Can Gestational Diabetes Cause Thyroid Problems Later: प्रेग्नेंसी एक महिला के शरीर में कई ऐसे बदलाव लाती है जो सिर्फ बाहर से नहीं, अंदरूनी तौर पर भी असर डालते हैं. कुछ बदलाव डिलीवरी के बाद खत्म हो जाते हैं, लेकिन कुछ लंबे समय तक शरीर पर असर छोड़ सकते हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज यानी गर्भावस्था के दौरान होने वाला डायबिटीज भी ऐसी ही एक स्थिति है, जिसे अक्सर लोग अस्थायी समस्या मान लेते हैं. लेकिन अब डॉक्टर मानते हैं कि इसका असर आगे चलकर थायरॉयड हेल्थ पर भी पड़ सकता है.
जिन चीजों को करते हैं इग्नोर, हो सकते हैं आपके लिए खतरनाक
डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे पर चला जाता है. थकान, बाल झड़ना, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स या लगातार कमजोरी जैसी चीजों को मां बनने का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. जबकि कई बार यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की तरफ इशारा कर सकते हैं.
इग्नोर करने से क्या हो सकती है दिक्कत?
आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी सर्विसेज विभाग के निदेशक डॉ. (कर्नल) विजय दत्ता बताते हैं बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर से जुड़े कई बदलाव होते हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आगे चलकर डायबिटीज, हार्ट डिजीज और थायरॉयड समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकती है.
जल्दी खत्म नहीं होते हैं इसके असर
अमेरिका की स्वास्थ्य संस्था सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, जेस्टेशनल डायबिटीज उन महिलाओं में भी हो सकती है जिन्हें पहले कभी डायबिटीज नहीं रही हो. डिलीवरी के बाद ब्लड शुगर सामान्य हो सकता है, लेकिन शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं.
थायरॉयड शरीर की छोटी लेकिन बेहद अहम ग्रंथि है, जो मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को कंट्रोल करती है. डॉ. विजय दत्ता के अनुसार, जेस्टेशनल डायबिटीज में होने वाला इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल बदलाव थायरॉयड फंक्शन को प्रभावित कर सकते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) और यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के रिसर्च में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस और थायरॉयड डिसफंक्शन के बीच संबंध की बात कही गई है.
कब नजर आते हैं इसके लक्षण?
समस्या यह है कि थायरॉयड के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं. लगातार थकान, बिना वजह वजन बढ़ना, बाल झड़ना, ड्राई स्किन, एंग्जायटी, डिप्रेशन, ठंड ज्यादा लगना, पीरियड्स अनियमित होना और ध्यान लगाने में परेशानी जैसे संकेत अक्सर महिलाएं सामान्य पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं.
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रेगुलर जांच करवाना क्यों महिलाओं के लिए जरूरी?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज भी सलाह देता है कि जेस्टेशनल डायबिटीज से गुजर चुकी महिलाओं को बाद में नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए. खासकर अगर परिवार में थायरॉयड या डायबिटीज की हिस्ट्री रही हो तो खतरा और बढ़ सकता है.
डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित एक्सरसाइज, अच्छी नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड जांच भविष्य में होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकती है. क्योंकि मां की सेहत सिर्फ प्रेग्नेंसी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर पड़ता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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