थनैला रोग से दूध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है: हम बात कर रहे हैं गाय, भैंस और बकरी के थनों में होने वाले बैक्टीरियल रोग थनैला रोग की. इससे पशु को दर्द और सूजन होती है, साथ ही दूध की क्वालिटी और उत्पादन भी प्रभावित होता है.

सब क्लिनिकल थनैला सबसे ज्यादा चिंता की वजह है: इस तरह के थनैला में बाहर से कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन दूध का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है. कई मामलों में उत्पादन क्षमता में 10 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है.

गंदा और गीला पशुशाला संक्रमण बढ़ा सकता है: पशुओं के बैठने की जगह पर गोबर, मूत्र और कीचड़ जमा रहने से बैक्टीरिया तेजी से फैल सकते हैं. अक्टूबर में मौसम बदलने के साथ नमी बढ़ने पर संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है.

गलत तरीके से दूध निकालने पर थन को नुकसान हो सकता है: दूध दुहते समय अंगूठे को अंदर की ओर मोड़कर थन दबाने से अंदर के ऊतकों को चोट पहुंच सकती है. इससे बैक्टीरिया के लिए थन में प्रवेश करने का रास्ता बन जाता है.

दूध दुहने के बाद थनों की सफाई और सूखापन जरूरी है: दूध निकालने के बाद थनों को आयोडीन घोल से साफ करना यानी टीट डिपिंग करना संक्रमण से बचाव में मदद करता है. साथ ही पशुशाला का फर्श साफ और सूखा रखना भी बेहद जरूरी है.

दूध दुहने के बाद तुरंत बैठने से रोकें: दूध निकालने के बाद पशु के थन के छिद्र कुछ समय तक खुले रह सकते हैं. इसलिए उसे करीब 30-40 मिनट तक बैठने न दें और दूध निकालते समय पांचों उंगलियों से पूर्ण हस्त विधि अपनाएं.
Published at : 07 Oct 2026 12:30 PM (IST)
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