फार्म हाउस में ऐसे उगा सकते हैं रत्नागिरी मैंगो, मीठे में चीनी को कर देता है फेल

फार्म हाउस में ऐसे उगा सकते हैं रत्नागिरी मैंगो, मीठे में चीनी को कर देता है फेल


Ratnagiri Mango Farming: गर्मी का मौसम आते ही बाजार में आम की मिठास छा जाती है, लेकिन जब बात स्वाद, खुशबू और प्रीमियम क्वालिटी की होती है तो सबसे पहले नाम रत्नागिरी अल्फांसो मैंगो यानी हापुस का आता है. महाराष्ट्र के रत्नागिरी में उगने वाला यह आम अपनी खास खुशबू, मलाईदार गुदे और मिठास के कारण दुनिया भर में मशहूर है. यही वजह है कि कई बार लोग अपने फार्म हाउस और बड़े बगीचों में भी रत्नागिरी मैंगो उगाने की कोशिश कर रहे हैं.

एक्सपर्ट के अनुसार सही जलवायु, मिट्टी और देखभाल मिलने पर अल्फांसो आम की खेती दूसरे राज्यों में भी की जा सकती है. हालांकि इसका असली स्वाद और खुशबू रत्नागिरी की समुद्री जलवायु और वहां की लाल लेटराइट मिट्टी की वजह से सबसे अलग मानी जाती है. यही कारण है कि रत्नागिरी हापुस को जीआई टैग भी मिला हुआ है, जिससे उसकी पहचान और गुणवत्ता को कानूनी संरक्षण मिला है. 

कैसे हुई रत्नागिरी मैंगो की शुरुआत 

इतिहासकारों के अनुसार अल्फांसो आम का संबंध पुर्तगालियों से माना जाता है. कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली भारत के पश्चिमी तट पर आए और उन्होंने आम की ग्राफ्टिंग तकनीक को बढ़ावा दिया. इस तकनीक से अल्फांसो आम की खास किस्म तैयार हुई, इसका नाम पुर्तगाली सैन्य अधिकारी के नाम पर रखा गया. समय के साथ रत्नागिरी के किसानों ने पीढ़ियों तक इस खेती को बेहतर बनाया. समुद्री हवाओं, भरपूर बारिश और धूप ने यहां के आम को ऐसी प्राकृतिक मिठास दी जो दूसरे इलाकों के आमों से अलग मानी जाती है. स्थानीय लोग इसे हापुस नाम से जानते हैं और इसे फलों का राजा भी कहा जाता है. 

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फार्म हाउस में कैसे करें इसकी खेती 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अल्फांसो आम की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे बेहतर मानी जाती है. पौधे के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी जरूरी होती है. रत्नागिरी जैसी लाल लेटराइट मिट्टी इसकी गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करती हैं, लेकिन दूसरे इलाकों में भी जैविक खाद और सही देखभाल से इसकी अच्छी पैदावार ली जा सकती है. खेती के लिए ग्राफ्टेड पौधों का इस्तेमाल किया जाता है. किसान आमतौर पर बरसात के मौसम में पौधे लगाना पसंद करते हैं, ताकि जड़ों को पर्याप्त नमी मिल सके. पौधे के बीच पर्याप्त दूरी रखना जरूरी होता है, जिससे पेड़ों को धूप और हवा सही मात्रा में मिलती रहे. 

नेचुरल तरीके से पकाए जाते हैं आम 

रत्नागिरी अल्फांसो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें प्राकृतिक तरीके से पकाया जाता है. पारंपरिक तौर पर किसान घास या भूसे की मदद से आमों को पकाते हैं. इनमें कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. यही वजह है कि उनका स्वाद और खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि असली अल्फांसो आम की पहचान उसकी तेज खुशबू, सुनहरे पीले रंग और बिना रेशों वाले गूदे से होती है. एक पका हुआ आम पूरे कमरे को अपनी सुगंध से भर सकता है. इसका गूदा इतना मुलायम होता है कि कई लोग इसकी तुलना डेजर्ट से करते हैं.

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