अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा है कि वाशिंगटन 2026 के अंत तक इज़राइल को दी जाने वाली लगभग $4 अरब (3.8 बिलियन डॉलर) की सालाना सैन्य सहायता को बंद कर देगा. उनका तर्क है कि इज़राइल अब एक समृद्ध अर्थव्यवस्था बन चुका है और उसे अमेरिकी करदाताओं के पैसे की आवश्यकता नहीं है. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के दिन आई इस घोषणा ने न केवल अमेरिकी राजनीति में खलबली मचाई है, बल्कि इज़राइल के भीतर भी एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है.
ट्रंप ने क्या कुछ कहा
3 नवंबर को फॉक्स न्यूज़ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में जिस समय अमेरिकी नागरिक मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान कर रहे थे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ इस फंडिंग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने को लेकर एक सहमति बनाई है.
हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सहायता राशि बंद होने के बाद भी अमेरिका मध्य पूर्व में अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी (इजरायल) को आधुनिक हथियार बेचना जारी रखेगा और किसी भी बड़े संकट की स्थिति में उसकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा.
ऊपरी तौर पर यह घोषणा चौंकाने वाली लगती है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप को पारंपरिक रूप से इज़राइल और नेतन्याहू का सबसे कट्टर समर्थक माना जाता रहा है. हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 2028 तक प्रभावी मौजूदा विधिक समझौते के रहते हुए इस कटौती को कानूनी और बजटीय रूप से कैसे लागू किया जाएगा.
इस फैसले का समय और अमेरिकी घरेलू राजनीति
ट्रंप द्वारा इस घोषणा के लिए मध्यावधि चुनाव के दिन को चुनने के पीछे गहरी रणनीतिक और घरेलू राजनीतिक चाल मानी जा रही है. गाजा संघर्ष के बाद अमेरिका में इज़राइल को दी जाने वाली अंधाधुंध सैन्य सहायता को लेकर जनसमर्थन तेजी से गिरा है. ट्रंप ने स्वीकार किया कि इज़राइल को दी जाने वाली वित्तीय मदद डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन चुकी थी.
ट्रंप ने विशेष रूप से मिशिगन के नए डेमोक्रेटिक सीनेटर अब्दुल अल-सैयद का जिक्र करते हुए कहा, “हमें अल-सैयद जैसे वामपंथी विचारकों की बातें सुनकर अपना बजट क्यों खर्च करना चाहिए, जबकि इजरायल को इस पैसे की जरूरत ही नहीं है?”
‘क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी’ के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 48% अमेरिकी मतदाता और 66% डेमोक्रेटिक समर्थक मानते हैं कि अमेरिका इज़राइल का जरूरत से ज्यादा समर्थन कर रहा है. 2017 में यह आंकड़ा क्रमशः केवल 16% और 20% था.
अमेरिका इज़राइल को कितनी सैन्य सहायता देता है?
1948 में इज़राइल की स्थापना के बाद से वह अमेरिकी विदेशी सहायता का सबसे बड़ा वैश्विक प्राप्तकर्ता रहा है.
इज़राइल के भीतर यह घोषणा ऐसे नाज़ुक समय पर आई है जब बेंजामिन नेतन्याहू अपनी गठबंधन सरकार को बचाने और अगली सरकार बनाने की राजनीतिक जोड़-तोड़ में उलझे हुए हैं. ट्रंप के साथ उनकी घनिष्ठता हमेशा से उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाती रही है, लेकिन इस घोषणा के बाद विपक्ष ने उन पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं:
गादी आइसेनकोट (पूर्व सैन्य प्रमुख व नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी ने कहा
“अमेरिका के साथ इज़राइल के रणनीतिक संबंध हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ हैं. यह अत्यंत चिंताजनक है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों और नागरिकों को इस रणनीतिक बदलाव की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रही है. यह बेंजामिन नेतन्याहू के गैर-जिम्मेदाराना नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है. अब उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता.”
यायर गोलन डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख नेता है उन्होंने कहा
“ऐसे समय में जब युद्ध के कारण इज़राइल का रक्षा बजट ऐतिहासिक स्तर पर है, जब हमारे वायु रक्षा हथियार और गोला-बारूद घट रहे हैं. तब अमेरिकी सहायता का रुकना नेतन्याहू की एक और कूटनीतिक विफलता है. यह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर झटका है.”
नेतन्याहू ने जनवरी 2026 में ‘द इकोनॉमिस्ट’ को दिए एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि वे अगले दशक में अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना चाहते हैं ताकि इजरायल पर अमेरिकी सांसदों का राजनीतिक दबाव कम हो सके. हालांकि, ट्रंप द्वारा इसे अचानक और एकतरफा तरीके से 2026 में ही रोकने की बात कहना नेतन्याहू की रणनीतिक योजना से बिल्कुल अलग है.
क्या ट्रंप कानूनी रूप से इस सहायता को तुरंत रोक सकते हैं?
केवल राष्ट्रपति की घोषणा मात्र से यह वित्तीय सहायता तुरंत नहीं रुक सकती. अमेरिकी संविधान के तहत बजट और विदेशी सहायता आवंटित करने का अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि अमेरिकी कांग्रेस के पास होता है.
2016 में हुआ 10-वर्षीय समझौता (MoU) वित्तीय वर्ष 2028 तक कानूनी रूप से बाध्यकारी है. इसे तय समय से पहले समाप्त करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में कानून पारित करना होगा या फिर द्विपक्षीय संधि को नए सिरे से पुनर्गठित करना होगा.
अमेरिका का शक्तिशाली ‘डिफेंस-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स’ और इज़राइल समर्थक लॉबी समूह (जैसे AIPAC) भी इस सहायता को अचानक रोके जाने का विरोध कर सकते हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी रक्षा कंपनियों के रक्षा सौदों पर सीधा असर पड़ेगा.
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम मध्य पूर्व की भू-राजनीति और अमेरिकी विदेश नीति में एक ऐतिहासिक मोड़ का संकेत देता है. जहां एक ओर ट्रंप इसे अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) एजेंडे और घरेलू चुनावी गणित के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इज़राइल के लिए यह अपनी सैन्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता को तेजी से बढ़ाने की एक अनिवार्य चुनौती बन गया है.





