बाद पेड़ से ऐसे कमाई कर सकते हैं किसान


Banana Fibre Industry:  बिहार का वैशाली जिला वैसे तो केले की खेती के लिए पूरे देश में मशहूर है, लेकिन अब यहां के किसान सिर्फ केले बेचकर ही नहीं, बल्कि उसके बचे हुए तनों से भी शानदार कमाई कर रहे हैं. जिस केले के पेड़ को फसल कटने के बाद बेकार समझकर खेत में छोड़ दिया जाता था, आज वही किसानों के लिए असली सोना बन चुका है. गांवों में अब केले के रेशे से ऐसे-ऐसे प्रोडक्ट तैयार हो रहे हैं, जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि किसान अब केले की खेती को केवल फल तक सीमित नहीं मान रहे, बल्कि इसे कमाई के बड़े बिजनेस में बदल रहे हैं.

Tarvar Agro ने बदली सोच, कचरे से बना कमाई का जरिया

वैशाली देश के सबसे बड़े केले उत्पादक इलाकों में गिना जाता है. यहां बड़ी मात्रा में केले की खेती होती है, जिसके बाद खेतों में भारी संख्या में तने बच जाते हैं. पहले किसान इन तनों को फेंक देते थे या सड़ने के लिए छोड़ देते थे. लेकिन रिसर्च और नई तकनीक आने के बाद पता चला कि केले के तनों से निकलने वाला रेशा काफी मजबूत और उपयोगी होता है. इसी सोच को आगे बढ़ाने का काम कर रही है “तरवर एग्रो” (Tarvar Agro) नाम की कंपनी. यह कंपनी केले के रेशे से धागा, कपड़ा, योगा मैट, बास्केट, चटाई और कई तरह के हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट बनाती है.पहले खेतों में पड़ा यही तना किसानों के लिए कचरा था, लेकिन अब वही अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गया है. साथ ही  गांवों में महिलाएं भी इस काम से जुड़ रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं.

केले के रेशे से बन रहे इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट

इसमें केले के तनों से मशीन की मदद से फाइबर निकाला जाता है. इसके बाद उस रेशे को सुखाकर अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाते हैं. खास बात यह है कि इससे बनने वाला धागा और कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है. बाजार में इको-फ्रेंडली चीजों की बढ़ती डिमांड के कारण इन प्रोडक्ट्स की अच्छी कीमत मिल रही है. योगा मैट और बास्केट जैसे सामान अब बड़े शहरों के साथ विदेशों तक पहुंच रहे हैं. इससे गांवों में रोजगार के नए मौके भी पैदा हो रहे हैं और महिलाएं भी इस काम से जुड़कर अच्छी कमाई कर रही हैं.

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केले के बचे हिस्सों से तैयार हो रही जैविक खाद

Tarvar Agro में केले के तनों का इस्तेमाल केवल फाइबर बनाने तक ही सीमित नहीं है. बल्कि इससे जैविक खाद यानी ऑर्गेनिक खाद भी तैयार की जा रही है.  केले के बचे हुए हिस्सों को प्रोसेस करके ऐसी खाद बनाई जाती है, जो खेती के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है. वही  किसानों का कहना है कि यह खाद यूरिया की तुलना में सस्ती पड़ती है और जमीन की उर्वरता भी खराब नहीं करती. साथ ही  इससे खेत की मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है. यानी एक तरफ किसानों को अतिरिक्त कमाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ खेती की लागत भी कम हो रही है.

Banana Fibre Industry बन रही ग्रामीण रोजगार का नया सहारा

आज केले का रेशा किसानों के लिए इनकम जनरेट करने वाला नया जरिया बन चुका है. वही पहले जो चीज बेकार समझी जाती थी, अब वही रोजगार और मुनाफे का बड़ा साधन बन रही है. वैशाली जैसे इलाकों में यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. साथ ही  इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ रही है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है क्योंकि केले के कचरे का सही इस्तेमाल हो रहा है. वही आने वाले समय में Banana Fibre Industry खेती और ग्रामीण रोजगार की तस्वीर बदल सकती है. 

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