Vishwanath Jagdishila Doli: पवित्र नगरी हरिद्वार में विश्वनाथ जगदीशीला की 27वीं डोली के आगमन के साथ ही श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. डोली के स्वागत के दौरान हजारों श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़े और पूरा वातावरण जयकारों, भजन-कीर्तन और धार्मिक उल्लास से गूंज उठा. जैसे ही डोली शहर में प्रवेश कर रही थी, भक्तों ने फूलों की वर्षा कर उसका भव्य स्वागत किया. इस दौरान हरिद्वार की गलियां पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंगी नजर आईं.
डोली यात्रा के स्वागत में स्थानीय लोग, साधु-संत और श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे. श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और उत्साह साफ झलक रहा था. इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया, जिससे कि बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो.
इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह डोली यात्रा अपने 27वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और इस बार उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों का भ्रमण करेगी. उन्होंने कहा कि यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि लोगों को एक सूत्र में जोड़ने का भी कार्य करती है. उन्होंने बताया कि यात्रा का समापन 25 मई को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर विश्वनाथ पर्वत पर होगा, जिसे स्वामी राम तीर्थ और गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति और देव संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है.
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वहीं, महामंडलेश्वर ललिता नंद ने कहा कि यह देव डोली यात्रा सनातन संस्कृति को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने बताया कि इस यात्रा के जरिए लोगों में अपने तीर्थों, देवी-देवताओं और परंपराओं के प्रति श्रद्धा और विश्वास बढ़ाने का संदेश दिया जा रहा है. उन्होंने कामना की कि देवभूमि उत्तराखंड न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाए.
महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना भी है. उन्होंने गऊ माता, पितरों और भारत माता के प्रति श्रद्धा बढ़ाने का संदेश देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से लोगों को सत्कर्म, सेवा और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है.
इस प्रकार विश्वनाथ जगदीशीला की 27वीं डोली का हरिद्वार आगमन श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव बना और यात्रा के जरिए धार्मिक भावनाएं और भी मजबूत हुईं. साथ ही इस यात्रा में एकता, शांति और सांस्कृतिक चेतना की भी झलक देखी गई.
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