प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट करने के अंदाज पर सौरव दास ने सवाल उठाए हैं. पीएम मोदी ने महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में भारत की आत्मनिर्भरता को लेकर एक पोस्ट साझा किया था. इसमें उन्होंने युवाओं के बीच लोकप्रिय अनौपचारिक भाषा और छोटे-छोटे वाक्यों का इस्तेमाल करते हुए सरकार की नई योजना की जानकारी दी.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने इसे जरूरत से ज्यादा जेन-जी अंदाज वाला और असहज करने वाला बताया. उन्होंने कहा कि गंभीर पदों पर बैठे लोगों को सामान्य और जिम्मेदार भाषा में लिखना चाहिए. नीतियां गंभीर हों या नहीं, कम से कम लेखन की गंभीरता से समझौता नहीं होना चाहिए.
Yo please write tweets like normal people holding high positions. This sounds very wannabe Gen-Z and honestly, quite cringe. Policies may or may not be serious, but at least don’t give up on serious writing!
— Saurav Das (@SauravDassss) November 4, 2026
पीएम मोदी ने पोस्ट में क्या लिखा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पोस्ट में सवाल किया कि क्या भारत को अपने भविष्य की तकनीकों को ताकत देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए? उन्होंने जवाब देते हुए लिखा, ‘मैं तो बिल्कुल नहीं चाहता.’ पीएम मोदी ने लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिजों का जिक्र करते हुए बताया कि ये इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं. इसके बावजूद भारत प्रसंस्कृत खनिजों के लिए बड़े स्तर पर दूसरे देशों पर निर्भर है. इस निर्भरता को कम करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई योजना को मंजूरी दी है.
Do you feel India should depend on other countries for processing the critical minerals that power our future? I certainly don’t! Lithium, nickel, cobalt…these are essential for EVs, batteries, electronics and defence. Yet, we remain heavily dependent on imports of refined materials. To address this, the Cabinet has approved a scheme to change this. Key highlights: New critical mineral processing plants. Capital subsidy to boost investment. Greater domestic value addition. Stronger supply chains. The principle is clear…India must have capabilities to build technologies of the future! https://t.co/deencvjivt
— Narendra Modi (@narendramodi) November 4, 2026
प्रधानमंत्री ने योजना की प्रमुख विशेषताओं में नए क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करना, निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सब्सिडी देना, देश में मूल्य संवर्धन बढ़ाना और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना शामिल बताया. उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों के निर्माण के लिए अपनी क्षमताएं विकसित करनी होंगी.
सौरव दास ने कहा- गंभीर पदों पर बैठे लोग सामान्य भाषा में लिखें
पीएम मोदी के इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘यो, कृपया ऐसे ट्वीट लिखें जैसे गंभीर पदों पर बैठे सामान्य लोग लिखते हैं. यह जरूरत से ज्यादा जेन-जी बनने की कोशिश जैसा और सच कहूं तो काफी असहज करने वाला लगता है. नीतियां गंभीर हों या नहीं, कम से कम गंभीर लेखन को तो मत छोड़िए.’
सौरव दास की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री के पोस्ट की भाषा और प्रस्तुति पर केंद्रित है. उन्होंने योजना के तकनीकी प्रावधानों पर टिप्पणी करने के बजाय प्रधानमंत्री के संवाद के अंदाज पर सवाल उठाया. उनका कहना है कि संवैधानिक और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों के सार्वजनिक संवाद में गंभीरता और सहजता होनी चाहिए.
क्या है क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना?
दरअसल, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना को मंजूरी दी है. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी. इसका उद्देश्य देश में लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है.
योजना के तहत चार प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इनमें लिथियम के दो और निकल के दो संयंत्र शामिल होंगे. प्रत्येक लिथियम संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 30 हजार टन और प्रत्येक निकल संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 50 हजार टन निर्धारित की गई है.
निवेश पर मिलेगी 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी
सरकार इस योजना के तहत पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी देगी. प्रत्येक लिथियम संयंत्र के लिए अधिकतम 500 करोड़ रुपये और निकल संयंत्र के लिए अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता निर्धारित की गई है. लाभार्थियों का चयन दो चरणों में होगा. पहले चरण में तकनीकी योग्यता का आकलन किया जाएगा और इसके बाद योग्य आवेदकों के बीच वित्तीय बोली की प्रक्रिया होगी. सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगने वाले दो-दो आवेदकों का चयन प्रत्येक खनिज के लिए किया जाएगा.
सब्सिडी का भुगतान निर्धारित लक्ष्यों और उपलब्धियों के आधार पर तीन किस्तों में किया जाएगा. निकल के प्रसंस्करण के दौरान उप-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट प्राप्त करने की भी उम्मीद है.
ईवी, बैटरी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा. फिलहाल इन खनिजों के प्रसंस्करण का बड़ा हिस्सा दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में बाधा का असर भारत पर भी पड़ सकता है.
इस योजना के जरिए सरकार घरेलू प्रसंस्करण ढांचे को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने और महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी आपूर्ति शृंखला देश में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. वहीं, प्रधानमंत्री के इस ऐलान के साथ उनके सोशल मीडिया पर लिखने के अंदाज को लेकर सौरव दास की टिप्पणी भी चर्चा में आ गई है.






