बंगाल-असम में एनडीए के पक्ष में क्यों हुई जबरदस्त वोटिंग ? हिमंता बिस्व सरमा ने बताई ये वजह

बंगाल-असम में एनडीए के पक्ष में क्यों हुई जबरदस्त वोटिंग ? हिमंता बिस्व सरमा ने बताई ये वजह


Assembly Election Results 2026: हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों के खिलाफ उनकी सरकार के “अडिग रुख” और विकास कार्यों ने असम विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को दो-तिहाई बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यह जीत असम के “मूल निवासियों की जीत” है और राज्य में विकास की रफ्तार आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने “डबल इंजन” सरकार और पिछले पांच वर्षों में हुए विकास को जीत का बड़ा कारण बताया.

एनडीए के पक्ष में बढ़ा विश्वास

शर्मा के अनुसार, उनकी सरकार ने असमिया “जाति” (समुदाय) की सुरक्षा का जो वादा किया था, उसे पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए गए, जिससे सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति भी हुई. उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों के मुद्दे पर उनके सख्त रुख का चुनावी परिणामों पर असर पड़ा.

126 सदस्यीय विधानसभा में राजग ने 102 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की, जिसमें भारतीय जनता पार्टी को 82 सीटें मिलीं, जबकि सहयोगी दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया.

सभी वर्गों का बीजेपी को समर्थन

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि “जेन जेड” समेत सभी वर्गों ने भाजपा का समर्थन किया, जो पार्टी के युवा उम्मीदवारों की जीत से स्पष्ट है. साथ ही उन्होंने “बाहरी” उम्मीदवारों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि असम की पहचान विविधता से बनी है और लोगों की जड़ों को लेकर विवाद खड़ा करना गलत है.

उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे नेता कम हैं जो असम की जनता की भावनाओं को समझते हैं, यही उसके खराब प्रदर्शन का कारण रहा.

बीजेपी को वोट शेयर में इजाफा

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि असम विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत में अपेक्षाकृत छोटे बदलाव ने सीटों के परिणाम पर बड़ा असर डाला. भारतीय जनता पार्टी को इस बार 37.81 प्रतिशत वोट मिले, जो 2021 के 33.21 प्रतिशत की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक है. इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा सीटों में देखने को मिला और पार्टी ने 60 से बढ़कर 82 सीटें जीत लीं, यानी 22 सीटों का इजाफा हुआ.

इसके विपरीत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थिति दिलचस्प रही. उसका वोट शेयर मामूली रूप से 29.67 प्रतिशत से बढ़कर 29.84 प्रतिशत हो गया, लेकिन इसके बावजूद उसकी सीटें 29 से घटकर 19 रह गईं. यह दर्शाता है कि केवल वोट प्रतिशत ही नहीं, बल्कि वोटों का वितरण और क्षेत्रीय प्रभाव भी चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

वहीं, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने कुल 102 सीटें जीतकर 126 सदस्यीय विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जो अब तक का उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है और बहुमत के 64 सीटों के आंकड़े से काफी आगे है. यह चुनाव इस बात का उदाहरण है कि थोड़े से वोट स्विंग से भी सीटों में बड़ा बदलाव आ सकता है, खासकर तब जब मुकाबला कई क्षेत्रों में करीबी हो.

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