प्याज की भीमा शक्ति और NHRDF-4 जैसी उन्नत किस्मों को बेहतर विकल्प बताया गया है. सही बीज और खेती की तकनीक अपनाकर किसान प्याज की फसल से अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.

बिहार कृषि विभाग के अनुसार, इन उन्नत किस्मों से सही तरीके से खेती करने पर प्रति हेक्टेयर 28 से 32 टन तक प्याज का उत्पादन मिल सकता है. इससे किसानों को सामान्य खेती की तुलना में बेहतर पैदावार का मौका मिल सकता है.

इन किस्मों की एक खास बात इनकी भंडारण क्षमता बताई गई है. किसान अगर सही तरीके से प्याज का भंडारण करके इसे 5 से 6 महीने तक सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत के हिसाब से बाजार में बेच सकते हैं.

प्याज की खेती के लिए अक्टूबर से नवंबर के बीच नर्सरी तैयार करने की सलाह दी गई है. इस दौरान स्वस्थ और अच्छी क्वालिटी की पौध तैयार करने पर आगे फसल की बढ़वार बेहतर रखने में मदद मिल सकती है.

नर्सरी में पौध तैयार होने के बाद दिसंबर से जनवरी के बीच खेत में इसकी रोपाई की जा सकती है. सही समय पर रोपाई और खेत की उचित तैयारी अच्छी फसल लेने के लिए जरूरी मानी जाती है.

प्याज की उन्नत किस्म का चुनाव, समय पर नर्सरी और रोपाई के साथ फसल की सही देखभाल किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है. बेहतर उत्पादन और लंबे समय तक भंडारण से प्याज की खेती में कमाई बढ़ाने का मौका मिल सकता है.
Published at : 05 Oct 2026 04:25 PM (IST)






