नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मुलाकात की है. मिसरी दो दिन की यात्रा पर नेपाल पहुंचे हैं. यह यात्रा पीएम शाह के भारत दौरे से पहले हुई है. 22 नवंबर को वह भारत दौरे पर आएंगे. मार्च में पदभार संभालने से पहले उनकी यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है. यह मुलाकात इसलिए भी एक बदलाव के तौर पर मानी जा रही है, क्योंकि छ महीने पहले मिसरी से शाह ने मिलने से इनकार कर दिया था.
बालेन शाह और विक्रम मिसरी की जो तस्वीर सामने आई है, उसमें बालेन शाह बिना चश्मे के नजर आ रहे हैं. यह मुलाकात एक संयुक्त बयान के अनुसार बातचीत जल संसाधनों, एनर्जी और व्यापार पर केंद्रित रही है.
आखिर क्यों बालेन शाह के व्यवहार में आया बदलाव
यह अचानक से बालेन शाह के व्यवहार में आया बदलाव काफी चौंकाने वाला रहा. लगभग 6 महीने पहले मई में मिसरी को काठमांडू की अपनी दो दिवसीय यात्रा अचानक रद्द करनी पड़ी थी. भारत की ओर से इसका कोई कारण नहीं बताया गया. इससे पहले नेपाल की मीडिया ने अपनी रिपोर्ट्स में दावा किया था कि प्रधानमंत्री किसी भी देश के राजनयिक से आमने-सामने मुलाकात नहीं करेंगे.
इसे एक प्रोटोकॉल करार दिया गया था. हालांकि, ऐसा सिर्फ मिसरी के मामले में नहीं हुआ बल्कि अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पॉल कपूर और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर के साथ मुलाकात करने से इनकार कर दिया था. नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों की वजह से काठमांडू में नए नेतृत्व के साथ बातचीत करने के लिए मिसरी का दौरा काफी अहम माना जा रहा था.
बाढ़ त्रासदी में भारत ने की थी मदद
नेपाल के पीएम में आए बदलाव का कारण नेपाल में आई बाढ़ त्रासदी है. इसमें 1400 से ज्यादा लोगो की मौत हो गई, 6000 लोग लापता हो गए. तिब्बत के ऊपरी इलाकों में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल और तिब्बत सीमा के कुछ हिस्सों तक फैल गई. इस दौरान नेपाल के लिए हाथ भारत ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया. खाद्य समाग्री से लेकर खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. भारत ने इस दौरन 140 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेजी. UN में अपने संबोधन में बालेन शाह ने भारत की तारीफ भी की थी.





