ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्लेव ट्रेड में ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका के लिए माफी मांगने को तैयार है. हालांकि उन्होंने आर्थिक मुआवजे की संभावना को खारिज कर दिया है. बर्नहम ने शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को द गार्डियन में एक आर्टिकल में लिखा कि वे स्लेव ट्रेड के लिए भारत समेत 56 देशों से माफी मांगने के लिए तैयार है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम का माफी मांगने वाला बयान कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग के पहले सामने आया है, जो अगले हफ्ते एंटीगुआ और बारबुडा में होने वाली है. काफी लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि ब्रिटेन को गुलामी के लिए उन देशों से माफी मांगनी चाहिए और मुआवजा देना चाहिए, जिनमें भारत समेत 56 देश शामिल है.
30 लाख अफ्रीकियों को गुलाम बनाकर भेजा
ब्रिटेन ने लगभग 30 लाख अफ्रीकियों को गुलाम बनाकर अमेरिका में ब्रिटेन की कॉलोनियों के बागानों में काम करने के लिए भेजा गया था. ब्रिटेन ने 1807 में अपने साम्राज्य में गुलामों के व्यापार को खत्म करना शुरू किया. 1833 में गुलामी को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया, हालांकि 1838 तक सभी गुलामों को आज़ादी नहीं मिल पाई थी. 1833 में, ब्रिटेन ने गुलामों के मालिकों को कुल 20 मिलियन पाउंड का मुआवजा, जो उस समय सरकार के सालाना बजट का 40 फीसदी था.
भारत से कितने लोग गए काम करने
गुलामी खत्म होने के बाद, 1838 से 1917 के बीच ब्रिटिश उपनिवेशों में अनुबंधित श्रम की एक व्यवस्था पनपी. भारत से लगभग 20 लाख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को ब्रिटिश साम्राज्य के तहत कैरेबियन से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक भेजा गया, ताकि वे बागानों में काम कर सकें. इनमें से कई मजदूरों का शोषण किया गया और उन्हें काम की शर्तों के बारे में गुमराह किया गया. कुछ लोगों का अपहरण कर लिया गया और उनकी तस्करी की गई. इनमें से ज्यादातर मजदूर वापस भारत लौटने की स्थिति में नहीं थे.
शशि थरूर का रिएक्शन
बर्नहम के बयान पर शशि थरूर ने रिएक्शन देते हुए कहा कि मैंने लंबे समय से यह तर्क दिया है कि ब्रिटेन चाहे जो भी हर्जाना देने की पेशकश करे, कोई भी रकम न तो उचित होगी और न ही स्वीकार्य. हालांकि, उपनिवेशवाद की तबाही के लिए नैतिक प्रायश्चित बहुत जरूरी है. थरूर ने गुलामी के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगने की बर्नहम की इच्छा का स्वागत किया, लेकिन उपनिवेशवाद के लिए व्यापक माफी न मांगने पर प्रधानमंत्री की आलोचना की.





