क्या घर पर भी हो सकती है काजू की खेती, जानें इसका तरीका

क्या घर पर भी हो सकती है काजू की खेती, जानें इसका तरीका


काजू का पेड़ गर्म मौसम में बेहतर तरीके से बढ़ता है. इसके लिए करीब 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सही माना जाता है. बहुत ज्यादा ठंड और पाला पौधे की ग्रोथ रोक सकता है. इसलिए ठंडे इलाकों में इसे उगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. पौधे को रोजाना करीब 6 से 8 घंटे की सीधी धूप चाहिए. इसके लिए खुली छत, बड़ा आंगन और धूप वाली बालकनी चुन सकते हैं.

काजू का पौधा लगाने के लिए सबसे पहले सही बीज चुनना होगा. बाजार में खाने के लिए मिलने वाला रोस्टेड काजू इस काम नहीं आएगा. पौधा तैयार करने के लिए छिलके वाला कच्चा और ताजा बीज चाहिए. इसे किसी भरोसेमंद नर्सरी से खरीदना बेहतर रहेगा. अगर ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो नर्सरी से ग्राफ्टेड पौधा भी खरीद सकते हैं. ऐसा पौधा बीज वाले पौधे से पहले फल दे सकता है.

काजू का पौधा लगाने के लिए सबसे पहले सही बीज चुनना होगा. बाजार में खाने के लिए मिलने वाला रोस्टेड काजू इस काम नहीं आएगा. पौधा तैयार करने के लिए छिलके वाला कच्चा और ताजा बीज चाहिए. इसे किसी भरोसेमंद नर्सरी से खरीदना बेहतर रहेगा. अगर ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो नर्सरी से ग्राफ्टेड पौधा भी खरीद सकते हैं. ऐसा पौधा बीज वाले पौधे से पहले फल दे सकता है.

बीज से पौधा तैयार करने के लिए कच्चे काजू को करीब 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें. इसके बाद पानी में नीचे बैठे अच्छे बीजों को अलग कर लें. गमले की मिट्टी में करीब 2 से 3 इंच गहरा गड्ढा बनाकर बीज लगाएं. ऊपर से हल्की मिट्टी डालने के बाद थोड़ा पानी दें. गमले को गर्म और रोशनी वाली जगह पर रखें. अंकुर निकलने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है.

बीज से पौधा तैयार करने के लिए कच्चे काजू को करीब 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें. इसके बाद पानी में नीचे बैठे अच्छे बीजों को अलग कर लें. गमले की मिट्टी में करीब 2 से 3 इंच गहरा गड्ढा बनाकर बीज लगाएं. ऊपर से हल्की मिट्टी डालने के बाद थोड़ा पानी दें. गमले को गर्म और रोशनी वाली जगह पर रखें. अंकुर निकलने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है.

काजू के पौधे को ऐसी मिट्टी चाहिए जिसमें पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे. इसके लिए बगीचे की मिट्टी, मोटी रेत और अच्छी तरह तैयार जैविक खाद मिलाकर पॉटिंग मिक्स बना सकते हैं. शुरुआत से ही करीब 18 से 24 इंच का गमला चुनना बेहतर रहेगा. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए कई छेद जरूर होने चाहिए. पौधा बड़ा होने पर इसे जमीन या बड़े कंटेनर में शिफ्ट करना पड़ेगा.

काजू के पौधे को ऐसी मिट्टी चाहिए जिसमें पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे. इसके लिए बगीचे की मिट्टी, मोटी रेत और अच्छी तरह तैयार जैविक खाद मिलाकर पॉटिंग मिक्स बना सकते हैं. शुरुआत से ही करीब 18 से 24 इंच का गमला चुनना बेहतर रहेगा. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए कई छेद जरूर होने चाहिए. पौधा बड़ा होने पर इसे जमीन या बड़े कंटेनर में शिफ्ट करना पड़ेगा.

गमले में मिट्टी भरते समय ऊपर थोड़ी जगह खाली रखें. पौधा लगाने के बाद तुरंत बहुत ज्यादा पानी न डालें. मिट्टी को केवल इतना नम रखें कि बीज और जड़ों को नमी मिलती रहे. ऊपरी मिट्टी सूखी दिखने पर ही अगला पानी दें. लगातार गीली मिट्टी में जड़ सड़ने और फंगस लगने का खतरा रहता है. बारिश के दौरान गमले की ड्रेनेज नियमित तौर पर चेक करते रहना भी जरूरी है.

गमले में मिट्टी भरते समय ऊपर थोड़ी जगह खाली रखें. पौधा लगाने के बाद तुरंत बहुत ज्यादा पानी न डालें. मिट्टी को केवल इतना नम रखें कि बीज और जड़ों को नमी मिलती रहे. ऊपरी मिट्टी सूखी दिखने पर ही अगला पानी दें. लगातार गीली मिट्टी में जड़ सड़ने और फंगस लगने का खतरा रहता है. बारिश के दौरान गमले की ड्रेनेज नियमित तौर पर चेक करते रहना भी जरूरी है.

पौधे को जरूरी न्यूट्रिशन देने के लिए हर 30 से 45 दिन में थोड़ी वर्मीकम्पोस्ट डाली जा सकती है. खाद को सीधे तने के पास डालने के बजाय कुछ दूरी पर मिट्टी में मिलाएं. इसके बाद हल्का पानी दे सकते हैं. सूखी और पीली पत्तियों को समय पर हटाते रहें. पौधा ज्यादा घना हो जाए तो हल्की प्रूनिंग करें. इससे हवा और धूप अंदर की शाखाओं तक आसानी से पहुंच पाएगी.

पौधे को जरूरी न्यूट्रिशन देने के लिए हर 30 से 45 दिन में थोड़ी वर्मीकम्पोस्ट डाली जा सकती है. खाद को सीधे तने के पास डालने के बजाय कुछ दूरी पर मिट्टी में मिलाएं. इसके बाद हल्का पानी दे सकते हैं. सूखी और पीली पत्तियों को समय पर हटाते रहें. पौधा ज्यादा घना हो जाए तो हल्की प्रूनिंग करें. इससे हवा और धूप अंदर की शाखाओं तक आसानी से पहुंच पाएगी.

काजू के पौधे पर कीड़े और फंगस का अटैक भी हो सकता है. इसलिए पत्तियों के रंग और उनकी हालत पर नजर रखें. सफेद परत, चिपचिपापन, छोटे छेद और काले निशान दिखाई देने पर प्रभावित पत्तियों को हटा दें. शुरुआती बचाव के लिए नीम के तेल का हल्का स्प्रे किया जा सकता है. समस्या ज्यादा बढ़ने पर किसी गार्डनिंग एक्सपर्ट से सलाह लें. बिना जानकारी के केमिकल का इस्तेमाल न करें.

काजू के पौधे पर कीड़े और फंगस का अटैक भी हो सकता है. इसलिए पत्तियों के रंग और उनकी हालत पर नजर रखें. सफेद परत, चिपचिपापन, छोटे छेद और काले निशान दिखाई देने पर प्रभावित पत्तियों को हटा दें. शुरुआती बचाव के लिए नीम के तेल का हल्का स्प्रे किया जा सकता है. समस्या ज्यादा बढ़ने पर किसी गार्डनिंग एक्सपर्ट से सलाह लें. बिना जानकारी के केमिकल का इस्तेमाल न करें.

बीज से उगाए गए काजू के पौधे पर फल आने में कई साल लग सकते हैं. वहीं ग्राफ्टेड पौधा इसके मुकाबले कम समय में फल देना शुरू कर सकता है. गमले में लगा पौधा आपको ज्यादा काजू तो नहीं देगा लेकिन घर पर काजू का पौधा उगाना अपने आप में एक मजेदार एक्सपीरिएंस जरूर हो सकता है. हालांकि इसे घर पर उगाने से पहले अपने इलाके का मौसम जरूर देख लें.

बीज से उगाए गए काजू के पौधे पर फल आने में कई साल लग सकते हैं. वहीं ग्राफ्टेड पौधा इसके मुकाबले कम समय में फल देना शुरू कर सकता है. गमले में लगा पौधा आपको ज्यादा काजू तो नहीं देगा लेकिन घर पर काजू का पौधा उगाना अपने आप में एक मजेदार एक्सपीरिएंस जरूर हो सकता है. हालांकि इसे घर पर उगाने से पहले अपने इलाके का मौसम जरूर देख लें.

Published at : 12 Sep 2026 02:44 PM (IST)

एग्रीकल्चर फोटो गैलरी



Source link