UAE New Pipeline Project: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे खतरनाक चोकपॉइंट बन गया है. यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है लेकिन फिलहाल ईरान से इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया है. इससे कच्चे तेल का आयात- निर्यात बंद हो गया और सीधा असर ईंधन की कीमत पर नजर आया है. लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरत यानी यूएई ने इसका तोड़ निकाल लिया है. यहां से इसके बारे में विस्तार से जानें.
क्या है यूएई का मास्टप्लान?
यूएई अब होर्मुज को बाइपास करके पश्चिम से पूर्व तट तक एक नई पाइपलाइन बना रहा है. नई पाइपलाइन के शुरू होने से फुजैरा से तेल निर्यात की क्षमता दोगुनी हो जाएगी. अभी जो हबशान-फुजैरा पाइपलाइन रोजाना 18 लाख बैरल तेल ले जाती है वही रोज 18 लाख बैरल तेल ले जा पाएगी.
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कब तक शुरू होगी नई पाइपलाइन?
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद ने कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी को पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन परियोजना में तेजी लाने का निर्देश दिया। उम्मीद है कि साल 2027 से ये नई पाइपलाइन शुरू हो जाएगी, जिसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को आसानी से बायपास कर दिया जाएगा.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
फुजैराह पहले से ही दुनिया के बड़े तेल स्टोरेज और बंकरिंग हब्स में शामिल है. अब इस नए प्रोजेक्ट के बाद यहां से तेल एक्सपोर्ट क्षमता काफी बढ़ जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूएई की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार में उसकी पकड़ को और मजबूत करेगा. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर चिंता के बीच यूएई लगातार अपने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटा है. ADNOC का यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है. इससे यूएई को तेल निर्यात के लिए होर्मुज रूट पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और वैश्विक सप्लाई को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.






