1221वीं पवित्र छड़ी यात्रा: देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र नगरी हरिद्वार से श्री शंभू पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा के तत्वावधान में 1221वीं पवित्र छड़ी यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है. सदियों पुरानी इस सनातन परंपरा को निभाते हुए साधु-संतों का दल विश्व शांति, मानव कल्याण और भारत के निरंतर विकास के संकल्प के साथ चारधाम की यात्रा पर रवाना हुआ है.
ऐतिहासिक विरासत और आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा
यह छड़ी यात्रा भारत की उस महान सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसकी नींव आदि गुरु शंकराचार्य ने रखी थी. इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर अरुण गिरी महाराज ने यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. आज भी संत समाज उसी प्राचीन श्रद्धा, भक्ति और कड़े अनुशासन के साथ इस यात्रा को आगे बढ़ा रहा है.
यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और एकता का एक सशक्त माध्यम है.
प्रधानमंत्री के ‘राष्ट्र निर्माण’ के आह्वान का समर्थन
इस वर्ष की छड़ी यात्रा में भक्ति के साथ-साथ देशभक्ति का भी अनूठा उदाहरण देखने को मिला. आचार्य महामंडलेश्वर अरुण गिरी महाराज ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और अपीलों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया.
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संसाधनों का न्यूनतम उपयोग: प्रधानमंत्री की अपील को ध्यान में रखते हुए, इस बार संतों ने यात्रा में वाहनों और अन्य भौतिक संसाधनों की संख्या में भारी कटौती की है. इसका उद्देश्य संसाधनों की बचत कर राष्ट्रहित में योगदान देना है.
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आर्थिक जागरूकता का संदेश: प्रधानमंत्री द्वारा सोना न खरीदने और निवेश को देश के विकास में लगाने की अपील का संतों ने पुरजोर समर्थन किया है. आचार्य गिरी ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह परम कर्तव्य है कि वह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सरकार के निर्देशों का पालन करे.
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संत समाज का संकल्प: संत समाज ने यह संदेश दिया है कि राष्ट्र निर्माण के लिए वे किसी भी प्रकार के अनुशासन और त्याग के लिए तैयार हैं.
चारधाम यात्रा और विश्व शांति की प्रार्थना
यह पवित्र छड़ी हरिद्वार से प्रस्थान कर उत्तराखंड के चारों प्रमुख धामों गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ पहुंचेगी. यात्रा के दौरान साधु-संत निम्नलिखित मुख्य उद्देश्यों के लिए प्रार्थना करेंगे:
- विश्व शांति: वैश्विक संघर्षों के बीच शांति और भाईचारे की स्थापना.
- मानव कल्याण: संपूर्ण मानवता के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना.
- भारत का विकास: भारत को विश्व गुरु बनाने और विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाने का संकल्प.
1221वीं छड़ी यात्रा यह सिद्ध करती है कि धर्म और आधुनिक राष्ट्रवाद एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं. जहां एक ओर यह यात्रा सनातन धर्म की जड़ों को सींचती है, वहीं दूसरी ओर यह नागरिकों को देश के प्रति उनके कर्तव्यों की याद दिलाती है. इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में संत-महापुरुष शामिल हुए हैं, जो हिमालय की कंदराओं तक भारत के विकास का जयघोष करेंगे.
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