जिम वालों और अमीरों के बीच जमकर है इस चीज की डिमांड, खेत में लगा लेंगे तो छापेंगे नोट

जिम वालों और अमीरों के बीच जमकर है इस चीज की डिमांड, खेत में लगा लेंगे तो छापेंगे नोट


Broccoli Farming: आज के समय में अक्सर लोग अपने घरों में रोज-रोज फूलगोभी और पत्तागोभी खाकर ऊब चुके हैं. ऐसे में जिम जाने वालों से लेकर बड़े-बड़े होटलों और रेस्टोरेंट तक इन दिनों ब्रोकली की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि अब किसान भी फूलगोभी और पत्ता गोभी की खेती छोड़कर ब्रोकली की खेती कर रहे हैं. यह फसल किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही है. वही खास बात यह है कि बाजार में ब्रोकली का भाव नॉर्मल गोभी के मुकाबले कई गुना ज्यादा मिलता है, जिससे किसानों की कमाई अभी बढ़ रही है. कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार सही तकनीक अपनाकर किसान एक सीजन में लाखों रुपये तक ब्रोकली से मुनाफा कमा सकते हैं. 

क्यों बढ़ रही है ब्रोकली की डिमांड?

ब्रोकली को सुपर फूड माना जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, बी और सी जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. हेल्थ कॉन्शियस लोग, जिम जाने वाले युवा और बड़े शहरों के होटल-रेस्टोरेंट में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. यही कारण है कि मंडी में जहां फूलगोभी 10 से 20 रुपये किलो बिकती है. वहीं ब्रोकली का भाव 50 से 150 रुपये किलो तक पहुंच जाता है. ब्रोकली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है, यानी किसान एक साल में ब्रोकली की कई फसले लगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. 

कब और कैसे करें ब्रोकली की खेती? 

ब्रोकली की खेती के लिए जलवायु सबसे बेहतर मानी जाती है. उत्तर भारत में इसकी नर्सरी सितंबर से नवंबर के बीच तैयार की जाती है. वहीं कुछ किसान जनवरी-फरवरी में इसकी बुवाई करते हैं. ब्रोकली की खेती के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त माना जाता है. इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है. ब्राेकली की खेती के लिए खेत की दो से तीन बार जुताई करके उसमें गोबर की सड़ी खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाना चाहिए. मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना जरूरी माना जाता है. एक्सपर्ट के अनुसार किसान पालम समृद्धि, गणेश ब्रोकली, के-वन, ग्रीन हेड और इटैलियन ग्रीन स्प्राउटिंग जैसी उन्नत किस्म की खेती कर सकते हैं. इससे पहले बीजों को नर्सरी में तैयार किया जाता है और करीब 25 से 30 दिन बाद पौधे की खेत में रोपाई की जाती है. 

ये भी पढ़ें-PM kisan 23rd Installment Date: किसान निधि की 23वीं किस्त आपके खाते में आएगी या नहीं? ऐसे चेक करें अपना स्टेटस

ब्रोकली की सिंचाई और देखभाल का तरीका 

ब्रोकली की फसल में ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है, लेकिन खेत में नमी बनी रहनी चाहिए. ड्रिप इरिगेशन को इसके लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे पानी की बचत भी होती है और पौधों को पर्याप्त नमी भी मिलती रहती है. कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्रोकली में अक्सर हीरक पीठ घुन और झुलसा रोग का खतरा रहता है. ऐसे में किसान नीम तेल, गोमूत्र या जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल कर फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. फसल की नियमित निगरानी और समय पर निराई गुड़ाई करने से उत्पादन बेहतर होता है.

ये भी पढ़ें-Cow Shelter Subsidy: 25 गायों की गौशाला खोलने के लिए 10 लाख सब्सिडी दे रही सरकार, जानें कैसे उठा सकते हैं लाभ?



Source link