रेवंत रेड्डी ने केंद्र पर मेट्रो विस्तार में देरी का लगाया आरोप, फंडिंग के मसले पर किशन रेड्डी

रेवंत रेड्डी ने केंद्र पर मेट्रो विस्तार में देरी का लगाया आरोप, फंडिंग के मसले पर किशन रेड्डी


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  • राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से राज्य के प्रोजेक्ट्स धीमे होने का आरोप।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार (15 जून, 2026) को हैदराबाद मेट्रो विस्तार के भविष्य को लेकर सीधा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक और राजनीतिक रुकावटों के कारण प्रोजेक्ट के अगले चरण के लिए जरूरी फंड जारी नहीं हो पा रहा है.

सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि हो सकता था, वह अब देरी, वित्तीय विवादों और राजनीतिक दखलंदाजी में उलझ गया है. इससे शहर के सबसे महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक की रफ्तार पर खतरा मंडरा रहा है.

कांग्रेस सरकारों के समय हुई थी मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरुआतः रेड्डी

रेवंत रेड्डी ने मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरुआत पिछली कांग्रेस सरकारों के समय से बताई और कहा कि हैदराबाद को ग्लोबल सिटी बनाने के लिए वर्ल्ड-क्लास पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत थी. उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना बनने के बाद प्रोजेक्ट के पहले चरण में काफी देरी हुई. उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के समय उठाई गई आपत्तियों के कारण समय-सीमा कई साल पीछे चली गई और प्रोजेक्ट की लागत काफी बढ़ गई.

दूसरे चरण के आगे बढ़ाने की कोशिश में मुश्किलः रेड्डी

मुख्यमंत्री के अनुसार, कंस्ट्रक्शन में देरी और कोविड-19 महामारी के आर्थिक असर के कारण मेट्रो ऑपरेटर पर वित्तीय बोझ बढ़ गया. उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स बनाने के बावजूद, प्रोजेक्ट को ऑपरेशनल नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे मौजूदा ढांचे के तहत आगे विस्तार करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है. उन्होंने तर्क दिया कि इससे दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की कोशिशें मुश्किल हो गईं.

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी पर CM रेड्डी ने लगाया आरोप

उनकी आलोचना का मुख्य केंद्र फंडिंग की मंजूरी और इंतजाम में केंद्र की भूमिका थी. रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि तेलंगाना ने मेट्रो विस्तार को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए कई विकल्प तलाशे थे, जिसमें कम ब्याज दर वाले फंडिंग मैकेनिज्म हासिल करना भी शामिल था. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय अधिकारियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक बातचीत के बावजूद प्रक्रियात्मक मंजूरी और फंड ट्रांसफर अटके हुए हैं.

मुख्यमंत्री ने बार-बार केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी की भूमिका पर सवाल उठाए और स्पष्टता की मांग की कि क्या केंद्र प्रस्तावित विस्तार में शामिल होना चाहता है या तेलंगाना को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने देना चाहता है. उन्होंने तर्क दिया कि अगर केंद्र की भागीदारी मुश्किल हो रही है, तो राज्य को जरूरी मंजूरी और क्लीयरेंस के साथ खुद प्रोजेक्ट को पूरा करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

उनके अनुसार, मंजूरी को लेकर अनिश्चितता उन फैसलों में देरी कर रही है, जो सीधे तौर पर हैदराबाद की भविष्य की ट्रांसपोर्ट जरूरतों को प्रभावित करते हैं.

राज्य सरकार से जुड़े प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी करने की कोशिशः रेड्डी

रेवंत रेड्डी ने इस विवाद को व्यापक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से भी जोड़ा और आरोप लगाया कि मौजूदा राज्य सरकार से जुड़े प्रोजेक्ट्स की रफ़्तार धीमी करने की कोशिशें की जा रही हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि मेट्रो विस्तार से जुड़े प्रशासनिक फैसले राजनीतिक होड़ की भेंट नहीं चढ़ने चाहिए, खासकर तब जब बात सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और शहरी आवागमन की हो.

यह विवाद तेजी से फैलते मेट्रोपॉलिटन इलाके में मास ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर (सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था) के बढ़ते महत्व को उजागर करता है. लाखों यात्रियों के लिए. यह बहस सिर्फ फंडिंग या राजनीतिक मतभेदों के बारे में नहीं है, बल्कि शहरी आवागमन, ट्रैफिक जाम और कनेक्टिविटी के भविष्य के बारे में है. मंजूरी, फंड ट्रांसफर और प्रोजेक्ट को लागू करने से जुड़े सवाल अभी भी अनसुलझे हैं, इसलिए अब ध्यान इस बात पर है कि क्या मेट्रो विस्तार का अगला चरण आगे बढ़ेगा या लंबे समय से चल रहे संस्थागत और राजनीतिक गतिरोध में फंसा रहेगा. 

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