उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) का ई-अधियाचन पोर्टल सक्रिय हो गया है, जिसके साथ ही राज्य के सरकारी स्कूलों में 60 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती का रास्ता लगभग साफ हो गया है.
प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों का पूरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करें. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, भर्ती से जुड़ी आगे की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी. माना जा रहा है कि लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए विभाग तेजी से काम कर रहा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार पूरे प्रदेश में करीब 60 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं. इनमें से 11,508 पद शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में हैं, जबकि लगभग 48 हजार पद ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में खाली पड़े हैं. शहरी क्षेत्रों के रिक्त पदों की जानकारी पहले ही विभाग द्वारा आयोग को भेजी जा चुकी है. अब ग्रामीण क्षेत्रों के पदों का डेटा भी पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है. इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों की भर्ती काफी लंबे समय बाद होने जा रही है.
उम्र सीमा क्या है?
आयु सीमा की बात करें तो भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए. वहीं अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष प्रस्तावित है. उत्तर प्रदेश के मूल निवासी ओबीसी, एससी, एसटी और महिला उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष तक की छूट दी जाएगी. इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर मिलेगा.
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एग्जाम पैटर्न कैसा होगा?
परीक्षा पैटर्न को लेकर भी कुछ अहम जानकारी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार भर्ती परीक्षा में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. परीक्षा वस्तुनिष्ठ यानी एमसीक्यू आधारित हो सकती है. उम्मीदवारों को प्रश्नों के चार विकल्प दिए जाएंगे, जिनमें से सही उत्तर चुनना होगा. परीक्षा की अवधि लगभग दो घंटे रहने की संभावना है. बताया जा रहा है कि परीक्षा सितंबर 2026 तक आयोजित की जा सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि भर्ती अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी.
डिजिटल रिकॉर्ड होगा तैयार
भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ई-अधियाचन पोर्टल के जरिए सभी रिक्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे पदों की सही संख्या और उनकी स्थिति स्पष्ट रहेगी. इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी.
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