कैसे काम करता है Tap & Pay सिस्टम, मशीन के पास ले जाते हैं कैसे कटते हैं पैसे?

कैसे काम करता है Tap & Pay सिस्टम, मशीन के पास ले जाते हैं कैसे कटते हैं पैसे?


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  • कॉन्टैक्टलेस पेमेंट NFC तकनीक पर आधारित, सुरक्षित है।
  • कार्ड में मौजूद चिप मशीन से जुड़कर डेटा भेजती है।
  • ₹5000 तक भुगतान बिना पिन, बैंक तुरंत पुष्टि करता।
  • जेब से चोरी करना मुश्किल, सुरक्षा सेटिंग्स इस्तेमाल करें।

Contactless Payment System: जैसे-जैस टेक्नोलाॅजी बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे लोगों के काम करने का तरीका भी बदलता जा रहा है. पेमेंट के लिए पहले कैश का इस्तेमाल होता था फिर डेबिट कार्ड-क्रेडिट कार्ड, और फिर यूपीआई यानी पैसे चुकाने का तरीका आसान से आसान होता चला गया. कुछ लोग आज भी यूपीआई की जगह कार्ड से पेमेंट करना पसंद करते हैं. लेकिन पहले जहां डेबिट या क्रेडिट कार्ड को मशीन में स्वाइप करना पड़ता था और फिर पिन डालकर इंतजार करना होता था. 

वहीं अब इसमें भी नई टेक्नोलाॅजी आ गई है जिसमें बस कार्ड को मशीन के पास ले जाते ही एक सेकंड में पेमेंट हो जाता है. इस फीचर Tap & Pay यानी कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सिस्टम कहा जाता है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर कार्ड को मशीन से बिना छुआए और बिना पिन डाले खाते से पैसे कैसे कट जाते हैं. चलिए आपको बताते हैं  कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और क्या वाकई इसमें आपका पैसा सेफ है.

कार्ड से कैसे होती है कॉन्टैक्टलेस पेमेंट?

टैप एंड पे सिस्टम के पीछे जिस टेक्नोलॉजी का हाथ है. उसे NFC यानी नियर फील्ड कम्युनिकेशन कहा जाता है. यह ठीक वैसे ही काम करता है जैसे ब्लूटूथ या Wi-Fi, लेकिन इसकी रेंज बहुत ही कम होती है. अगर आप अपने कार्ड को ध्यान से देखेंगे तो उस पर वाई-फाई जैसा एक छोटा सा निशान बना दिखेगा. इस निशान का मतलब है कि आपके कार्ड के अंदर एक बेहद बारीक एंटीना और एक छोटा सा माइक्रोचिप लगा हुआ है. जब दुकानदार पेमेंट मशीन यानी POS में रकम डालकर उसे एक्टिव करता है. 

तो वह मशीन अपने चारों तरफ एक हल्का सा रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल छोड़ती है. जैसे ही आप अपना कार्ड या एनएफसी वाला फोन उस मशीन के 2 से 4 सेंटीमीटर के दायरे में लाते हैं, कार्ड के अंदर मौजूद एंटीना को मशीन की तरंगों से बिजली मिलती है और चिप तुरंत एक्टिव हो जाती है. इसके बाद कार्ड तुरंत अपना डेटा हवा के जरिए मशीन को भेज देता है और दोनों के बीच कनेक्शन जुड़ जाता है.

बिना पिन डाले कैसे होता है ट्रांजैक्शन?

इस प्रोसेस में सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा जाता है जिससे कोई आपका कार्ड नंबर चोरी न कर सके. कार्ड मशीन को आपका 16 अंकों वाला नंबर नहीं भेजता. बल्कि हर बार पेमेंट के लिए एक नया सीक्रेट कोड यानी वन-टाइम टोकन बनाकर भेजता है. मशीन इस सीक्रेट कोड को तुरंत आपके बैंक के सर्वर के पास भेजती है. बैंक का कंप्यूटर एक सेकंड के भी दसवें हिस्से में यह चेक कर लेता है कि कोड सही है या नहीं और खाते में पर्याप्त बैलेंस है या नहीं. 

सब कुछ सही होने पर बैंक हरी झंडी दे देता है, मशीन से बीप की आवाज आती है और आपके पैसे कट जाते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नियमों के मुताबिक टाइम बचाने के लिए 5000 रुपये तक के पेमेंट पर पिन डालने की जरूरत नहीं होती है. हालांकि अगर बिल 5000 रुपये से ज्यादा का है, तो आप कार्ड टैप तो कर सकते हैं लेकिन पैसे तभी कटेंगे जब आप मशीन में अपना पिन डालेंगे.

Contactless Payment: कैसे काम करता है Tap & Pay सिस्टम, मशीन के पास ले जाते हैं कैसे कटते हैं पैसे?

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क्या जेब में रखे कार्ड से भी कोई चुरा सकता है पैसे?

अक्सर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जिनमें दिखाया जाता है कि कोई शातिर चोर हाथ में मशीन लेकर चलता है और लोगों की जेब के पास मशीन सटाकर पैसे निकाल लेता है. लेकिन हकीकत में ऐसा करना लगभग नामुमकिन है. पहली बात तो यह कि NFC टेक्नोलॉजी तभी काम करती है जब कार्ड और मशीन के बीच की दूरी 4 सेंटीमीटर से कम हो और कार्ड बिल्कुल सही एंगल पर हो. दूसरी बात, पर्स के अंदर रखे दूसरे कार्ड्स और सिक्कों की वजह से सिग्नल वैसे ही ब्लॉक हो जाता है.

इसके अलावा जो पेमेंट मशीन होती है वह किसी बैंक के रजिस्टर्ड अकाउंट से जुड़ी होती है, इसलिए कोई भी चोर अपनी पहचान छुपाकर ऐसी मशीन का इस्तेमाल नहीं कर सकता. फिर भी अपनी तसल्ली और पूरी सेफ्टी के लिए आप अपने बैंक के मोबाइल ऐप में जाकर Tap & Pay की लिमिट को कम कर सकते हैं या फिर जब जरूरत न हो तो इसे ऑफ भी रख सकते हैं. 

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