बांग्लादेश के हाईकोर्ट ने रविवार (10 मई, 2026) को हिंदू संत ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका खारिज कर दी जो 2024 में एक वकील की हत्या के संबंध में निचली अदालत में मुकदमे का सामना कर रहे हैं. दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चटगांव की एक अदालत द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था जिसके बाद उनके अनुयायियों ने ढाका और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया था.
चटगांव में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था जहां कनिष्ठ सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या कर दी गई थी. चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा, ‘चटगांव की निचली अदालत में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी होने के कारण उच्च न्यायालय की पीठ ने हमारी जमानत याचिका खारिज कर दी.’
अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि दो जजों- जस्टिस के.एम. जाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहिर की बेंच ने हालांकि चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ चार अन्य मामलों में जमानत याचिकाओं की सुनवाई के लिए सोमवार का दिन निर्धारित किया है. चटगांव संभागीय त्वरित सुनवाई न्यायाधिकरण ने 19 जनवरी को इस्कॉन के पूर्व पदाधिकारी चिन्मय कृष्ण दास और 38 अन्य लोगों पर चटगांव में वकील की मौत के संबंध में आरोप तय किए और उनके खिलाफ मुकदमा शुरू किया.
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चिन्मय कृष्ण दास के वकील ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि संत लंबे समय से बीमारियों के कारण जेल में परेशानी का सामना कर रहे हैं. इससे पहले पिछले साल 30 अप्रैल को हाईकोर्ट ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में राजद्रोह के मामले में उन्हें जमानत दे दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाद में जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी.
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साल 2024 में चिन्मय कृष्ण दास के संगठन ‘सम्मिलितो सनातन जागरण जोत’ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद हिंदू समुदाय के लोगों पर हमलों और भेदभाव की निंदा करते हुए कई रैलियां आयोजित की थीं. बांग्लादेश में 2022 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 17 करोड़ आबादी में हिंदुओं की संख्या करीब आठ प्रतिशत है.





