बहुत से लोगों को मूली के पराठे काफी पसंद होते हैं. तो कुछ लोग मूली का अचार और उसका सलाद खाना पसंद करते हैं. लेकिन अक्सर मूली सब्जी मंडी में महंगी मिलती है. तो कई बार उसमें केमिकल्स की भरमार देखने को मिलती है. इसलिए अगर आपको भी मूली खाने का शौक है, तो आप भी बढ़ी आसानी के साथ इस अपने घर पर ही उगा सकते हैं.
अक्सर लोगों को लगता है कि मूली जैसी जड़ वाली फसलों को उगाने के लिए बड़ा खेत या कच्ची क्यारी ही चाहिए. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. सही तरीके के साथ सही साइज का गमला चुनकर आप घर के गमले में भी बढ़िया मूली उगा सकते हैं. मूली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बहुत तेजी से तैयार होने वाली फसल है.
महज 40 से 50 दिनों के भीतर यह खाने लायक हो जाती है. यानी आपको इसके लिए महीनों लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता. इसके अलावा मूली के ताजे पत्तों से बनने वाली भुर्जी और साग का स्वाद भी आपकी थाली का जायका बढ़ा देता है. बस कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखकर आप आसानी से गमले में बंपर पैदावार ले सकते हैं. जान लें पूरी खबर.
ऐसे करें मूली उगाने की शुरुआत
मूली की फसल जमीन के नीचे सीधी और गहरी जाती है. इसलिए गमला चुनते समय उसकी गहराई पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए. कम से कम 10 से 12 इंच गहरा गमला ही लेकर आएं. जिससे कि मूली को नीचे तक फैलने की पूरी जगह मिले. गमले के नीचे ड्रेनेज होल यानी पानी निकलने का इतंजाम जरूर होना चाहिए. अब बात करें मिट्टी की तो मूली के लिए सख्त या भारी मिट्टी बिल्कुल सही नहीं होती.
क्योंकि सख्त मिट्टी में जड़ें मोटी नहीं हो पातीं और टेढ़ी-मेढ़ी रह जाती हैं. इसके लिए 50 फीसदी सामान्य भुरभुरी मिट्टी, 30 फीसदी सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुऔर 20 फीसदी रेत का मिक्सचर तैयार करें. यह मिट्टी इतनी हल्की और भुरभुरी होनी चाहिए कि पानी डालते ही तुरंत नीचे निकल जाए और जड़ों को ग्रो करने में कोई दिक्कत न आए.
बीज बोने का सही तरीका
मिट्टी तैयार करने के बाद बीजों की बुवाई पर खास ध्यान दें. किसी भी अच्छी बीज भंडार की दुकान से उन्नत और हाइब्रिड किस्म के मूली के बीज लाएं. बीजों को गमले में एक जगह ढेर लगाकर न डालें. बल्कि उंगली की मदद से आधा से एक इंच गहरा गड्ढा बनाएं और उसमें बीज डालें. दो बीजों के बीच कम से कम 3 से 4 इंच की दूरी जरूर रखें.
अगर पौधे बहुत पास-पास उगेंगे. तो उन्हें फैलने की जगह नहीं मिलेगी और मूली पतली धागे जैसी ही रह जाएगी. बीज दबाने के बाद ऊपर से हल्की मिट्टी की परत बिछाएं और स्प्रेयर से पानी दें जिससे बीज अपनी जगह से हिले नहीं. करीब 4 से 6 दिनों के भीतर छोटे-छोटे हरे अंकुर फूटते दिखाई देने लगेंगे. अगर कहीं पौधे ज्यादा घने निकल आएं तो कमजोर पौधों को धीरे से उखाड़कर अलग कर दें.
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45 दिनों में मूली तैयार
मूली के पौधे को अच्छी ग्रोथ के लिए रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलना बेहद जरूरी है. इसलिए गमले को बालकनी में या फिर छत के ऐसे कोने में रखें जहां सुबह से दोपहर तक अच्छी धूप आती हो. सिंचाई के मामले में बैलेंस बनाए रखें. मिट्टी में हमेशा हल्की नमी रहनी चाहिए लेकिन गमले में कभी भी पानी का भराव न होने दें.

बहुत ज्यादा पानी देने से मूली सड़ सकती है और बहुत कम पानी देने से उसका स्वाद कड़वा हो जाता है. बुवाई के लगभग 20-25 दिन बाद जड़ों के आसपास हल्की गुड़ाई कर दें और थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट डाल दें. लगभग 40 से 50 दिनों के भीतर मिट्टी के ऊपरी हिस्से से सफेद मूली नजर आने लगेगी. बस पौधे को नीचे से पकड़कर धीरे से खींचें और घर की उगी ताजी मूली के परांठे बनाएं या सब्जी.
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