इजरायल में गुरुवार को हुए चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. किसी भी प्रमुख गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला है. इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता के लिए चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है. ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, दो प्रमुख अरब पार्टियां रा’म और जॉइंट लिस्ट, जिन्होंने मिलकर 19 सीटें जीती हैं, नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्षी गठबंधन का समर्थन कर सकती हैं. यह गठबंधन गादी आइजेनकोट के नेतृत्व में है. हालांकि, इन अरब पार्टियों की सरकार में सीधे शामिल होने की इच्छा नहीं है. वे बाहर से समर्थन देकर नई सरकार बनाने में मदद कर सकती हैं.
नेतन्याहू विरोधी दलों को बाहर से समर्थन देने को तैयार जॉइंट लिस्ट
जॉइंट लिस्ट नेतन्याहू विरोधी पार्टियों को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार है. पार्टी खुद सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहती, लेकिन मौजूदा सरकार को हटाने के प्रयास में सहयोग करना चाहती है. जॉइंट लिस्ट के वरिष्ठ अरब सांसद अहमद तिबी ने कहा, “हम उन सभी की मदद करना चाहते हैं, जो इस खराब सरकार को गिराकर इसकी जगह दूसरी सरकार लाना चाहते हैं. हम सुधार और उम्मीद का हिस्सा बनना चाहते हैं. ” रिपोर्ट में तिबी को जॉइंट लिस्ट का दूसरा प्रमुख उम्मीदवार बताया गया है.
वहीं, अरब राजनीतिक आंदोलन से जुड़े अहम व्यक्ति जाफर फराह ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया कि रा’म और जॉइंट लिस्ट, दोनों इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को विपक्षी गठबंधन का समर्थन करने की अपनी इच्छा से अवगत करा सकती हैं. फराह के मुताबिक, ये पार्टियां पूर्व इजरायली सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने की सिफारिश करेंगी.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी अरब पार्टी बलाद के तीन सांसद शायद इस सिफारिश का समर्थन न करें, लेकिन बाकी दल ऐसा कर सकते हैं. फराह इजरायल में अरब समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक वकालत समूह से जुड़े हैं. वह चुनाव में जॉइंट लिस्ट के उम्मीदवार भी बनने वाले थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी.
आइजेनकोट से बोले अहमद तिबी- रबिन की तरह बनिए
जॉइंट लिस्ट के सांसद अहमद तिबी ने कथित तौर पर गादी आइजेनकोट से कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री यित्जाक रबिन की तरह बनना चाहिए. इसके जरिए तिबी ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन की सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है. रबिन को 1993 में हुए ओस्लो समझौते के तहत फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) के साथ बातचीत शुरू करने के फैसले के लिए जाना जाता है. उस समय इस फैसले का काफी विरोध हुआ था. हालांकि, दो अरब नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों ने रबिन की तत्कालीन सरकार को समर्थन दिया था. इजरायल में मौजूदा राजनीतिक गतिरोध के बीच एक बार फिर इसी तरह के समर्थन की संभावना सामने आई है. इस बीच, जॉइंट लिस्ट के अध्यक्ष यूसुफ जबरीन ने भी कहा है कि नेतन्याहू विरोधी पार्टियों के साथ संपर्क किया गया है. ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है.
नेतन्याहू के गठबंधन को मिलीं 53 सीटें, बहुमत से आठ कम
इजरायल में 2023 के हमास हमले के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं. इस सप्ताह नतीजे सामने आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि नेतन्याहू विरोधी यहूदी बहुल पार्टियों को 48 सीटें मिली हैं. वहीं, अरब बहुल पार्टियों रा’म और जॉइंट लिस्ट ने मिलकर 19 सीटों पर जीत दर्ज की है. दूसरी ओर, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं. चुनाव से पहले उसके पास 68 सीटें थीं. इस तरह उसके समर्थन में 15 सीटों की कमी आई है. हालांकि, 120 सदस्यीय इजरायली संसद यानी नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत है. किसी भी गठबंधन को यह आंकड़ा हासिल नहीं हुआ है.
अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्ष को मिल सकता है बहुमत
चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच संभावित तालमेल सरकार गठन की तस्वीर बदल सकता है. अगर गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को रा’म और जॉइंट लिस्ट का समर्थन मिलता है, तो उसके पास कुल 67 सीटें हो सकती हैं. यह आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से छह अधिक है. ऐसे में अरब पार्टियों का बाहर से समर्थन भी नेतन्याहू को सत्ता से हटाने और इजरायल में नई सरकार बनाने का रास्ता खोल सकता है. हालांकि, अभी इस संभावित गठबंधन और समर्थन को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.





