2025 में किस देश ने खरीदे सबसे ज्यादा हथियार, रेस में कहां है भारत, ये रहे चौंकाने वाले आंकड़े

2025 में किस देश ने खरीदे सबसे ज्यादा हथियार, रेस में कहां है भारत, ये रहे चौंकाने वाले आंकड़े


साल 2025 के शुरुआती महीनों में ही दुनिया के तमाम बड़े देशों ने हथियारों की कई बड़ी डील की हैं. इसमें सबसे पहला नाम अमेरिका का सामने आता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में मई में सऊदी अरब के साथ की गई 142 अरब डॉलर की ऐतिहासिक रक्षा डील न केवल अमेरिका के लिए बल्कि वैश्विक सैन्य कूटनीति में एक मील का पत्थर साबित हुई. इस सौदे में लड़ाकू विमान, ड्रोन, रडार सिस्टम और F-35A जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं.

पोलैंड ने 2 अरब डॉलर की पैट्रियट मिसाइल सिस्टम डील पर हस्ताक्षर किए. इससे न केवल यूरोप में अमेरिकी सैन्य तकनीक की उपस्थिति बढ़ी, बल्कि अमेरिका की रक्षा निर्यात नीति का वैश्विक प्रभाव भी साफ़ दिखाई दिया.

पोलैंड ने 2 अरब डॉलर की पैट्रियट मिसाइल सिस्टम डील पर हस्ताक्षर किए. इससे न केवल यूरोप में अमेरिकी सैन्य तकनीक की उपस्थिति बढ़ी, बल्कि अमेरिका की रक्षा निर्यात नीति का वैश्विक प्रभाव भी साफ़ दिखाई दिया.

ब्रिटेन ने भी 12 F-35A स्टील्थ फाइटर खरीदने का समझौता किया, जो NATO के सामरिक मिशन में नई भूमिका निभाएंगे. इन डील्स ने यह दर्शा दिया कि अमेरिका सिर्फ हथियार आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सैन्य रणनीति का शिल्पकार बन चुका है. अमेरिका अब हथियार सौदों के माध्यम से न केवल अपनी सैन्य अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रहा है, बल्कि रणऔनीतिक गठबंधनों को ठीक कर रहा है.

ब्रिटेन ने भी 12 F-35A स्टील्थ फाइटर खरीदने का समझौता किया, जो NATO के सामरिक मिशन में नई भूमिका निभाएंगे. इन डील्स ने यह दर्शा दिया कि अमेरिका सिर्फ हथियार आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सैन्य रणनीति का शिल्पकार बन चुका है. अमेरिका अब हथियार सौदों के माध्यम से न केवल अपनी सैन्य अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रहा है, बल्कि रणऔनीतिक गठबंधनों को ठीक कर रहा है.

यूरोप अब सामूहिक सैन्य सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. यूरोपीय संघ ने 150 अरब यूरो के सामूहिक हथियार खरीद कोष की स्थापना की है, जिससे रक्षा उत्पादों की स्वतंत्र खरीद को बढ़ावा मिलेगा. यह पहल यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूती देने के उद्देश्य से की गई है.

यूरोप अब सामूहिक सैन्य सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. यूरोपीय संघ ने 150 अरब यूरो के सामूहिक हथियार खरीद कोष की स्थापना की है, जिससे रक्षा उत्पादों की स्वतंत्र खरीद को बढ़ावा मिलेगा. यह पहल यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूती देने के उद्देश्य से की गई है.

फ्रांस ने स्वीडन से दो साब ग्लोबलआई निगरानी विमान खरीदने की डील की है. यह सौदा उच्च तकनीकी क्षमता के तहत आने वाला बेहद खास उदाहरण है जो एयर डिफेंस सिस्टम के क्षेत्र में यूरोप की ताकतों को बढ़ाएगा.

फ्रांस ने स्वीडन से दो साब ग्लोबलआई निगरानी विमान खरीदने की डील की है. यह सौदा उच्च तकनीकी क्षमता के तहत आने वाला बेहद खास उदाहरण है जो एयर डिफेंस सिस्टम के क्षेत्र में यूरोप की ताकतों को बढ़ाएगा.

ब्रिटेन, जापान और इटली ने मिलकर छठी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान बनाने के लिए ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) की शुरुआत की है. यह प्रोटोटाइप 2027 तक तैयार होने की संभावना है, जो न केवल तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक होगा, बल्कि यूरोप और एशिया के संयुक्त सैन्य शोध में मील का पत्थर होगा.

ब्रिटेन, जापान और इटली ने मिलकर छठी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान बनाने के लिए ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) की शुरुआत की है. यह प्रोटोटाइप 2027 तक तैयार होने की संभावना है, जो न केवल तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक होगा, बल्कि यूरोप और एशिया के संयुक्त सैन्य शोध में मील का पत्थर होगा.

भारत अब वैश्विक रक्षा क्षेत्र में केवल आयातक नहीं, बल्कि एक मजबूत निर्यातक और को-डेवलपर के रूप में उभर रहा है. 2025 तक भारत का रक्षा निर्यात 12% बढ़कर 2.76 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. यह बढ़ोत्तरी केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि बदलती भू-राजनीति में भारत की भूमिका को दर्शाता है.

भारत अब वैश्विक रक्षा क्षेत्र में केवल आयातक नहीं, बल्कि एक मजबूत निर्यातक और को-डेवलपर के रूप में उभर रहा है. 2025 तक भारत का रक्षा निर्यात 12% बढ़कर 2.76 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. यह बढ़ोत्तरी केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि बदलती भू-राजनीति में भारत की भूमिका को दर्शाता है.

भारत से फिलीपींस को दूसरी ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी प्राप्त हुई. वियतनाम 70 करोड़ डॉलर की ब्रह्मोस मिसाइल डील पर बातचीत कर रहा है. इंडोनेशिया 45 करोड़ डॉलर की मिसाइल डील को अंतिम रूप देने के करीब है. रिलायंस और जर्मनी की डाइहल डिफेंस के बीच 10,000 करोड़ की बारूद निर्माण डील हुई है.

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भारत में 156 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (प्रचंड) के लिए 45,000 करोड़ की मंजूरी और 63,000 करोड़ की राफेल-एम नेवल डील इस बात की पुष्टि करती है कि भारत अब घरेलू रक्षा उद्योग को भी प्राथमिकता दे रहा है.

भारत में 156 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (प्रचंड) के लिए 45,000 करोड़ की मंजूरी और 63,000 करोड़ की राफेल-एम नेवल डील इस बात की पुष्टि करती है कि भारत अब घरेलू रक्षा उद्योग को भी प्राथमिकता दे रहा है.

भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक समय है. 1990 और 2000 के दशक में, जहां भारत पूरी तरह से हथियारों का आयातक था, वहीं अब वह 'मेक इन इंडिया' और 'एक्सपोर्ट-रेडी इंडिया' की नीति के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है.  भारत का दृष्टिकोण अब केवल सुरक्षा पर आधारित नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दोनों रूपों में रक्षा सहयोग का केंद्र बन गया है.

भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक समय है. 1990 और 2000 के दशक में, जहां भारत पूरी तरह से हथियारों का आयातक था, वहीं अब वह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एक्सपोर्ट-रेडी इंडिया’ की नीति के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है. भारत का दृष्टिकोण अब केवल सुरक्षा पर आधारित नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दोनों रूपों में रक्षा सहयोग का केंद्र बन गया है.

Published at : 03 Jul 2025 06:58 AM (IST)

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