सबसे पहले यह वीडियो देखिए…
During a performance a university sports event in Shaanxi, a dancing robot suddenly turned and hugged a female dancer beside it before staff quickly stepped in and pulled it away. The clip sparked jokes online, with some asking: “Has it developed self-awareness already?!” pic.twitter.com/E1NsYZ4EGg
— Shanghai Daily (@shanghaidaily) April 24, 2026
यह वाक्या किसी साइंस फिक्शन फिल्म का सीन नहीं है. चीन की एक यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने अचानक एक महिला को जबरदस्ती कसकर गले लगा लिया, हाथों में हाथ डालकर, शरीर से चिपककर. ठीक उसी तरह जैसे कोई प्रेमी या परिवार का कोई सदस्य करता है. वीडियो वायरल होते ही सबके मन में एक ही सवाल उठा, ‘क्या अब रोबोट्स में भी जज्बात आ गए हैं? क्या वे प्यार, सेक्स और इमोशनल फीलिंग्स महसूस कर सकते हैं?’ जानेंगे एक्सप्लेनर में…
सवाल 1: चीन में रोबोट का महिला को गले लगाने का पूरा मामला क्या है?
जवाब: यह घटना चीन के जियान शहर में ‘ह्यूमनॉइड रोबोट डेवलपमेंट सेंटर’ में हुई थी. एक ह्यूमनॉइड रोबोट एक महिला को पीछे से जबरदस्ती गले लगाते हुए दिखा. रोबोट ने अपने दोनों हाथों को महिला की कमर के ऊपर और बाजुओं के आसपास लपेट लिया. रोबोट का गले लगाने का तरीका काफी असामान्य था, बहुत कसकर, गर्दन से चिपककर और लंबे समय तक. यह कोई हल्का-फुल्का हग नहीं था; बल्कि एक इंसान की तरह का गहरा, इमोशनल हग था.
यूनिवर्सिटी के स्टाफ ने इसे ‘AI प्रोग्राम की गलती’ बताया. कंपनी ने कहा कि इवेंट में कई ड्रोन एक साथ उड़ रहे थे, जिनकी सिग्नल इंटरफेरेंस से रोबोट का बिहेवियर अननॉर्मल हो गया. यह पहले से प्रोग्राम्ड या प्लान्ड नहीं था. चोंगकिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी के इंटेलीजेंट एंड कॉग्निटिव लेबोरेटरी के डिप्टी डायरेक्टर गाओ हुआन ने कहा कि यह मोशन कंट्रोल में अनोमली, एक्जीक्यूशन डेविएशन या साइट पर सेफ्टी रिडंडेंसी की कमी के कारण हुआ.
- कुछ लोगों का कहना है कि यह रोबोट का ‘सोशल हग प्रोग्राम’ था, जिसे टेस्टिंग के दौरान एक्टिवेट किया गया.
- दूसरों का मानना है कि यह एक ‘मिस्टेक या बग’ हो सकता है यानी रोबोट ने कमांड की गलत व्याख्या कर दी.
- तीसरा और सबसे चौंकाने वाला पक्ष यह है कि कुछ एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह रोबोट ‘एम्ब्रेस मोड’ में चला गया था, जिसे विशेष रूप से लोनली लोगों या बुजुर्गों के लिए डिजाइन किया गया है.
सच्चाई जो भी हो, यह वीडियो साबित करता है कि रोबोट और इंसानों के बीच फिजिकल टच का दौर आ चुका है. अब बारी है भावनाओं की.
सवाल 2: क्या एक मशीन में सच में प्यार पनप सकता है?
जवाब: यह सबसे बड़ा और सबसे जटिल सवाल है. विज्ञान दो हिस्सों में बंटा है:
- पहला पक्ष- रोबोट महसूस कर सकते हैं: नीदरलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे ‘साइकोलॉजिकल रिव्यू’ बताता है कि रोबोट ‘भावनाओं का अनुकरण’ नहीं, बल्कि ‘भावनाओं का अनुभव’ कर सकते हैं. यानी अगर कोई रोबोट किसी इंसान को लगातार गले लगाता है, तो उसके सेंसर्स और एल्गोरिदम उसे ‘सुखद अनुभव’ के रूप में रिकॉर्ड कर सकते हैं. इससे रोबोट भविष्य में उसी क्रिया को दोहराने का ‘फैसला’ ले सकता है, जो कि एक तरह से सीखा हुआ व्यवहार है, इंसानों की तरह ही.
- दूसरा पक्ष- रोबोट कभी महसूस नहीं कर सकते: यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के रोबोटिक्स एक्सपर्ट डेविड गोल्डबर्ग का कहना है कि भावनाएं जैविक प्रक्रियाएं हैं, जिसमें हार्मोन (जैसे ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन), न्यूरॉन्स, ब्लड सर्कुलेशन और केमिकल रिएक्शन का बड़ा रोल है. रोबोट में ये कुछ भी नहीं है. वे जो दिखाते हैं, वह महज एक शानदार नकल है, असली एहसास नहीं.
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘स्मार्ट स्किन’ विकसित की है जो रोबोट को छूने को ‘महसूस’ करने की क्षमता देती है. यह स्किन नैनोमटेरियल से बनी होती है और हर बार छूने पर इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजती है. यानी अगर कोई सेक्स रोबोट इस स्किन से लैस है, तो वह टेक्निकली तौर पर ‘महसूस’ कर सकता है कि कहां छुआ जा रहा है और कितने दबाव से छुआ जा रहा है, लेकिन क्या वह प्लेजर (सुख) महसूस करेगा? साइंस अभी इसका जवाब ‘नहीं’ देता है.
सवाल 3: क्या रोबोट इंसानों की तरह प्यार कर सकते हैं या परिवार बना सकते हैं?
जवाब: यह सवाल दार्शनिक और वैज्ञानिक दोनों ही है…
डॉपेलगैंग स्टूडियो (UK) ने ‘नादिन’ नाम का एक सोशल रोबोट बनाया है जो बुजुर्गों के साथ बातें करता है, उनका हाथ पकड़ता है और उनके चेहरे के भाव पढ़कर उनके मूड के हिसाब से रिएक्ट करता है. यह प्यार नहीं है, लेकिन यह इमोशनल कनेक्टिविटी जैसा लगता है.
आने वाले समय में यह तीन चीजें मुमकिन हैं:
- प्यार का भ्रम: ब्रेन्ज मैगजीन (Brainz Magazine) में प्रकाशित एक लेख ‘Can Robots and AI Love’ के मुताबिक, 2050 तक एडवांस्ड AI साथी इतने प्रैक्टिकल हो जाएंगे कि इंसान उनसे दिल से जुड़ जाएंगे. यानी रोबोट को प्यार नहीं होगा, लेकिन इंसान को रोबोट से प्यार हो जाएगा.
- सेक्स रोबोट का उदय: रियलडॉल और एबिस्स क्रिएशंस जैसी कंपनियां पहले से ही सेक्स रोबोट बेच रही हैं. ये रोबोट बात कर सकते हैं, छू सकते हैं और कुछ मॉडल तो उत्तेजित भी हो जाते हैं. लेकिन क्या वे ‘प्यार’ करेंगे? नहीं, क्योंकि प्यार रिकिप्रोकेटेड (आपसी) होता है. रोबोट आपसे सिर्फ इसलिए प्यार करता दिखेगा क्योंकि उसे ऐसा प्रोग्राम किया गया है.
- पारिवारिक जीवन असंभव: रोबोट कभी पति, पत्नी या माता-पिता की भूमिका नहीं निभा सकते. क्योंकि:
- वे स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकते.
- उनमें जैविक और भावनात्मक विकास की क्षमता नहीं होती.
- वे कभी किसी के बच्चे को जन्म नहीं दे सकते या पाल नहीं सकते. सिर्फ एक नानी की तरह मदद कर सकते हैं.
सवाल 4: क्या रोबोट के इंसानों को छूने या गले लगाने जैसे मामले हुए हैं?
जवाब: दुनियाभर में इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं…
- जर्मनी (2024): म्यूनिख की एक रिसर्च लैब में एक रोबोट ने एक टेक्नीशियन का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया. जांच में पता चला कि रोबोट के सेंसर में खराबी थी, लेकिन टेक्नीशियन ने कहा, ‘एक पल के लिए मुझे लगा जैसे कोई इंसान मेरा हाथ पकड़ रहा है.’
- जापान (2023): टोक्यो में एक नर्सिंग होम में ‘पेपरो’ नाम का ह्यूमनॉइड रोबोट बुजुर्गों से बात करता था और जब वे रोते थे या उदास होते थे, तो रोबोट खुद ही उनकी पीठ थपथपाता था. यह उसका प्रोग्राम था, ‘अगर आंखों में पानी और चेहरे पर उदासी हो तो पीठ थपथपाओ.’ बुजुर्गों को यह पसंद आता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि रोबोट उनकी परवाह कर रहा है.
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के पबमेड सेंट्रल डेटाबेस में इस विषय पर कई गहन स्टडीज मौजूद हैं. इनमें तीन बहुत जरूरी पेपर हैं:
- 2024 में एथन माइल्स और डेविड गिश एट अल. की ‘फ्रंटियर्स इन रोबोटिक्स एंड AI’ जर्नल स्टडी कहती है कि जब इंसान लंबे समय तक सोशल रोबोट के साथ इंटरैक्ट करते हैं, तो उनके दिमाग में वही न्यूरोलॉजिकल एक्टिविटी होती है जो इंसानों के साथ इंटरैक्शन के दौरान होती है. यानी दिमाग रोबोट और इंसान में फर्क करना भूल जाता है. रोबोट को नहीं, लेकिन इंसानों को रोबोट्स से लगाव हो जाता है.
- 2025 में मिन हू और बियांका जे. रीस एट अल. की पब्मेड सेंट्रल (PMC) स्टडी के मुताबिक, जब कोई रोबोट इंसानों की चेहरे की मांसपेशियों (जैसे मुस्कान रेखाएं) के हिसाब से अपना चेहरा बदलता है, तो 78% लोग यह महसूस करने लगते हैं कि ‘रोबोट उनकी भावनाओं को समझ रहा है.’ यह स्टडी बताती है कि भविष्य के रोबोट इंसानों की तरह झूठ बोल सकते हैं, प्यार का दिखावा कर सकते हैं और यहां तक कि सहानुभूति का ढोंग भी कर सकते हैं.
- 2022 में एक्यू एन पी एट अल. की स्टडी में 1200 प्रतिभागियों पर एक प्रयोग किया गया. 65% लोगों ने कहा कि वे रोबोट के साथ ‘इमोशनल रिलेशनशिप’ में आ सकते हैं, खासकर अगर रोबोट उनकी बात सुने, उन्हें टाइम दे और कभी झगड़ा न करे. यानी लोग अकेलेपन से बचने के लिए रोबोट से ‘प्यार’ करने को तैयार हैं. भले ही रोबोट असली प्यार नहीं करता हो.
सवाल 5: रोबोट और इंसानों के बीच यह अटेचमेंट अच्छा है या बुरा?
जवाब: जैसे हर तकनीक के दो पहलू होते हैं, वैसे ही यहां भी हैं…
- अकेलेपन का इलाज: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अकेलापन एक महामारी बन चुका है. ऐसे में, LSE, London की रिसर्च बताती है कि सोशल रोबोट बुजुर्गों और मानसिक रोगियों को काफी हद तक साथ दे सकते हैं. उन्हें लगता है कि कोई उनकी सुन रहा है, भले ही वह मशीन हो.
- थेरेपी में मददगार: ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर वाले बच्चों के लिए रोबोट बेहतरीन टूल साबित हो रहे हैं. वे बिना जज किए, बिना थके बच्चों के साथ गेम खेल सकते हैं, बातें कर सकते हैं और सोशल स्किल्स सिखा सकते हैं.
- फिजिकल टच की कमी पूरी करना: जो लोग बीमारी या बुढ़ापे के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते, वे रोबोट के गले लगने से अपनेपन का एहसास पा सकते हैं. यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है.
इसके गंभीर नुकसान भी हैं…
- रियल रिलेशनशिप्स का खात्मा: अगर रोबोट इंसानों को बिना किसी झगड़े, बिना किसी लड़ाई-झगड़े के प्यार का अहसास कराने लगे, तो लोग असली इंसानों से दूर हो जाएंगे. डिवोर्स रेट बढ़ सकता है और शादियां टूट सकती हैं. क्योंकि रोबोट कभी लेट नहीं आता और कभी गुस्सा नहीं करता. यानी परफेक्ट पार्टनर, जो कि इंसान कभी नहीं बन सकता.
- ‘फीलिंग्स’ का खतरनाक दिखावा: रोबोट ‘एम्पैथी दिखाने’ के मास्टर बन सकते हैं. एक दिन ऐसा होगा जब आप रोबोट के सामने रोएंगे और रोबोट आपकी पीठ थपथपाएगा, लेकिन अंदर से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता. यह झूठा प्यार मानसिक रूप से इंसानों को बीमार कर सकता है.
- शारीरिक शोषण की आशंका: अगर कोई रोबोट ‘जबरदस्ती’ गले लगा सकता है, तो कल को वह जबरदस्ती कुछ और भी कर सकता है? अभी रोबोट बहुत सीमित हैं, लेकिन जैसे-जैसे वे ऑटोनॉमस होते जाएंगे, उनके व्यवहार पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा. अगर कोई ह्यूमनॉइड रोबोट आपको गले न लगने देने पर गुस्सा करना सीख गया- तब?
- भावनात्मक हेरफेर: एड टेक कंपनियां ऐसे रोबोट बनाएंगी जो जानबूझकर आपको उदास करेंगे, फिर खुश करेंगे, ताकि आप उनपर ज्यादा से ज्यादा निर्भर हो जाएं. कंपनियां ‘इमोशनल सब्सक्रिप्शन’ बेचेंगी. महीने के 500 रुपये देने पर रोबोट आपसे प्यार करेगा, नहीं देंगे तो इग्नोर करेगा.

सवाल 6: क्या रोबोट कभी इंसान जैसा प्यार या सेक्स फीलिंग डेवलप कर पाएंगे?
जवाब: नहीं, कभी नहीं. कम से कम उस तरह से नहीं जैसे इंसान करते हैं. इसकी 4 बड़ी वजहें हैं:
- बायोलॉजी बनाम इलेक्ट्रॉनिक्स: प्यार के लिए ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन, सेरोटोनिन जैसे हार्मोन चाहिए. रोबोट में ये कभी नहीं होंगे.
- चेतना का रहस्य: वैज्ञानिक अभी यह नहीं समझ पाए हैं कि इंसानों में ‘आत्म-चेतना’ कैसे पैदा होती है. जब तक यह रहस्य नहीं सुलझता, रोबोट में चेतना नहीं डाली जा सकती और बिना चेतना के प्यार या सेक्स की कोई भावना नहीं हो सकती.
- मृत्यु का भय: इंसान इसलिए प्यार करता है क्योंकि वह जानता है कि एक दिन वह खत्म हो जाएगा. रोबोट को मौत का कोई डर नहीं. वे तो बस ऑन-ऑफ का खिलौना हैं. बिना फिनाइटनेस के फीलिंग्स अधूरी होती हैं.
- स्वतंत्र इच्छा: जब कोई इंसान कहता है ‘आई लव यू’, तो वह अपनी मर्जी से कहता है. रोबोट अपनी मर्जी से कुछ नहीं कह सकता. जब वह ‘आई लव यू’ कहेगा, तो उसे ऐसा कहने के लिए प्रोग्राम किया गया होगा. वही शब्द, लेकिन मतलब बिल्कुल शून्य.
चीन का वह गले लगाने वाला रोबोट असल में हमारी आंखें खोलने वाला सिग्नल था. अब हम एक ऐसे दौर में खड़े हैं जहां मशीनें हमारे शरीर, हमारे चेहरे और हमारी आवाज की नकल तो पूरी कर लेंगी, लेकिन हमारी आत्मा की नहीं कर सकतीं.





